भारत में डेटा सेंटर की क्षमता लगभग 375 मेगावाट (2020) से बढ़कर 1500 मेगावाट (2025) के आसपास हो गई है। ये डेटा सेंटर्स मुंबई, नवी मुंबई, हैदराबाद, बेंगलुरु, नोएडा और जामनगर जैसे शहरों में स्थित हैं।
डेटा सेंटर क्या है?
- यह एक इमारत के भीतर एक समर्पित और सुरक्षित स्थान या केंद्रीकृत स्थान है, जहां कंप्यूटिंग व नेटवर्किंग उपकरण केंद्रित होते हैं।
- उद्देश्य: बड़ी मात्रा में डेटा को एकत्रित करना, संग्रहीत करना, संसाधित (process) करना, वितरित करना या उन तक पहुंच प्रदान करना।
- अनुप्रयोग: डिजिटल भुगतान, क्लाउड स्टोरेज और AI जैसी एप्लिकेशन डेटा सेंटर्स में संग्रहीत व संसाधित डेटा पर चलती हैं।
डेटा सेंटर्स का महत्व
- डिजिटल अर्थव्यवस्था की बुनियाद: ये ऑनलाइन बैंकिंग और डिजिटल भुगतान जैसी महत्वपूर्ण डिजिटल सेवाओं का समर्थन करते हैं। इनसे विश्वसनीय डेटा भंडारण और प्रोसेसिंग सुनिश्चित होती है।
- उभरती प्रौद्योगिकियों को सक्षम बनाना: ये कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), बिग डेटा एनालिटिक्स और 5G तकनीक के लिए आवश्यक अवसंरचना प्रदान करते हैं।
- डेटा सुरक्षा को मजबूत करना: घरेलू डेटा सेंटर्स संवेदनशील डेटा के सुरक्षित भंडारण को सुनिश्चित करने, डेटा स्थानीयकरण नीतियों का समर्थन करने और विदेशी अवसंरचना पर निर्भरता कम करने में मदद करते हैं।
- रोजगार सृजन: डेटा सेंटर्स IT अवसंरचना प्रबंधन, साइबर सुरक्षा आदि में कौशल युक्त रोजगार के अवसर सृजित करते हैं।
मुख्य चुनौतियां
- उच्च परिचालन लागत: अत्यधिक विद्युत की खपत, अवसंरचना के रखरखाव आदि के कारण।
- साइबर सुरक्षा जोखिम: संवेदनशील डिजिटल डेटा के प्रति बढ़ते खतरों के लिए मजबूत सुरक्षा प्रणालियों की आवश्यकता होती है।
- कौशल की कमी: डेटा सेंटर्स और क्लाउड तकनीकों में कुशल पेशेवरों की सीमित उपलब्धता।
- जटिल विनियामक फ़्रेमवर्क्स: जैसे कि भूमि अधिग्रहण, पर्यावरणीय मंजूरी आदि।
भारत में डेटा सेंटर तंत्र को बढ़ावा देने की पहलें
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