मदुरै के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ने वर्ष 2020 में पुलिस हिरासत में दो व्यक्तियों की मौत के मामले में पुलिसकर्मियों को मौत की सजा दी है।
हिरासत में मृत्यु (Custodial Deaths) के बारे में
- हिरासत में मृत्यु का अर्थ है कि किसी व्यक्ति की मौत हिरासत में यातना और अमानवीय व्यवहार के कारण हो जाना।
- राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के अनुसार वर्ष 2024 में 2,739 लोगों की पुलिस हिरासत में मौत हो गई थी।
हिरासत में मृत्यु से जुड़े प्रमुख मुद्दे:
- सांविधानिक मूल्यों के प्रतिकूल: हिरासत में यातना अपनी शक्ति का घोर दुरुपयोग है। ऐसा इसलिए, क्योंकि हिरासत में रखे गए लोग कमजोर और असुरक्षित स्थिति में होते हैं और वहाँ शक्ति का संतुलन भी उनके खिलाफ होता है।
- जवाबदेही तय करने की चुनौती: स्वतंत्र जांच नहीं हो पाती है, क्योंकि हिरासत में हुई मौतों की जांच अक्सर उसी पुलिस विभाग द्वारा की जाती है जिनके संरक्षण में ऐसी घटना घटित होती है।
- मानवाधिकार और व्यक्ति की गरिमा का उल्लंघन: यातना मानवाधिकारों का गंभीर हनन है। उदाहरण के लिए; 1972 का बलात्कार मामला, जिसमें महाराष्ट्र में पुलिस हिरासत में एक आदिवासी महिला के साथ बलात्कार हुआ।
- संस्था के रूप में पुलिस की छवि का क्षरण: यातना के उपयोग को पुलिस बल के भीतर हिंसा की संस्कृति को बढ़ावा देने से जोड़ा गया है।
हिरासत में यातना से संबंधित सुरक्षा उपाय
- सांविधानिक प्रावधान
- अनुच्छेद 20: नागरिकों को मनमानी और अत्यधिक सजा के खिलाफ संरक्षण प्रदान करता है।
- अनुच्छेद 21: किसी भी व्यक्ति को विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अलावा उसके प्राण (जीवन) या दैहिक स्वतंत्रता से वंचित नहीं किया जाएगा।
- अनुच्छेद 22: कुछ मामलों में व्यक्ति को गिरफ्तारी और हिरासत के विरुद्ध संरक्षण प्रदान करता है।
- अन्य प्रावधान
- NHRC के दिशा-निर्देश (1993): हिरासत में मृत्यु या बलात्कार की सूचना 24 घंटे के भीतर देना अनिवार्य है।
- उच्चतम न्यायालय के प्रमुख निर्णय:
- डी.के. बसु बनाम पश्चिम बंगाल राज्य (1996) वाद: उच्चतम न्यायालय ने गिरफ्तारी और हिरासत से संबंधित विस्तृत दिशानिर्देश निर्धारित किए।
- परमवीर सिंह सैनी बनाम बलजीत सिंह (2020) वाद: उच्चतम न्यायालय ने सभी पुलिस स्टेशनों में CCTV लगाने का निर्देश दिया।
- वैश्विक स्तर पर:
- अत्याचार और अन्य क्रूर, अमानवीय या अपमानजनक व्यवहार या दंड के विरुद्ध अभिसमय (UNCAT): भारत इसका हस्ताक्षरकर्ता है लेकिन अभी तक इसकी अभिपुष्टि नहीं की है।