यह रिपोर्ट आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय के लिए 2026-27 के अनुदान की मांगों का विश्लेषण करती है। साथ ही, राज्यों की वास्तविक कार्यान्वयन क्षमता के अनुरूप 'साक्ष्य-आधारित बजटीय पूर्वानुमान' अपनाने का आह्वान करती है।

भारत का शहरी परिदृश्य
- संवैधानिक स्थिति: अनुच्छेद 243W के तहत शहरी विकास एक 'राज्य सूची का विषय' है। 74वां संविधान संशोधन अधिनियम, 1992, शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) को 12वीं अनुसूची के तहत कार्य सौंपता है।
- तीव्र शहरीकरण: शहरी जनसंख्या 1901 में 25.9 मिलियन से बढ़कर 2011 में 377 मिलियन हो गई।
- 2036 तक इसके 594 मिलियन तक पहुँचने की उम्मीद है, और 2047 तक लगभग 50% आबादी शहरी क्षेत्रों में निवास करेगी।
- प्रमुख मुद्दे: अवसंरचना पर दबाव; किफायती आवास, पेयजल और सार्वजनिक परिवहन जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव।
- प्रमुख पहलें/योजनाएं: सरकार द्वारा चलाए जा रहे प्रमुख कार्यक्रमों में निम्नलिखित शामिल हैं:
- कायाकल्प और शहरी परिवर्तन के लिए अटल मिशन 2.0 (AMRUT 2.0);
- स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 (SBM-U 2.0);
- प्रधान मंत्री आवास योजना - शहरी 2.0 (PMAY-U 2.0);
- मेट्रो रेल परियोजनाएं, पीएम ई-बस सेवा योजना, म्युनिसिपल बॉन्ड, और सिटी इकोनॉमिक रीजन्स आदि।