भारत के प्रधानमंत्री ने श्री बालेंद्र शाह को नेपाल के प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने पर बधाई दी तथा भारत-नेपाल मित्रता और सहयोग को मजबूत करने की इच्छा व्यक्त की।
भारत के लिए नेपाल का महत्व
- रणनीतिक एवं सुरक्षा की दृष्टि से महत्व: यह भारत और चीन के बीच एक बफर (मध्यवर्ती) देश के रूप में कार्य करता है और भारत की उत्तरी सीमा को सुरक्षित करता है।
- भारत की "नेबरहुड फर्स्ट” नीति के तहत, नेपाल क्षेत्रीय स्थिरता और सहयोग के लिए महत्वपूर्ण है, तथा बिम्सटेक के साथ भारत की भागीदारी को आकार देता है।
- क्षेत्र में आर्थिक प्रभाव: भारत, नेपाल का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। इससे नेपाल दक्षिण एशिया क्षेत्र में भारत के आर्थिक प्रभाव के लिए महत्त्वपूर्ण बन जाता है।
- जल संसाधन का प्रबंधन: नेपाल की नदियां भारत में जल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। नेपाल के साथ सहयोग देश के उत्तरी राज्यों में जल प्रबंधन और बाढ़ नियंत्रण को प्रभावित करता है।
- सैन्य सहयोग: भारतीय सेना की गोरखा रेजीमेंट्स दोनों देशों के बीच मजबूत सैन्य सहयोग और परस्पर विश्वास का परिचायक है। गोरखा रेजीमेंट्स में लगभग 32,000 नेपाली सैनिक शामिल हैं।
- सांस्कृतिक एवं लोगों के बीच संबंध: दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों की जड़ें गहरी और मजबूत हैं। इन्हें “रोटी-बेटी” संबंध के रूप में जाना जाता है।
भारत-नेपाल द्विपक्षीय संबंधों में चुनौतियां
- सीमा विवाद: कालापानी, लिपुलेख, लिम्पियाधुरा और सुस्ता को लेकर विवाद अनसुलझे हैं।
- चीन के प्रभाव को लेकर चिंताएं: नेपाल और चीन के बीच संबंध मजबूत हो रहा है। उदाहरण के लिए-चीन की बेल्ट और रोड इनिशिएटिव में नेपाल की भागीदारी।
- जल बंटवारा को लेकर विवाद: महाकाली, कोसी और गंडक नदी जल संधियों को लेकर समय-समय पर मुद्दे उभरते रहते हैं।
- नेपाल में भारत द्वारा वित्तपोषित जलविद्युत परियोजनाओं के क्रियान्वयन में देरी: पंचेश्वर, अरुण-III, अपर कर्णाली आदि परियोजनाओं के पूरा होने में विलंब हो रहा है।
- दोनों देशों के बीच खुली सीमा से जुड़े मुद्दे: इससे अवैध व्यापार और तस्करी को बढ़ावा मिलता है तथा भारत के लिए सुरक्षा संबंधी चिंताएँ उत्पन्न होती हैं।