भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से अपने कच्चे तेल का स्रोत 40 देशों तक बढ़ा दिया है।
- वर्तमान में भारत के कच्चे तेल के आयात का लगभग 60% हिस्सा अब वैकल्पिक गलियारों के माध्यम से आता है।
विविधीकरण की आवश्यकता
- युद्ध का प्रभाव: अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण पोत परिवहन मार्ग के बंद होने का खतरा है, जहां से भारत के कच्चे तेल के आयात का लगभग 40% हिस्सा गुजरता है।
- LPG की बढ़ती मांग: अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी की 'इंडियन ऑयल मार्केट आउटलुक 2030' रिपोर्ट के अनुसार 'खाना पकाने के स्वच्छ ईंधन' कार्यक्रमों के कारण पिछले दशक में भारत का LPG आयात लगभग तीन गुना बढ़ गया है।
- भारत अपनी LPG आवश्यकता का केवल 40% ही उत्पादन करता है। शेष हिस्सा आयात किया जाता है, जिसका बड़ा हिस्सा उसी क्षेत्र (मध्य पूर्व) से आता है, जो वर्तमान में युद्धग्रस्त है।
- संप्रभुता का संघर्ष: अमेरिका द्वारा भारत पर रूसी तेल आयात कम करने के लिए दबाव डाला जा रहा है, जिसे वे "अनुमति" की आवश्यकता (जैसे 30 दिनों की अस्थायी छूट देना) के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं।
भारत के ऊर्जा आयात की स्थिति
- आयात की मात्रा: भारत ने वर्ष 2024-25 में लगभग 300 मिलियन मीट्रिक टन कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का आयात किया था।
- अकेले तेल और गैस क्षेत्रक भारत के कुल व्यापार (मात्रा के अनुसार) का लगभग 28% हिस्सा है।
- निर्भरता: भारत वर्तमान में अपनी कच्चे तेल की आवश्यकता का लगभग 88% और गैस की आवश्यकता का 51% आयात के माध्यम से पूरा करता है।
- भारत वैश्विक स्तर पर पेट्रोलियम उत्पादों का तीसरा सबसे बड़ा आयातक, चौथा सबसे बड़ा रिफाइनर और पांचवां सबसे बड़ा निर्यातक है।
ऊर्जा स्रोतों के विविधीकरण के लिए भारत द्वारा उठाए गए कदम
- UAE के साथ समझौता: भारत ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) खरीदने के लिए $3 बिलियन के समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।
- अमेरिका के साथ अनुबंध: भारत ने 2.2 मिलियन टन रसोई गैस आयात करने के लिए अमेरिका के साथ अपने पहले LPG 'टर्म डील' पर हस्ताक्षर किए।
- रणनीतिक पेट्रोलियम रिज़र्व (SPR): इंडियन स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिज़र्व लिमिटेड (ISPRL) ने 3 स्थानों (विशाखापत्तनम, मंगलुरु और पादुर) पर SPR सुविधाएं स्थापित की हैं।
- वैश्विक अन्वेषण: ओएनजीसी विदेश लिमिटेड (OVL) और निजी कंपनियों ने अफ्रीकी देशों में विभिन्न तेल और गैस अन्वेषण परियोजनाओं को शुरू किया है।
- भारत-कनाडा सहयोग: इंडिया एनर्जी वीक 2026 में भारत और कनाडा ने ऊर्जा सहयोग पर एक संयुक्त वक्तव्य पर हस्ताक्षर किए।