भारत के रणनीतिक पेट्रोलियम भंडारों की वर्तमान क्षमता 5.33 मिलियन मीट्रिक टन (MMT) है।
- पूरी क्षमता पर होने पर, यह भंडार भारत में कच्चे तेल की आपूर्ति के लगभग 9.5 दिनों के लिए पर्याप्त है।
रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (SPR) क्या है?
- परिचय: ये कच्चे तेल के भंडार हैं। इन्हें आपूर्ति में व्यवधान के दौरान ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार द्वारा बनाए रखा जाता है।
- ये तेल कंपनियों के पास सुरक्षित वाणिज्यिक भंडार के अतिरिक्त होते हैं।
- कार्यान्वयन एजेंसी: इंडियन स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व्स लिमिटेड (ISPRL) नामक विशेष प्रयोजन वाहन (SPV) के अंतर्गत। ISPRL की स्थापना 2004 में हुई थी।
- मंत्रालय: केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय।

- भंडारण तकनीक: कच्चे तेल को भूमिगत चट्टानी गुफाओं में भंडारित किया जाता है। ये गुफाएं जमीन के काफी नीचे, आमतौर पर तटीय क्षेत्रों के पास स्थित होती हैं।
अवस्थिति (मानचित्र देखिए):
- चरण-I में स्थापित SPRs (5.33 MMT): वर्तमान में तीन स्थानों पर संचालित;
- विशाखापत्तनम (आंध्र प्रदेश),
- मंगलुरु (कर्नाटक), और
- पादुर (कर्नाटक)
- चरण-II (2021 में स्वीकृत, अतिरिक्त 6.5 MMT क्षमता के साथ): भविष्य में विस्तार की योजना:
- चंडीखोल (ओडिशा)
- पादुर चरण-II
रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार का महत्व
- ऊर्जा सुरक्षा की दृष्टि से: युद्ध, आपूर्ति में व्यवधान, समुद्री मार्ग के बाधित होने की दशा में देश में उपभोक्ताओं को तेल की आपूर्ति होती रहती है।
- आर्थिक स्थिरता की दृष्टि से: यह बाजार में तेल के मूल्य को स्थिर बनाए रखता है, जिससे अचानक मुद्रास्फीति के झटकों से बचने में मदद मिलती है।
- रणनीतिक स्वायत्तता की दृष्टि से: विदेशी भू-राजनीतिक परिस्थितियों पर निर्भरता कम करता है।
भारत के समक्ष चुनौतियां
|