ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (GIB) | Current Affairs | Vision IAS

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  • ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (GIB) परियोजना का कैप्टिव ब्रीडिंग कार्यक्रम चौथे वर्ष में प्रवेश कर गया है। कैप्टिव ब्रीडिंग यानी संरक्षित प्रजनन में ग्रेट इंडियन बस्टर्ड पक्षी की कुल संख्या 70 हो गई है।
  • यह भारतीय उपमहाद्वीप का स्थानिक (Endemic) पक्षी है। यह मुख्य रूप से कृषि-घास के मैदानों में प्राप्त होता है।
  • इसकी सर्वाधिक संख्या राजस्थान में पाई जाती है। इसके अलावा गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों में भी ये प्राप्त होते हैं।

In Summary

ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (GIB) परियोजना का कैप्टिव ब्रीडिंग कार्यक्रम चौथे वर्ष में प्रवेश कर गया है। कैप्टिव ब्रीडिंग यानी संरक्षित प्रजनन में ग्रेट इंडियन बस्टर्ड पक्षी की कुल संख्या 70 हो गई है।

ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (GIB) के बारे में

  • पर्यावास: यह भारतीय उपमहाद्वीप का स्थानिक (Endemic) पक्षी है। यह मुख्य रूप से कृषि-घास के मैदानों में प्राप्त होता है। 
    • इसकी सर्वाधिक संख्या राजस्थान में पाई जाती है। इसके अलावा गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों में भी ये प्राप्त होते हैं। 
    • राजस्थान में इसे 'गोडावण' के नाम से जाना जाता है।
  • विशेषताएँ:  
    • यह सर्वाहारी पक्षी है और 'ओटिडिडे' कुल से संबंधित है।
    • इसमें लैंगिक द्विरूपता पाई जाती है यानी नर और मादा की शारीरिक संरचना अलग-अलग होती है।
    • नर पक्षी में एक स्पष्ट गुलर पाउच होता है जो प्रजनन का संकेत देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। 
  • मुख्य खतरे: शिकार, हाई वोल्टेज बिजली लाइनों से टकराने से मौत, आदि।
  • संरक्षण स्थिति 
    • IUCN लाल सूची: क्रिटिकली एंडेंजर्ड 
    • वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972: अनुसूची-1
    • CITES: परिशिष्ट-1
    • वन्यजीव पर्यावासों के एकीकृत विकास के अंतर्गत प्रजाति पुनर्प्राप्ति कार्यक्रम में शामिल।

लोकसभा ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए दूसरी अनुपूरक अनुदान मांग को मंजूरी दे दी है। साथ ही, केंद्रीय वित्त मंत्री ने आर्थिक स्थिरीकरण कोष (Economic Stabilisation Fund - ESF) का भी प्रस्ताव रखा।

  • एक लाख करोड़ रुपये के कुल परिव्यय वाला 'आर्थिक स्थिरीकरण कोष' का उद्देश्य भारत को हाल के वैश्विक संकट, अप्रत्याशित आपूर्ति श्रृंखला  व्यवधान, आदि से निपटने में मदद करना है।

अनुपूरक अनुदान मांग  के बारे में

  • अर्थ: जब किसी विशेष सेवा के लिए चालू वित्त वर्ष में संसद द्वारा विनियोग अधिनियम के माध्यम से स्वीकृत राशि अपर्याप्त हो जाती है, तब अतिरिक्त धन की आवश्यकता के लिए अनुपूरक अनुदान की मांग की जाती है।
  • इसे राष्ट्रपति द्वारा संसद के दोनों सदनों के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है और वित्तीय वर्ष समाप्त होने से पहले पारित किया जाता है।
  • इसका उल्लेख संविधान के अनुच्छेद 115 के अंतर्गत किया गया है।

प्रधान मंत्री ने देशभर के किसानों के लिए पीएम किसान सम्मान निधि  की 22वीं किस्त जारी कर दी है।

पीएम किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) के बारे में

  • मंत्रालय: केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय
  • शुभारंभ वर्ष: 2019
  • योजना का प्रकार: केंद्रीय क्षेत्रक योजना 
  • उद्देश्य: भूमि-धारक किसानों की वित्तीय जरूरतों को पूरा करने में सहायता करना।
  • प्रमुख विशेषताएँ:  
    • लाभ:  पात्र भूमि-धारक किसान परिवारों (पति, पत्नी और नाबालिग बच्चे) को प्रतिवर्ष 6000 रुपये की वित्तीय सहायता दी जाती है। 
      • यह राशि 2000 रुपये की तीन समान किस्तों में सीधे किसानों के बैंक खातों में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से जमा की जाती है।
    • योजना के लिए पात्र नहीं हैं:
      • सभी संस्थागत भूमि-धारक (जैसे ट्रस्ट, कंपनियां,धार्मिक संस्थान, आदि); 
      • संवैधानिक पदधारकों, सरकारी कर्मचारियों, आयकरदाताओं तथा डॉक्टर, इंजीनियर जैसे पेशेवरों के परिवार।
    • लाभार्थियों की पहचान: लाभार्थियों की पहचान राज्य सरकारों और संघ राज्य क्षेत्रों द्वारा की जाती है।

