CE20 एक उन्नत क्रायोजेनिक रॉकेट इंजन है। इसे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने स्वदेशी रूप से विकसित किया है।
- विश्व में केवल 6 देशों के पास यह तकनीक उपलब्ध है। ये हैं- संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस, जापान, फ्रांस, चीन और भारत।
- महत्व:
- LVM3 प्रक्षेपण यान: इसका उपयोग LVM3 रॉकेट के तीसरे चरण में किया जाता है।
- पेलोड क्षमता: भविष्य के मिशनों (जैसे गगनयान कार्यक्रम) के लिए पेलोड ले जाने की क्षमता को बढ़ाना।
- आत्मनिर्भरता: अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाना।
क्रायोजेनिक इंजन के बारे में
- परिभाषा: क्रायोजेनिक इंजन एक प्रकार का रॉकेट इंजन है जो अपने ईंधन और ऑक्सीडाइज़र के रूप में द्रवीकृत गैसों का उपयोग करता है।
- "क्रायोजेनिक" शब्द का अर्थ है कि इन गैसों को अत्यंत कम तापमान (-150°C से नीचे) पर रखा जाना चाहिए।
- प्रयुक्त प्रणोदकों (Propellants) के प्रकार : इसमें आमतौर पर तरल ऑक्सीजन (LOX) और तरल हाइड्रोजन (LH2) का उपयोग किया जाता है।
- कार्य सिद्धांत: यह एक 'प्रतिक्रिया इंजन' (reaction engine) है। यह एक दिशा में तेज गति से निकास गैसों (exhaust gases) को छोड़कर थ्रस्ट (thrust) उत्पन्न करता है। इससे रॉकेट विपरीत दिशा में आगे बढ़ता है।
