नियमों से बचने के लिए इस अपशिष्ट को गलत तरीके से 'स्क्रैप मेटल' (धातु के अपशिष्ट) घोषित किया गया था। यह घटना विकसित देशों से विकासशील देशों में अपशिष्ट डंपिंग की वैश्विक समस्या को स्पष्ट रूप से उजागर करती है।
- विकासशील देशों में अपशिष्टों के निपटान की जड़ NIMBY (नॉट इन माई बैकयार्ड) सिंड्रोम में निहित है।
NIMBY सिंड्रोम क्या है?
- यह ऐसी स्थिति को दर्शाता है जिसमें लोग विकास का तो समर्थन करते हैं, लेकिन उत्पन्न अपशिष्ट का अपने देश में निपटान का विरोध करते हैं।
- इसके कारण कुछ संस्थाएं खतरनाक अपशिष्ट को पूर्वी यूरोप और विकासशील देशों में निर्यात करने लगे, जहां पर्यावरण से संबंधित जागरूकता कम थी तथा उन देशों में विनियामक और विधिक तंत्र कमजोर थे।
- विकसित देश अक्सर “पुनर्चक्रण (रीसाइक्लिंग)” के नाम पर भारत जैसे विकासशील देशों में अपशिष्ट का निपटान करते हैं।
अपशिष्ट की डंपिंग से संबंधित मुद्दे/चिंताएं
- नैतिकता से जुड़ी चिंताएं: यह प्रवृत्ति ‘पर्यावरणीय न्याय (Environmental Justice)’ के सिद्धांत का उल्लंघन करती है। प्रदूषण का बोझ उन गरीब देशों पर डाला जाता है जो वैश्विक अपशिष्ट सृजन में कम योगदान करते हैं।
- यह गतिविधि विस्तारित उत्पादक जिम्मेदारी (Extended Producer Responsibility - EPR) व्यवस्था का भी उल्लंघन करती है।
- अपशिष्ट उपनिवेशवाद (Waste Colonialism) को बढ़ावा: यह उस गतिविधि को दर्शाता है जिसमें समृद्ध देश “पुनर्चक्रण” के बहाने अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और एशिया में अपने अपशिष्ट का निपटान करते हैं।
अपशिष्ट डंपिंग को रोकने के लिए वैश्विक पहलें
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