केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने भारत की पांडुलिपि विरासतों का मानचित्रण यानी सूची तैयार करने के लिए राष्ट्रव्यापी सर्वेक्षण शुरू किया है।
- इस कार्य का उद्देश्य देशभर में पांडुलिपियों की पहचान करना और ज्ञान भारतम् मिशन के पोर्टल पर इनका राष्ट्रीय डिजिटल भंडार तैयार करना है।
- पांडुलिपि वह हस्तलिखित रचना होती है जो कागज, छाल, कपड़े, धातु, ताड़पत्र या किसी अन्य सामग्री पर लिखी गई हो, और जो कम से कम 75 वर्ष पुरानी हो तथा जिसका वैज्ञानिक, ऐतिहासिक या सौंदर्यात्मक महत्व हो।
पांडुलिपियों के मानचित्रण का महत्व
- सांस्कृतिक पुनर्जीवन: पांडुलिपियां सांस्कृतिक विविधता को संरक्षित कर सकती हैं, विरासत की पहचान को मजबूत करती हैं, भाषाई विविधता को बनाए रख सकती हैं और भारत का विश्व के साथ सांस्कृतिक संबंधों को बढ़ावा देती हैं।
- उदाहरण के लिए, भारत की सबसे पुरानी पांडुलिपियों में शामिल गिलगित पांडुलिपियां भारत की बौद्ध कूटनीति को मजबूत करती हैं और भारत को पूर्वी एशियाई देशों से जोड़ती हैं।
- भारतीय ज्ञान प्रणालियों का पुनर्जीवन: पांडुलिपियों में आयुर्वेद, योग, वैज्ञानिक विषयों आदि से संबंधित स्वदेशी ज्ञान का विशाल भंडार सुरक्षित है।
- उदाहरण के लिए, बख्शाली पांडुलिपि (तीसरी-चौथी शताब्दी ईस्वी) में ‘शून्य’ के प्रारंभिक उपयोग का संदर्भ मिलता है।
- बौद्धिक सामग्रियों की चोरी को रोकना: पांडुलिपियों की सूची बनाने से बिना प्रलेखित (अन-डॉक्युमेंटेड) पांडुलिपियों की तस्करी और पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों के दुरुपयोग को रोकने में मदद मिलेगी।
ज्ञान भारतम् मिशन के बारे में
- यह भारत की विशाल पांडुलिपि विरासत को संरक्षित, डिजिटाइज़ और प्रसारित करने की एक राष्ट्रीय पहल है।
- मंत्रालय: केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय।
- मिशन का प्रकार: केंद्रीय क्षेत्रक योजना
- शुरुआत: यह वर्ष 2003 के राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन का पुनर्गठित संस्करण है।
- पांच प्रमुख स्तंभ: पांडुलिपियों का मानचित्रण और अभिलेखन (रिकॉर्डिंग), पांडुलिपियों का संरक्षण, पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण और सुरक्षा, प्राचीन पांडुलिपियों का विवेचन (डिकोडिंग) तथा पांडुलिपियों के ज्ञान का अध्ययन और प्रसार।
पांडुलिपियों के संरक्षण के लिए अन्य पहलें
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