संसदीय स्थायी समिति ने “देश में तिलहन और दलहन के उत्पादन एवं उपलब्धता” पर रिपोर्ट जारी की | Current Affairs | Vision IAS

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तिलहन वैसी फसलें हैं जिनमें तेल की उच्च मात्रा होने की वजह से उगाया जाता है। ये खाद्य तेल (खाना पकाने के लिए) और गैर-खाद्य तेल (औद्योगिक उपयोग के लिए), दोनों प्रदान करती हैं।

तिलहन के बारे में

  • महत्व: 
    • आर्थिक आधार पर: खाद्यान्नों के बाद कृषि क्षेत्रक में दूसरा सबसे बड़ा उत्पाद (कमोडिटी) है। भारत के कुल फसल क्षेत्र में से 14.3% पर इसकी खेती की जाती है। 
    • पोषण सुरक्षा के आधार पर: ये फसलें आहार से मिलने वाली ऊर्जा का 12–13% और आवश्यक वसा प्रदान करती हैं। इस तरह संतुलित आहार में इनका महत्वपूर्ण योगदान है।  
      • भारत में खाद्य-तेल की प्रति व्यक्ति खपत 1996–2006 के दौरान 9.85 किलोग्राम से बढ़कर 2022–23 में 20.3 किलोग्राम हो गई है। 
    •  छिपी हुई भुखमरी (Hidden Hunger) दूर करने में: वसा-घुलनशील विटामिन (A, D, E, K) से प्रचुर होने के कारण तिलहन सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी और कुपोषण को दूर करने में मदद करते हैं। 
    • किसानों की आजीविका के आधार पर: ये मुख्यतः वर्षा सिंचित क्षेत्रों में उगाई जाने वाली महत्वपूर्ण नकदी फसलें हैं। ये फसलें आय के स्रोतों के विविधीकरण और लाखों लघु एवं सीमांत किसानों के जीवन-यापन को सहारा देती हैं।
  • उत्पादन: भारत तिलहन का चौथा सबसे बड़ा उत्पादक है। अरंडी, तिल, कुसुम, नाइजर के उत्पादन में प्रथम स्थान पर; मूंगफली में द्वितीय  स्थान पर; तथा सरसों-रेपसीड के उत्पादन में तृतीय स्थान पर है।
  • समस्याएं:
    • कम उत्पादकता के कारण भारत वैश्विक वनस्पति तेल उत्पादन में केवल 6–7% का योगदान देता है।  
    • उच्च उपज वाली किस्मों (HYVs) के कम उपयोग और बीज प्रतिस्थापन दर (SRR) के अपर्याप्त होने के कारण उपज-अंतर बना हुआ है।
      • उपज-अंतर से आशय है: अनुसंधान केंद्र में उपज अनुमान और किसानों की वास्तविक उपज के बीच का अंतर। 
      • बीज प्रतिस्थापन दर (SRR) कुल फसल क्षेत्र का वह प्रतिशत है, जिसमें खेत में सुरक्षित रखे गए बीजों की बजाय प्रमाणित/गुणवत्तापूर्ण बीजों की बुवाई की जाती है।
  •  भारत अपनी खाद्य-तेल आवश्यकता का 56% आयात करता है (2023–24 में 15.66 मिलियन टन), जिससे वैश्विक मूल्य में अस्थिरता और आपूर्ति में व्यवधान होने से प्रभावित होने का खतरा बना रहता है।

तिलहन उत्पादन बढ़ाने के लिए समिति की सिफारिशें

  • पीएम-आशा योजना में सुधार करना चाहिए और इसके तहत न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीद को वर्तमान 25% से बढ़ाकर राष्ट्रीय तिलहन उत्पादन के 100% तक विस्तारित करना चाहिए। 
  • राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन – ऑयल पाम (NMEO-OP) के क्रियान्वयन को तेज किया जाए। साथ ही, ताजा फल गुच्छों (FFBs) के लिए पर्याप्त व्यवहार्यता मूल्य-अंतर भुगतान (Viability Gap Payment) प्रदान किए जाए और रोपण सामग्री की लागत पर 80% तक सब्सिडी दी जाए। 
    • मूल्य-अंतर से आशय है फसल मूल्य का न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम होना।  
  • जैव प्रौद्योगिकी में पर्याप्त निवेश किया जाए, जिसमें CRISPR-Cas9, मार्कर-सहायता प्राप्त फसल चयन (MAS) आदि शामिल हों, ताकि जलवायु-सहिष्णु, उच्च उपज और कीट-प्रतिरोधी किस्में विकसित की जा सकें। 
  • वर्ष 2030 तक देश के प्रत्येक जिले में कम से कम एक बीज केंद्र खोला जाए और साथी पोर्टल का विस्तार वर्ष 2027 तक सभी 36 राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों तक किया जाए।
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साथी पोर्टल

साथी पोर्टल (SATHI Portal) संभवतः एक सरकारी पोर्टल है जो कृषि या संबंधित क्षेत्रों में विभिन्न पहलों और सूचनाओं के प्रसार के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसे सभी राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों तक विस्तारित करने का लक्ष्य है।

बीज केंद्र

बीज केंद्र (Seed Hub) ऐसे केंद्र हैं जो उच्च गुणवत्ता वाले बीजों के उत्पादन, प्रसंस्करण और वितरण पर ध्यान केंद्रित करते हैं। भारत के प्रत्येक जिले में एक बीज केंद्र खोलने का लक्ष्य है।

मार्कर-सहायता प्राप्त फसल चयन (MAS)

मार्कर-सहायता प्राप्त फसल चयन (Marker-Assisted Selection - MAS) एक आणविक प्रजनन तकनीक है जो डीएनए मार्करों का उपयोग करके वांछित लक्षणों वाली फसल किस्मों की पहचान और चयन की प्रक्रिया को तेज करती है।

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