रक्षा मंत्री ने भविष्य के युद्ध में ड्रोन और काउंटर-ड्रोन तकनीकों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत को सामरिक क्षेत्र में अपनी स्वायत्तता सुनिश्चित करने तथा रक्षा तैयारी को मजबूत करने के लिए ड्रोन उत्पादन प्रणाली विकसित करने की तत्काल आवश्यकता है।
युद्ध में ड्रोन की भूमिका
- निगरानी रखने में: ड्रोन वास्तविक समय में बेहतर निगरानी प्रदान करते हैं। इससे सैन्यकर्मी बिना जोखिम के दुश्मन की स्थिति और गतिविधियों पर नजर रख सकते हैं।
- दुश्मन की रक्षा प्रणालियों को पंगु बनाना: उदाहरण के लिए, रूस का ड्रोन अभियान यूक्रेन की वायु रक्षा प्रणालियों को पंगु बनाने और कमजोर करने के लिए शाहेद (Shahed) ड्रोन का उपयोग करता है।
- कम लागत वाली युद्ध-रणनीति: यूक्रेन के 'ऑपरेशन स्पाइडर वेब' ने प्रदर्शित किया कि कम लागत वाले UAVs और सुलभ तकनीक सम्मिलित रूप से दुश्मन के भीतर गहराई तक नुकसान पहुंचा सकते हैं।
- इलेक्ट्रॉनिक युद्ध: कुछ ड्रोन इलेक्ट्रॉनिक युद्ध क्षमताओं से युक्त होते हैं, जो दुश्मन की रडार और संचार प्रणालियों को जाम या भ्रमित (spoof) कर सकते हैं।
ड्रोन उत्पादन प्रणाली को सुदृढ़ करने के लिए पहलें
- ड्रोन और ड्रोन घटकों के लिए उत्पादन-से संबद्ध प्रोत्साहन (PLI) योजना: इसका उद्देश्य देश में ड्रोन उत्पादन को बढ़ावा देकर उच्च मूल्य वाले घरेलू निर्माण को प्रोत्साहित करना है।
- आयात नीति: सरकार ने CBU (पूर्णतः निर्मित), SKD (सेमी-नॉक डाउन), और CKD (पूर्णतः नॉक डाउन) इकाइयों में ड्रोन के आयात पर प्रतिबंध की घोषणा की है।
- कर संरचना में सुधार: सितंबर 2025 में ड्रोन पर GST को घटाकर एकसमान 5% कर दिया गया।
- ड्रोन विनिर्माण को प्रोत्साहन देने हेतु आयोजन/प्लेटफार्म: 'भारत ड्रोन शक्ति', 'भारत ड्रोन महोत्सव' और 'ड्रोन इंटरनेशनल एक्सपो' जैसे मंच 'ड्रोन-एज-ए-सर्विस' (DaaS) स्टार्टअप और नए व्यावसायिक मॉडल्स को बढ़ावा देते हैं।
- SwaYaan (स्वयान): यह मानव रहित विमान प्रणालियों (UAS) में मानव संसाधन विकास के लिए क्षमता निर्माण कार्यक्रम है।
