केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने भारत की पांडुलिपि विरासत के मानचित्रण के लिए राष्ट्रव्यापी सर्वेक्षण शुरू किया | Current Affairs | Vision IAS

Upgrade to Premium Today

Start Now
मेनू
होम

यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के लिए प्रासंगिक राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय विकास पर समय-समय पर तैयार किए गए लेख और अपडेट।

त्वरित लिंक

High-quality MCQs and Mains Answer Writing to sharpen skills and reinforce learning every day.

महत्वपूर्ण यूपीएससी विषयों पर डीप डाइव, मास्टर क्लासेस आदि जैसी पहलों के तहत व्याख्यात्मक और विषयगत अवधारणा-निर्माण वीडियो देखें।

करंट अफेयर्स कार्यक्रम

यूपीएससी की तैयारी के लिए हमारे सभी प्रमुख, आधार और उन्नत पाठ्यक्रमों का एक व्यापक अवलोकन।

अपना ज्ञान परखें

आर्थिक अवधारणाओं में महारत हासिल करने और नवीनतम आर्थिक रुझानों के साथ अपडेट रहने के लिए गतिशील और इंटरैक्टिव सत्र।

ESC

In Summary

  • ज्ञान भारतम मिशन (जीबीएम) का उद्देश्य 75 वर्ष से अधिक पुराने पांडुलिपियों की पहचान करना और उनका एक राष्ट्रीय डिजिटल भंडार बनाना है।
  • पांडुलिपियाँ सांस्कृतिक पुनरुद्धार, भारतीय ज्ञान प्रणालियों (जैसे आयुर्वेद, योग, शून्य का सबसे प्रारंभिक उपयोग) को पुनर्जीवित करने और बौद्धिक चोरी पर अंकुश लगाने के लिए महत्वपूर्ण हैं।
  • संस्कृति मंत्रालय के अधीन पांडुलिपियों के लिए पुनर्गठित राष्ट्रीय मिशन, जीबीएम के पांच स्तंभ हैं जिनमें मानचित्रण, संरक्षण, डिजिटलीकरण और ज्ञान प्रसार शामिल हैं।

In Summary

केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने भारत की पांडुलिपि विरासतों का मानचित्रण यानी सूची तैयार करने के लिए राष्ट्रव्यापी सर्वेक्षण शुरू किया है।

  • इस कार्य का उद्देश्य देशभर में पांडुलिपियों की पहचान करनार ज्ञान भारतम् मिशन के पोर्टल पर इनका राष्ट्रीय डिजिटल भंडार तैयार करना है।
  • पांडुलिपि वह हस्तलिखित रचना होती है जो कागज, छाल, कपड़े, धातु, ताड़पत्र या किसी अन्य सामग्री पर लिखी गई हो, और जो कम से कम 75 वर्ष पुरानी हो तथा जिसका वैज्ञानिक, ऐतिहासिक या सौंदर्यात्मक महत्व हो। 

पांडुलिपियों के मानचित्रण का महत्व

  • सांस्कृतिक पुनर्जीवन: पांडुलिपियां सांस्कृतिक विविधता को संरक्षित कर सकती हैं, विरासत की पहचान को मजबूत करती हैं, भाषाई विविधता को बनाए रख सकती हैं और भारत का विश्व के साथ सांस्कृतिक संबंधों को बढ़ावा देती हैं।
    • उदाहरण के लिए, भारत की सबसे पुरानी पांडुलिपियों में शामिल गिलगित पांडुलिपियां भारत की बौद्ध कूटनीति को मजबूत करती हैं और भारत को पूर्वी एशियाई देशों से जोड़ती हैं। 
  • भारतीय ज्ञान प्रणालियों का पुनर्जीवन: पांडुलिपियों में आयुर्वेद, योग, वैज्ञानिक विषयों आदि से संबंधित स्वदेशी ज्ञान का विशाल भंडार सुरक्षित है।
    • उदाहरण के लिए, बख्शाली पांडुलिपि (तीसरी-चौथी शताब्दी ईस्वी) में ‘शून्य’ के प्रारंभिक उपयोग का संदर्भ मिलता है।
  • बौद्धिक सामग्रियों की चोरी को रोकना: पांडुलिपियों की सूची बनाने से बिना प्रलेखित (अन-डॉक्युमेंटेड) पांडुलिपियों की तस्करी और पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों के दुरुपयोग को रोकने में मदद मिलेगी।