भारत में सर्दियों के अंत और बसंत की शुरुआत में असामान्य गर्मी पौधों और जानवरों के व्यवहार को बदल रही है। वैज्ञानिकों के अनुसार, यह परिघटना ‘फेनोलॉजी’ (Phenology) यानी 'ऋतुजैविकी' के चक्र को प्रभावित कर रही है।

फेनोलॉजी (ऋतुजैविकी) के बारे में

  • फेनोलॉजी से तात्पर्य मौसमी जैविक परिघटनाओं के घटित होने के समय या चक्र से है। जैसे-फूल खिलना, प्रजनन और प्रवास।
  • जलवायु परिवर्तन इन चक्रों को बदल रहा है। इससे प्रजातियों और उनके पर्यावरण के बीच पारिस्थितिक असंगति (ecological mismatch) उत्पन्न हो रही है।
  • उदाहरण के लिए; 
    • कश्मीर हिमालयी क्षेत्र में पौधें सामान्य से 20–25 दिन पहले खिलने लगे हैं। इसके कारण मधुमक्खियों जैसे परागणकों के साथ उनका तालमेल बिगड़ रहा है, जिससे मधुमक्खियों की संख्या  में दीर्घकालिक गिरावट का खतरा पैदा हो गया है।
    • बढ़ती गर्मी के कारण पक्षियों और सरीसृपों के पर्यावास पर तनाव बढ़ रहा है और प्रजनन चक्र बाधित हो रहा है। उदाहरण के लिए-हॉक ईगल जैसे पक्षियों की प्रजनन गतिविधियों पर इसका गहरा असर देखा जा रहा है। 
    • मेंढक जैसे उभयचर जीव गर्मी से बचने के लिए गुफाओं में शरण ले रहे हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि उनकी पारगम्य त्वचा (Permeable skin) उन्हें पर्यावरणीय स्थितियों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील बनाती है।

ईरान–इजरायल–अमेरिका के बीच जारी युद्ध के बीच विशेषज्ञों का तर्क है कि ईरान भविष्य में हमलों को रोकने के लिए अपनी परमाणु क्षमता को हथियार बनाने के प्रति और अधिक साहस कर सकता है। 

  • इससे प्रतिद्वंद्वी शक्तियों के बीच “सुरक्षा से संबद्ध दुविधा” (Security Dilemma) उत्पन्न हो सकती है।

“सुरक्षा से संबद्ध दुविधा” के बारे में

  • परिभाषा: यह ऐसी स्थिति को दर्शाती है जिसमें कोई देश अपनी सुरक्षा बढ़ाने के लिए जो कदम उठाता है, वे अनजाने में अन्य देशों के लिए खतरे के रूप में देखे जाते हैं। इससे अन्य देश भी समान कदम उठाने लगते हैं।
    • इससे देशों के बीच अविश्वास, हथियारों की दौड़ और संभावित संघर्ष का एक दुष्चक्र उत्पन्न हो जाता है।
  • उत्पत्ति: इस अवधारणा को जॉन एच. हर्ज ने 1950 के अपने लेख “'आइडियलिस्ट इंटरनेशनलिज्म एंड द सिक्योरिटी डिलेमा'” में प्रस्तुत किया था। 
    • हर्बर्ट बटरफील्ड और रॉबर्ट जर्विस ने इस अवधारणा के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
  • यह अवधारणा ‘अंतरराष्ट्रीय संबंधों की यथार्थवादी परंपरा' के अंतर्गत आती है।
  • कारण: 
    • अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में अराजकता,
    • राष्ट्रों की मंशाओं के बारे में अनिश्चितता
    • धारणा और शक्ति की राजनीति।

