राष्ट्रीय भू-स्थानिक नीति (National Geospatial Policy) 2022 भू-स्थानिक डेटा तक पहुंच का लोकतांत्रीकरण कर रही है | Current Affairs | Vision IAS

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इस नीति का उद्देश्य भारत को भू-स्थानिक क्षेत्रक में एक वैश्विक नेता के रूप में स्थापित करना है।

भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी के बारे में

  • भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी उन आधुनिक उपकरणों और प्रणालियों के लिए एक व्यापक शब्द है, जिनका उपयोग पृथ्वी की सतह का मानचित्रण करने, समाजों को समझने और स्थानिक विश्लेषण करने के लिए डेटासेट्स एकत्र करने में किया जाता है।
    • "भू-स्थानिक" (Geospatial) शब्द का अर्थ किसी भी स्थान से संबंधित जानकारी है, विशेष रूप से पृथ्वी की सतह की विशेषताओं से संबंधित डेटा।
  • भू-स्थानिक प्रौद्योगिकियों के प्रकार: रिमोट सेंसिंग, भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS), लिडार (LiDAR), ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (GPS), और इंटरनेट मैपिंग तकनीक (जैसे गूगल अर्थ)।

राष्ट्रीय भू-स्थानिक नीति 2022 के बारे में

  • मुख्य लक्ष्य:
    • 2030 तक: पूरे देश के लिए उच्च-रिज़ॉल्यूशन वाले स्थलाकृतिक सर्वेक्षण और मानचित्रण प्रणाली स्थापित करना। साथ ही, एक अत्यधिक सटीक डिजिटल एलिवेशन मॉडल (DEM) विकसित करना।
    • 2030 तक: एक 'एकीकृत डेटा और सूचना संरचना' पर आधारित भू-स्थानिक ज्ञान अवसंरचना (GKI) स्थापित करना।
    • 2035 तक: अंतर्देशीय जल और गहरे समुद्र के तलरूप के लिए उच्च-रिज़ॉल्यूशन बाथमेट्रिक डेटा तैयार करना और प्रमुख शहरी केंद्रों के लिए नेशनल डिजिटल ट्विन विकसित करना।
  • संस्थागत ढांचा: इस तंत्र को गति देने के लिए भू-स्थानिक डेटा प्रोत्साहन और विकास समिति (GDPDC) को शीर्ष राष्ट्रीय निकाय के रूप में स्थापित किया गया है।
  • डेटा अवसंरचना: डेटा तक निर्बाध पहुंच और साझाकरण सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय भू-स्थानिक डेटा रजिस्ट्री (NGDR) तथा एक यूनिफाइड जियोस्पेशियल इंटरफेस (UGI) के निर्माण का आदेश दिया गया है।

भू-स्थानिक प्रौद्योगिकियों के लिए सरकारी पहलें

  • राष्ट्रीय भू-स्थानिक मिशन (NGM): इसे मूलभूत भू-स्थानिक अवसंरचना और डेटा विकसित करने के लिए 2025-26 में शुरू किया गया था।
  • ऑपरेशन द्रोणागिरी: भू-स्थानिक प्रौद्योगिकियों के वास्तविक दुनिया के अनुप्रयोगों को प्रदर्शित करने के लिए एक प्रायोगिक पहल।
  • CORS नेटवर्क (लगातार कार्यरत संदर्भ स्टेशन): सटीक स्थान डेटा के लिए भारतीय सर्वेक्षण विभाग (Survey of India) द्वारा शुरू किया गया।
  • भास्कराचार्य नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्पेस एप्लीकेशन एंड जियो-इंफॉर्मेटिक्स (BISAG-N): मानचित्र-आधारित GIS को लागू करने में विशेष सेवाएं और समाधान प्रदान करता है।
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भास्कराचार्य नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्पेस एप्लीकेशन एंड जियो-इंफॉर्मेटिक्स (BISAG-N)

यह एक संस्थान है जो मानचित्र-आधारित GIS (भौगोलिक सूचना प्रणाली) को लागू करने में विशेषज्ञ सेवाएं और समाधान प्रदान करता है, जो भू-स्थानिक अनुप्रयोगों के विकास में योगदान देता है।

CORS नेटवर्क (लगातार कार्यरत संदर्भ स्टेशन)

यह नेटवर्क सटीक स्थान डेटा प्रदान करने के लिए भारतीय सर्वेक्षण विभाग द्वारा स्थापित स्थिर GPS रिसीवरों की एक श्रृंखला है, जो सर्वेक्षण और मानचित्रण कार्यों के लिए आवश्यक है।

ऑपरेशन द्रोणागिरी

यह भू-स्थानिक प्रौद्योगिकियों के वास्तविक दुनिया के अनुप्रयोगों को प्रदर्शित करने वाली एक प्रायोगिक पहल है, जो व्यावहारिक उपयोग के मामलों को उजागर करती है।

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