समिति ने क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRBs) के संरचनात्मक समेकन के सफल समापन को रेखांकित करते हुए उनके कार्य संचालन को और बेहतर बनाने के लिए विभिन्न उपायों की सिफारिश की है।
- क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की संख्या 43 से घटाकर 28 कर दी गई है। इससे 11 राज्यों में अधिक व्यवहार्य और सक्षम संस्थाएं सुनिश्चित हुई हैं।
- डॉ. व्यास समिति की सिफारिशों के आधार पर इन बैंकों का समेकन चरणबद्ध तरीके से किया गया।
- यह समेकन “एक राज्य-एक क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक” (One State-One RRB) की अवधारणा से प्रेरित है।
समिति की प्रमुख सिफारिशें
- शिक्षा ऋण में अलग-अलग क्षेत्रकों से जुड़े जोखिमों को कम करना: RRBs को 'शिक्षा ऋण के लिए क्रेडिट गारंटी फंड योजना' (CGFSEL) में अपनी भागीदारी का पूरा लाभ उठाकर इन जोखिमों को कम करना चाहिए।
- इससे प्राथमिकता क्षेत्रक के तहत शिक्षा ऋणों में 13.8 प्रतिशत की उच्च सकल गैर-निष्पादित आस्तियों (GNPA) जैसे जोखिमों को दूर करने में मदद मिलेगी।
- CGFSEL के तहत, केंद्र सरकार विद्यार्थियों द्वारा लिए गए शिक्षा ऋणों पर, बिना कुछ गिरवी रखे (कोलेटरल) और तीसरे पक्ष की गारंटी के बिना, अधिकतम 7.5 लाख रुपये तक की गारंटी प्रदान करती है।
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित प्रौद्योगिकी का उपयोग: परिसंपत्तियों की गुणवत्ता की निगरानी और ऋण जोखिम के प्रभावी प्रबंधन के लिए AI आधारित स्वचालित प्रारंभिक चेतावनी संकेत प्रणाली का उपयोग किया जाए।
- आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) लाना: सरकार को उच्च लाभ अर्जित करने वाले RRBs को बाजार से पूंजी जुटाने और कॉर्पोरेट गवर्नेंस के उच्च मानकों को लागू करने के लिए IPO लाने के लिए मार्गदर्शन करना चाहिए।
क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (RRBs) के बारे में
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