वित्त संबंधी स्थायी समिति ने क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRBs) के कामकाज में सुधार के उपायों की सिफारिश की | Current Affairs | Vision IAS

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  • समिति ने शिक्षा ऋणों में उच्च सकल राष्ट्रीय व्यय अभिधारणा (जीएनपीए) को कम करने के लिए शिक्षा ऋणों हेतु ऋण गारंटी निधि योजना का लाभ उठाने की सिफारिश की है।
  • इसमें परिसंपत्ति गुणवत्ता की निगरानी के लिए एआई-संचालित प्रारंभिक चेतावनी संकेतों को तैनात करने और लाभदायक आरआरबी के लिए आईपीओ को प्रोत्साहित करने का सुझाव दिया गया है।
  • 1975 में स्थापित आरआरबी (आरआरबी) का विनियमन आरबीआई और नाबार्ड द्वारा किया जाता है, जिसका लक्ष्य 75% प्राथमिकता क्षेत्र ऋण प्रदान करना है।

In Summary

समिति ने क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRBs) के संरचनात्मक समेकन के सफल समापन को रेखांकित करते हुए उनके कार्य संचालन को और बेहतर बनाने के लिए विभिन्न उपायों की सिफारिश की है।

  • क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की संख्या 43 से घटाकर 28 कर दी गई है। इससे 11 राज्यों में अधिक व्यवहार्य और सक्षम संस्थाएं सुनिश्चित हुई हैं।
    • डॉ. व्यास समिति की सिफारिशों के आधार पर इन बैंकों का समेकन चरणबद्ध तरीके से किया गया।
  • यह समेकन “एक राज्य-एक क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक” (One State-One RRB) की अवधारणा से प्रेरित है।

समिति की प्रमुख सिफारिशें

  • शिक्षा ऋण में अलग-अलग क्षेत्रकों से जुड़े जोखिमों को कम करना: RRBs को 'शिक्षा ऋण के लिए क्रेडिट गारंटी फंड योजना' (CGFSEL) में अपनी भागीदारी का पूरा लाभ उठाकर इन जोखिमों को कम करना चाहिए।
    • इससे प्राथमिकता क्षेत्रक के तहत शिक्षा ऋणों में 13.8 प्रतिशत की उच्च सकल गैर-निष्पादित आस्तियों (GNPA) जैसे जोखिमों को दूर करने में मदद मिलेगी।
    • CGFSEL के तहत, केंद्र सरकार विद्यार्थियों द्वारा लिए गए शिक्षा ऋणों पर, बिना कुछ गिरवी रखे (कोलेटरल) और तीसरे पक्ष की गारंटी के बिना, अधिकतम 7.5 लाख रुपये तक की गारंटी प्रदान करती है।
  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित प्रौद्योगिकी का उपयोग: परिसंपत्तियों की गुणवत्ता की निगरानी और ऋण जोखिम के प्रभावी प्रबंधन के लिए AI आधारित स्वचालित प्रारंभिक चेतावनी संकेत प्रणाली का उपयोग किया जाए।
  • आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) लाना: सरकार को उच्च लाभ अर्जित करने वाले RRBs को बाजार से पूंजी जुटाने और कॉर्पोरेट गवर्नेंस के उच्च मानकों को लागू करने के लिए IPO लाने के लिए मार्गदर्शन करना चाहिए।

 

क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (RRBs) के बारे में

  • स्थापना: इनकी स्थापना वर्ष 1975 में नरसिंहम कार्य समूह (1975) की सिफारिशों के आधार पर क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक अधिनियम, 1976 के अंतर्गत की गई।
  • उद्देश्य: ग्रामीण अर्थव्यवस्था का विकास करना तथा विशेष रूप से लघु एवं सीमांत किसानों, कृषि श्रमिकों, लघु उद्यमियों आदि को ऋण और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराना।
  • अंशधारिताकेंद्र सरकार 50 प्रतिशत, राज्य सरकार 15 प्रतिशत, और प्रायोजक बैंक 35 प्रतिशत।
  • विनियमन: ये अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक (सरकारी बैंक) हैं। इनका विनियमन भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा तथा पर्यवेक्षण राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक द्वारा किया जाता है।
  • क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को अपने कुल ऋण (अग्रिम) का 75 प्रतिशत अनिवार्य रूप से प्राथमिकता क्षेत्रक को देना होता है।
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प्राथमिकता क्षेत्रक

प्राथमिकता क्षेत्रक (Priority Sector) अर्थव्यवस्था के उन क्षेत्रों को संदर्भित करता है जिन्हें बैंक ऋणों में विशेष महत्व दिया जाता है ताकि उनके विकास को बढ़ावा मिल सके। इनमें कृषि, लघु उद्योग, सूक्ष्म और लघु उद्यम, आवास, शिक्षा, और कमजोर वर्ग को ऋण आदि शामिल हैं। क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के लिए अपने कुल ऋण का कम से कम 75% इस क्षेत्रक को देना अनिवार्य है।

नरसिंहम कार्य समूह (1975)

नरसिंहम कार्य समूह (1975) भारतीय बैंकिंग क्षेत्र में सुधारों के लिए गठित एक महत्वपूर्ण समिति थी। इस समूह की सिफारिशों के आधार पर ही क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRBs) की स्थापना की गई थी। इस समूह ने भारतीय वित्तीय प्रणाली में विभिन्न संरचनात्मक और नियामक परिवर्तनों का सुझाव दिया था।

आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO)

आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (Initial Public Offering - IPO) एक प्रक्रिया है जिसके द्वारा कोई निजी कंपनी पहली बार जनता को शेयर जारी करके पूंजी जुटाती है। इससे कंपनी स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध होती है और उसके शेयर आम जनता के लिए खरीदे और बेचे जा सकते हैं। उच्च लाभ अर्जित करने वाले क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को पूंजी जुटाने और कॉर्पोरेट गवर्नेंस के मानकों को बेहतर बनाने के लिए IPO लाने हेतु प्रोत्साहित किया जा सकता है।

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