उच्चतम न्यायालय ने सरकार से फसल विविधीकरण नीति पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया | Current Affairs | Vision IAS

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  • 'किसान महापंचायत बनाम यूनियन ऑफ़ इंडिया' केस में ड्यूटी-फ्री पीली मटर के इम्पोर्ट को चुनौती दी गई थी, जिसमें कहा गया था कि इससे घरेलू कीमतें कम होती हैं और दालों की खेती कम होती है।
  • गेहूं-चावल के ज़्यादा प्रोडक्शन, पर्यावरण को हो रहे नुकसान, और न्यूट्रिशन और मिट्टी की सेहत को बेहतर बनाने के लिए फसल डायवर्सिफिकेशन की ज़रूरत है।
  • मुख्य चुनौतियों में फायदेमंद MSP की कमी, MSP-इम्पोर्ट पॉलिसी में अंतर, और इंफ्रास्ट्रक्चर/जागरूकता में अंतर शामिल हैं; SC ने दालों/तिलहन के लिए बेहतर इंटर-मिनिस्ट्रियल कोऑर्डिनेशन और स्टेबल लॉन्ग-टर्म पॉलिसी का सुझाव दिया।

In Summary

'किसान महापंचायत बनाम भारत संघ और अन्य' वाद में बिना किसी शुल्क के पीली दाल के आयात की अनुमति देने की नीति को चुनौती दी गई थी।

  • किसान महापंचायत की ओर से तर्क दिया कि इस नीति ने दालों की घरेलू कीमतों को कम कर दिया और स्थानीय किसानों को दलहन की खेती करने से हतोत्साहित किया। 

फसल विविधीकरण क्या है?

  • फसल विविधीकरण का अर्थ है कि किसान अपने खेत में एक ही फसल उगाने की जगह नई फसलें या नई कृषि पद्धतियाँ शामिल करें, ताकि इन मूल्यवर्धित अलग-अलग फसलों को उगाने से अधिक लाभ मिल सके और उन्हें बाजार में बेचने के बेहतर अवसर मिलें।

फसल विविधीकरण की आवश्यकता

  • गेहूं और धान की अधिक खेती: मौजूदा नीतियों और प्रथाओं के परिणामस्वरूप गेहूं और धान का अधिशेष उत्पादन हुआ है। इससे दलहन और तिलहन के उत्पादन पर प्रभाव पड़ा है और इनका आयात करना पड़ता है। 
  • पर्यावरण पर प्रभाव: विशेषकर उत्तर भारत में धान-गेहूं फसल चक्र के कारण भूजल स्तर और मृदा की गुणवत्ता में गिरावट दर्ज की गई है।
  • पोषण सुरक्षा: फसल विविधीकरण से संतुलित आहार में दलहन का उपभोग बढ़ाया जा सकता है।
  • मृदा स्वास्थ्य: दलहन नाइट्रोजन स्थिरीकरण करने वाली फसलें हैं, जो मृदा की उर्वरता बढ़ाती हैं और रासायनिक उर्वरकों की आवश्यकता को कम करती हैं।

फसल विविधीकरण की मुख्य चुनौतियां

  • प्रोत्साहनकारी MSP का अभाव: इसके कारण दलहन खुले बाजार में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से कम कीमत पर बिकती है, जिससे किसानों के लिए इसकी खेती आकर्षक नहीं रहती।  
  • MSP और आयात नीतियों में असंगति: सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए दालों पर अधिक MSP देती है। लेकिन बिना शुल्क या कम शुल्क पर आयात होने से बाजार में अधिक आपूर्ति हो जाती है। इससे कीमतें गिरकर MSP से नीचे चली जाती हैं। यह फसल विविधीकरण की आर्थिक व्यवहार्यता को प्रभावित करता है। 
  • अन्य चुनौतियां: अवसंरचना की कमी, कृषि संसाधनों और जागरूकता की कमी, पूंजी की कमी और जोखिम उठाने की सीमित क्षमता, जलवायु संबंधी कारक, तकनीकी ज्ञान का अभाव, आदि।

उच्चतम न्यायालय के प्रमुख सुझाव

  • शासकीय सुधार:
    • कृषि नीति में कमियों को दूर करने के लिए अलग-अलग मंत्रालयों के बीच समन्वय को मजबूत करना चाहिए।
    • दलहन और तिलहन किसानों के लिए स्थिरता और पूर्वानुमान (मांग और कीमत) सुनिश्चित करने हेतु एक समन्वित दीर्घकालिक नीति तैयार करने की जरूरत है।
  • MSP और मूल्य समर्थन:
    • दलहन के लिए MSP इतना अधिक होना चाहिए कि वह लघु कृषकों द्वारा उठाए गए विशेष जोखिम और खर्चों को कवर कर सके। इस पर स्वामीनाथन समिति की सिफारिशें ध्यान में रखने की आवश्यकता है।
    • किसानों को MSP पर दलहन बेचने के लिए एक सुनिश्चित प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराना चाहिए, ताकि फसल विविधीकरण को प्रोत्साहन मिले।
    • प्रोत्साहनकारी MSP के अभाव जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर जमीनी स्तर के विशेषज्ञों सहित बहु-हितधारकों से चर्चा करनी चाहिए।
  • आयात नीति: आयात शुल्क व्यवस्था का घरेलू MSP के साथ तालमेल हो ताकि आयात के कारण देश में उत्पादन करने वाले किसानों को नुकसान न हो।

 

 

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नाइट्रोजन स्थिरीकरण

Nitrogen Fixation. It is a biological process where atmospheric nitrogen is converted into ammonia or other nitrogen compounds that plants can use. Leguminous plants, like pulses, achieve this through symbiotic bacteria in their root nodules, enriching the soil and reducing the need for chemical fertilizers.

स्वामीनाथन समिति

Swaminathan Committee. This committee, chaired by M.S. Swaminathan, made significant recommendations regarding agricultural prices and farmer incomes. Its key suggestion was to set MSP at least 1.5 times the weighted average cost of production, a recommendation often discussed in the context of farmer welfare and agricultural economics.

तिलहन

तिलहन वे बीज वाली फसलें हैं जिनसे तेल निकाला जाता है, जैसे सोयाबीन, सरसों, मूंगफली, सूरजमुखी आदि। इनका उपयोग खाद्य तेलों के उत्पादन के साथ-साथ औद्योगिक अनुप्रयोगों में भी होता है।

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