केंद्रीय जल शक्ति मंत्री ने ‘सुजल गांव आईडी (Sujal Gaon ID)’  का शुभारंभ किया।

सुजल गांव आईडी के बारे में

  • शुभारंभ: इसे केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय द्वारा 'जल जीवन मिशन' के अंतर्गत शुरू किया गया है।
  • स्वरूप: यह ग्रामीण क्षेत्रों में पाइप्ड जलापूर्ति योजनाओं की पहचान के लिए एक विशिष्ट डिजिटल आईडी है।
  • उद्देश्य: जल स्रोत से घर में नल तक जलापूर्ति के लिए ग्रामीण पेयजल अवसंरचना का डिजिटल मानचित्र तैयार करना।
  • प्लेटफॉर्म: इसे 'सुजलम भारत' राष्ट्रीय डिजिटल आर्किटेक्चर के साथ जोड़ा गया है।
  • महत्त्व:
    • यह जलापूर्ति योजनाओं की निगरानी, पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाएगी। 
    • यह वर्ष 2028 तक 'हर घर जल' के सार्वभौमिक लक्ष्य की प्राप्ति में सहायक सिद्ध होगी।

पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी सुधार गृह में अत्यधिक भीड़भाड़ के कारण हर्पीस वायरस (Herpes Virus) के संक्रमण से सात कैदियों की मौत हो गई और 92 अन्य संक्रमित पाए गए हैं।

हर्पीस सिम्पलेक्स वायरस (HSV) के बारे में

  • इसे सामान्यतः 'हर्पीस' के रूप में जाना जाता है। यह एक सामान्य वायरल संक्रमण है जो मुँह या जननांगों पर दर्दनाक छाले या अल्सर का कारण बनता है।
    • इसका उपचार हो सकता है, लेकिन पूर्णतः ठीक नहीं किया जा सकता, क्योंकि वायरस आजीवन शरीर में मौजूद रहता है।
  • HSV के प्रकार:
    • HSV टाइप 1: 
      • मुख्य रूप से ओरल हर्पीस का कारण बनता है, जो मुंह के आसपास ठंडे छाले के रूप में दिखाई देता है।
      • यह ओरल कॉन्टैक्ट, लार या त्वचा के संपर्क से फैलता है।
      • यह ओरल-जेनिटल संपर्क के माध्यम से जेनिटल हर्पीस (जननांगों पर संक्रमण) भी उत्पन्न कर सकता है। ।
    • HSV टाइप 2
      • मुख्य रूप से जेनिटल हर्पीस का कारण बनता है।
      • यह यौन संबंध के दौरान संक्रमित त्वचा, घाव या शारीरिक तरल पदार्थ के संपर्क में आने से फैलता है।
      • दुर्लभ संचरण: टाइप 2 वायरस प्रसव के दौरान माँ से बच्चे में भी फैल सकता है, जिसे नियोनेटल हर्पीस कहा जाता है।

उच्चतम न्यायालय ने राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में घड़ियालों की सुरक्षा के लिए स्वतः संज्ञान लिया है।  

राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य के बारे में

  • अवस्थिति और क्षेत्रफल: यह मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में चंबल नदी के किनारे लगभग 5,400 वर्ग किमी में फैला हुआ है।
    • यह भारत का पहला और एकमात्र त्रि-राज्यीय (tri-state) नदी तटीय संरक्षित क्षेत्र है।
  • स्थापना: इसे 1979 में नदी तटीय जैव विविधता के संरक्षण के लिए स्थापित किया गया था।
  • महत्त्व: यह क्रिटिकली एंडेंजर्ड घड़ियाल का प्रमुख पर्यावास है।
    • चंबल नदी भारत की सबसे कम प्रदूषित बारहमासी नदियों में से एक है। इसलिए इस क्षेत्र में समृद्ध जलीय जैव विविधता प्राप्त होती है।
  • अभ्यारण्य में प्राप्त अन्य जीव-जंतु: गंगा नदी डॉल्फिन, रेड-क्राउन्ड रूफ्ड टर्टल, ताजे जल की अन्य कछुआ प्रजातियां, प्रवासी पक्षी, आदि ।
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प्रजाति पुनर्प्राप्ति कार्यक्रम (Species Recovery Programme)

यह संकटग्रस्त प्रजातियों की आबादी को स्थिर करने और बढ़ाने के लिए सरकारों या संरक्षण संगठनों द्वारा शुरू किए गए विशेष संरक्षण उपायों और योजनाओं का एक समूह है।

CITES (Convention on International Trade in Endangered Species of Wild Fauna and Flora)

An international agreement between governments, aiming to ensure that international trade in specimens of wild animals and plants does not threaten their survival. Appendix I lists species threatened with extinction, prohibiting or strictly regulating trade.

वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 (Wildlife Protection Act, 1972)

यह भारत में वन्यजीवों, पक्षियों और पौधों की रक्षा के लिए एक कानून है। इसमें वन्यजीवों के शिकार, व्यापार और उनके आवासों के संरक्षण के लिए प्रावधान हैं। अनुसूची-1 में सूचीबद्ध प्रजातियों को सर्वोच्च संरक्षण प्राप्त है।

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