वर्ष 2022 में हस्ताक्षरित इस समझौते ने व्यापार को बढ़ाने, उद्योगों के बीच संबंधों को मजबूत करने तथा व्यवसायों, उद्यमियों और रोजगार के लिए नए अवसर सृजित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

ECTA से प्राप्त प्रमुख लाभ
- ऑस्ट्रेलिया को भारत से निर्यात दोगुना हुआ: भारत से निर्यात वित्त वर्ष 2020-21 के 4 बिलियन अमेरिकी डॉलर से बढ़कर वित्त वर्ष 2024-25 में 8.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया।
- वित्त वर्ष 2025-26 (फरवरी तक) में, ऑस्ट्रेलिया के साथ भारत का कुल व्यापार 19.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर रहा।
- तरजीही बाजार पहुंच: भारत ने अपने यहां 70.3% उत्पादों (टैरिफ लाइनों) पर रियायत दी, जबकि ऑस्ट्रेलिया ने 100% उत्पादों पर रियायत दी। इसका अर्थ है कि ऑस्ट्रेलिया ने भारत से आने वाले सभी आयात पर पूरी तरह से प्राथमिक बाज़ार पहुंच प्रदान की।
- 1 जनवरी 2026 से, सभी भारतीय निर्यात ऑस्ट्रेलिया में शून्य-शुल्क बाजार पहुँच के लिए पात्र हैं।
- कई क्षेत्रकों को लाभ: कपड़ा, फार्मास्यूटिकल्स, रसायन और कृषि उत्पादों के निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।
- ऑर्गेनिक क्षेत्रक में पारस्परिक मान्यता व्यवस्था (MRA) पर हस्ताक्षर: इससे जैविक (ऑर्गेनिक) वस्तुओं के व्यापार को मजबूती मिली।
भारत के लिए ऑस्ट्रेलिया का महत्व
- हिंद-प्रशांत की नीति में रणनीतिक साझेदारी: भारत और ऑस्ट्रेलिया हिंद-प्रशांत क्षेत्र में एक ऐसी व्यवस्था के पक्षधर हैं जो पारदर्शी, खुला, सुरक्षित, समावेशी और नियमों पर आधारित हो। यह सहयोग निम्नलिखित क्षेत्रों में देखा जा सकता है:
- ऑस्ट्रेलिया, संयुक्त राज्य अमेरिका और जापान के साथ भारत चतुष्पक्षीय सुरक्षा संवाद यानी QUAD का एक प्रमुख भागीदार है।
- ऑस्ट्रेलिया-भारत हिंद-प्रशांत महासागर पहल साझेदारी (AIIPOIP)।
- वर्ष 2019 में दोनों देशों के रक्षा और विदेश मंत्रियों के बीच 2+2 संवाद तंत्र की शुरुआत हुई।
- रक्षा सहयोग: दोनों देशों के बीच नियमित रूप से संयुक्त नौसैनिक अभ्यास (AUSINDEX) होता रहता है; मजबूत रक्षा सहयोग के लिए 2021 में पारस्परिक लॉजिस्टिक्स सहायता समझौते (MLSA) पर हस्ताक्षर हुए।
- ऊर्जा और संसाधन: भारत-ऑस्ट्रेलिया अति-महत्वपूर्ण खनिज (क्रिटिकल मिनरल्स) निवेश साझेदारी के तहत नई आपूर्ति श्रृंखलाओं का विकास किया जा रहा है; ग्रीन हाइड्रोजन सहित नवीकरणीय ऊर्जा में सहयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है, आदि।