यह विजन भारत की डिजिटल भुगतान प्रणाली को मजबूत करने और विस्तार देने के लिए एक रोडमैप की रूपरेखा प्रदान करता है।
पेमेंट विजन 2028 के मुख्य क्षेत्र
- सीमा पार डिजिटल भुगतान में सुधार: डिजिटल माध्यमों से अंतरराष्ट्रीय भुगतान को आसान बनाने के लिए भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 और विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के तहत 'सिंगल-विंडो ऑथराइजेशन' प्रक्रिया की संभावना तलाशने की बात कही गई है।
- ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम (TReDS) की अंतर-संचालनीयता: MSMEs को वित्तपोषण प्रदान करने में दक्षता बढ़ाने के लिए अलग-अलग भुगतान प्लेटफार्मों के बीच एकीकरण को बढ़ावा दिया जाएगा।
- प्रस्तावित पहलें: "स्विच ऑन/ऑफ" सुविधा, पेमेंट्स स्विचिंग सर्विस (PaSS), यूनिफॉर्म डोमेस्टिक लीगल एंटिटी आइडेंटिफायर (DLEI) जैसे कदम उठाए जाएंगे।
भारत की डिजिटल भुगतान प्रणाली के बारे में
- विश्व में अग्रणी: विश्व के लगभग 50% रियल-टाइम डिजिटल भुगतान भारत में निपटाए (प्रोसेस)) जाते हैं।
- प्रमुख पहलें:
- डिजिटल अवसंरचना का प्रसार: 2004 में रियल-टाइम ग्रॉस सेटलमेंट (RTGS) की शुरुआत की गई। साथ ही, नेशनल इलेक्ट्रॉनिक फंड ट्रांसफर (NEFT), इलेक्ट्रॉनिक क्लियरिंग सर्विसेज (ECS) और चेक ट्रंकेशन सिस्टम (CTS) की भी शुरुआत की गई।
- संस्थागत व्यवस्था का प्रावधान: 2005 में RBI के तहत भुगतान और निपटान प्रणाली विभाग (DPSS) का गठन किया गया। 2008 में भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) की स्थापना की गई।
- विनियामकीय व्यवस्था: भुगतान और निपटान प्रणाली (PSS) अधिनियम, 2007 लागू किया गया। इस अधिनियम ने RBI को भुगतान प्रणालियों को विनियमित करने का वैधानिक अधिकार प्रदान किया।
- रूपांतरणकारी डिजिटल भुगतान प्लेटफॉर्मों की शुरूआत: यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI), भारत बिल पेमेंट सिस्टम (BBPS), और आधार-सक्षम भुगतान प्रणाली (AePS) जैसी प्रणालियों की शुरुआत की गई।
- डिजिटल भुगतान बाजार का विस्तार: प्रीपेड पेमेंट इंस्ट्रूमेंट्स (PPIs) का लाइसेंस प्रदान किया गया और विस्तार किया गया। MSME को यथाशीघ्र भुगतान प्राप्त करने के लिए ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम (TReDS) की शुरुआत की गई। पेमेंट एग्रीगेटर्स पर मास्टर दिशा-निर्देश जारी किए गए।
