यह संशोधित संहिता वर्ष 2025 में प्रत्युष सिन्हा की अध्यक्षता में गठित एक उच्च स्तरीय समिति (HLC) की अनुशंसा पर आधारित है। नई संहिता भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के अध्यक्ष और पूर्णकालिक सदस्यों के लिए नैतिक दिशानिर्देश प्रदान करती है।
- इस HLC का गठन SEBI के तत्कालीन अध्यक्ष पर हिंडनबर्ग रिसर्च द्वारा लगाए गए ‘हितों के टकराव’ (Conflict of Interest) के आरोपों की पृष्ठभूमि में किया गया था।
SEBI आचार संहिता (Ethics Code) में मुख्य परिवर्तन
- SEBI के अध्यक्ष, पूर्णकालिक सदस्यों (WTMs) आदि के लिए संपत्ति और देनदारियों का सार्वजनिक तौर पर उल्लेख करना अनिवार्य बनाया गया है।
- SEBI के अध्यक्ष और पूर्णकालिक सदस्यों को SEBI के इनसाइडर ट्रेडिंग विनियमों के तहत “इनसाइडर” माना जाएगा और उन्हें इक्विटी (शेयरों) में निवेश करने से प्रतिबंधित किया गया है।
- निवेश सीमा: SEBI के सदस्यों को अपने पोर्टफोलियो का अधिकतम 25% ही म्यूचुअल फंड जैसे पूल्ड निवेश साधनों में निवेश करने की अनुमति है।
- उन्हें सेवानिवृत्ति के दो साल बाद तक उपहार स्वीकार करने या SEBI के समक्ष उपस्थित होने पर रोक रहेगी।
- संस्थागत ढांचा: एक 'नैतिकता और अनुपालन कार्यालय' तथा एक स्वतंत्र 'नैतिकता और अनुपालन निगरानी समिति' का गठन किया जाएगा।
- व्हिसलब्लोअर प्रणाली: सूचना देने वालों की पहचान छिपाने वाली और सुरक्षित 'व्हिसलब्लोअर प्रणाली' की स्थापना की जाएगी।
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के बारे में
- स्थापना: भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड की स्थापना 1988 में एक गैर-सांविधिक निकाय के रूप में हुई; बाद में SEBI अधिनियम, 1992 के तहत इसे सांविधिक दर्जा मिला।
- मुख्यालय: मुंबई; क्षेत्रीय कार्यालय: नई दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई, अहमदाबाद।
- उद्देश्य: निवेशकों को धोखाधड़ी, इनसाइडर ट्रेडिंग और अनुचित गतिविधियों से बचाना।
- कार्य: मध्यवर्तियों (ब्रोकर्स, म्यूचुअल फंड, मर्चेंट बैंकर, क्रेडिट रेटिंग एजेंसियां) का पंजीकरण और विनियमन, और कंपनियों के अधिग्रहण की निगरानी करना आदि।
- SEBI की शक्तियां:
- नियमों और विनियमों का प्रारूप तैयार करना (जैसे: इनसाइडर ट्रेडिंग विनियम)।
- धोखाधड़ी या अनैतिक कार्यों के मामलों में दंड लगाना।
- उल्लंघनकर्ताओं के खिलाफ विनियमों को लागू करना।