रक्षा मंत्रालय के अनुसार भारत का रक्षा निर्यात वित्त वर्ष 2025-26 में ₹38,424 करोड़ के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुँचा | Current Affairs | Vision IAS

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मुख्य उपलब्धियाँ

  • निर्यात संवृद्धि: पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 62.66% की वृद्धि दर्ज की गई।
    • 2021-22 से 2025-26 तक निर्यात में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है।
  • क्षेत्रकवार योगदान:
    • रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (DPSUs): 54.84%
    • निजी क्षेत्र: 45.16%
  • वैश्विक पहुँच: वित्त वर्ष 2025-26 तक भारत 80 से अधिक देशों को रक्षा उत्पादों का निर्यात कर रहा था।

महत्व

  • रणनीतिक: भारत को रक्षा उपकरणों के वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करता है।
  • कूटनीतिक: रक्षा निर्यात से भारत पर अन्य देशों का विश्वास बढ़ा है, अंतर-सहयोग क्षमता बढ़ी है और दीर्घकालिक साझेदारी को भी बढ़ावा मिल रहा है।
  • स्वदेशीकरण को बढ़ावा: वित्त वर्ष 2023-24 में भारत का स्वदेशी रक्षा उत्पादन रिकॉर्ड स्तर पर पहुँचा।
  • आत्मनिर्भरता के लक्ष्य की प्राप्ति: भारत का लक्ष्य वर्ष 2029 तक ₹3 लाख करोड़ का रक्षा उत्पादन करना और ₹50,000 करोड़ मूल्य का रक्षा निर्यात है।
  • अन्य दृष्टि से महत्व: रोजगार सृजन, निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी, आदि।

स्थायी चुनौतियां

  • आयात पर उच्च निर्भरता,
  • वैश्विक व्यवधानों से प्रभावित होना,
  • विश्व में रक्षा विनिर्माण में पहले से स्थापित देशों से प्रतिस्पर्धा,
  • विनियामकीय नियमों की वजह से देरी, आदि

रक्षा निर्यात को बढ़ावा देने हेतु प्रमुख पहलें

  • रक्षा उत्कृष्टता के लिए नवाचार (iDEX) फ्रेमवर्क: यह स्टार्टअप्स और MSMEs के माध्यम से नवाचार को बढ़ावा देता है।
  • FDI में उदारीकरण: प्रौद्योगिकी आकर्षित करने के लिए स्वचालित मार्ग के तहत 74% तक FDI की अनुमति।
  • रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया 2020: यह रक्षा खरीद में स्वदेशी घटकों के उपयोग को बढ़ावा देती है।
  • रक्षा औद्योगिक गलियारे (DICs): उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में औद्योगिक विनिर्माण प्रणालियों को बढ़ावा देने हेतु।
  • अनुसंधान, विकास और नवाचार (RDI) योजना: रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, निजी कंपनियों, MSMEs और स्टार्टअप्स के बीच सहयोग को बढ़ावा देने के लिए।
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रक्षा औद्योगिक गलियारे (DICs)

ये विशेष औद्योगिक क्षेत्र हैं जिन्हें रक्षा विनिर्माण और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए स्थापित किया गया है, जैसे कि उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में।

रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया 2020

यह रक्षा मंत्रालय द्वारा रक्षा खरीद की प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित और स्वदेशीकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जारी की गई एक नीति है।

FDI में उदारीकरण

यह रक्षा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) को आकर्षित करने के लिए सरकार द्वारा नियमों को सरल बनाने की प्रक्रिया है, जिससे विदेशी कंपनियाँ भारत में निवेश कर सकें और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को बढ़ावा मिल सके।

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