यह व्यापक ब्लूप्रिंट एकीकृत रक्षा स्टाफ (IDS) मुख्यालय ने तैयार किया है। इसका उद्देश्य रक्षा बलों को एक आधुनिक, एकीकृत और तकनीकी रूप से उन्नत सेना में बदलना है।
रोडमैप की मुख्य विशेषताएं
- युद्ध तत्परता और प्रतिक्रियाशीलता: इंटेलिजेंट प्लेटफॉर्म हासिल करके, हथियार प्रणालियों का आधुनिकीकरण करके और 'थिएटर रणनीतियों' को लागू करके सैन्य निवारण को मजबूत करना।
- संगठनात्मक चपलता और अंतर्संचालनीयता (Interoperability): तीनों सेनाओं के लिए एकीकृत रसद (logistics) व इन्वेंट्री प्रबंधन प्रणाली; संयुक्त मुख्यालय और संयुक्त संचालन समन्वय केंद्र की स्थापना।
- क्षमता विकास और निर्वाह: रक्षा भू-स्थानिक एजेंसी का विकास, 'मिशन सुदर्शन चक्र' के तहत वायु रक्षा प्रणाली; डेटा फोर्स और ड्रोन फोर्स का गठन।
- वैचारिक और सैद्धांतिक स्पष्टता: सूचना श्रेष्ठता (नेट-सेंट्रिक वारफेयर) से निर्णय श्रेष्ठता (डेटा-सेंट्रिक वारफेयर) की ओर संक्रमण; संज्ञानात्मक युद्ध (Cognitive Warfare) क्षमताओं का विकास।
- प्रशिक्षण, शिक्षा और अधिकारिता: युवाओं को आकर्षित करने के लिए 'अग्निपथ योजना' को मजबूत करना; विशेष रूप से AI और उभरती प्रौद्योगिकियों में उन्नत सैन्य तकनीकी पाठ्यक्रम।
- रक्षा कूटनीति: क्षेत्रक में मानवीय सहायता और आपदा राहत (HADR) के लिए 'प्रथम प्रतिक्रियाकर्ता' (First Responder) के रूप में कार्य करते हुए 'विश्वबंधु' के रूप में भारत की भूमिका स्थापित करना।
- रणनीतिक संस्कृति और परिवेश: औपनिवेशिक प्रथाओं को त्यागते हुए स्वदेशी भारतीय ज्ञान पर आधारित संस्कृति; रणनीतिक नेतृत्व और नवाचार के साथ सैन्य शिक्षा को संरेखित करने के लिए भारतीय रक्षा विश्वविद्यालय (IDU) की स्थापना।
रोडमैप को तीन चरणों में विभाजित किया गया है
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