ज्ञान भारतम् मिशन के बारे में

  • यह भारत की विशाल पांडुलिपि विरासत को संरक्षित, डिजिटाइज़ और प्रसारित करने की एक राष्ट्रीय पहल है।
  • मंत्रालय: केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय।
  • मिशन का प्रकार: केंद्रीय क्षेत्रक योजना
  • शुरुआत: यह वर्ष 2003 के राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन का पुनर्गठित संस्करण है।
  • पांच प्रमुख स्तंभ: पांडुलिपियों का मानचित्रण और अभिलेखन (रिकॉर्डिंग), पांडुलिपियों का संरक्षण, पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण और सुरक्षा, प्राचीन पांडुलिपियों का विवेचन (डिकोडिंग) तथा पांडुलिपियों के ज्ञान का अध्ययन और प्रसार। 

पांडुलिपियों के संरक्षण के लिए अन्य पहलें

  • ज्ञान-सेतु: यह ज्ञान भारतम् मिशन के तहत एक राष्ट्रीय AI इनोवेशन चैलेंज है। इसका उद्देश्य स्टार्टअप्स, विद्यार्थियों, आदि को पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण के लिए AI के उपयोग हेतु प्रोत्साहित करना है।
  • पुरावशेष तथा बहुमूल्य कलाकृति अधिनियम, 1972 (Antiquities and Art Treasures Act, 1972): यह कानून केंद्र सरकार के अलावा किसी भी अन्य व्यक्ति द्वारा 75 वर्ष से अधिक पुरानी पांडुलिपियों के निर्यात को प्रतिबंधित करता है।
  • अंतरराष्ट्रीय सहयोग: यूनेस्को मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड रजिस्टर में भारत की कई प्रविष्टियां शामिल हैं, जैसे-भगवद्गीता, नाट्यशास्त्र की पांडुलिपियां, आदि।
Watch Video News Today

Explore Related Content

Discover more articles, videos, and terms related to this topic

RELATED TERMS

3

केंद्रीय क्षेत्रक योजना

यह एक ऐसी सरकारी योजना है जिसका वित्तपोषण केंद्र सरकार द्वारा पूरी तरह से किया जाता है और जिसका कार्यान्वयन भी केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों या विभागों द्वारा किया जाता है। राज्य सरकारों की इसमें कोई वित्तीय भागीदारी नहीं होती है।

पुरावशेष तथा बहुमूल्य कलाकृति अधिनियम, 1972

यह कानून केंद्र सरकार के अलावा किसी भी अन्य व्यक्ति द्वारा 75 वर्ष से अधिक पुरानी पांडुलिपियों के निर्यात को प्रतिबंधित करता है, ताकि भारत की सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण हो सके।

ज्ञान-सेतु

ज्ञान भारतम् मिशन के तहत एक राष्ट्रीय AI (Artificial Intelligence) इनोवेशन चैलेंज है, जिसका उद्देश्य पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण के लिए AI के उपयोग हेतु स्टार्टअप्स और विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करना है।

Title is required. Maximum 500 characters.

Search Notes

Filter Notes

Loading your notes...
Searching your notes...
Loading more notes...
You've reached the end of your notes

No notes yet

Create your first note to get started.

No notes found

Try adjusting your search criteria or clear the search.

Saving...
Saved

Please select a subject.

Referenced Articles

linked

No references added yet