रेल मंत्रालय ने पश्चिमी समर्पित माल-ढुलाई गलियारा (WDFC) के निर्माण का कार्य पूरा किया | Current Affairs | Vision IAS

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पश्चिमी समर्पित माल-ढुलाई गलियारा (WDFC) 1,506 किमी लंबी परियोजना है। यह परियोजना उत्तर प्रदेश के दादरी को महाराष्ट्र के जवाहरलाल नेहरू पोर्ट टर्मिनल (JNPT) से जोड़ती है।

समर्पित माल-ढुलाई गलियारा (DFC) के बारे में

  • शुरुआत: इस परियोजना की परिकल्पना 2005 में की गई थी। इसका उद्देश्य केवल माल ढुलाई के लिए विशेष रेलवे लाइनों का निर्माण करना है।
  • दो DFCs: पूर्वी समर्पित माल-ढुलाई गलियारा (EDFC) और पश्चिमी समर्पित माल-ढुलाई गलियारा (WDFC) परियोजनाओं को 2008 में मंजूरी दी गई थी।
    • EDFC: लुधियाना (पंजाब) से सोननगर (बिहार) तक, जिसकी लंबाई 1337 किलोमीटर है।
      • उपर्युक्त दोनों गलियारों के साथ, रेल मंत्रालय ने तीन नए DFC के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट पर कार्य शुरू किया है। वर्तमान में ये परियोजनाएं विचाराधीन हैं। ये हैं:
        • ईस्ट-कोस्ट कॉरिडोर: खड़गपुर से विजयवाड़ा तक।
        • ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर: पालघर-भुसावल-नागपुर-खड़गपुर-दनकुनी और राजखरसावां-कालीपहाड़ी-अंडाल।
        • उत्तर-दक्षिण उप-कॉरिडोर: विजयवाड़ा-नागपुर-इटारसी।
  • DFCCIL: 2006 में स्थापित ‘डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कारपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (DFCCIL)’ रेल मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण के तहत एक विशेष प्रयोजन वाहन (SPV) है।
    • यह DFC के योजना-निर्माण, विकास, वित्तीय संसाधनों को जुटाने, निर्माण, रखरखाव और संचालन का कार्य करता है।

समर्पित माल-ढुलाई गलियारा का महत्व

  • भीड़भाड़ में कमी: यात्री और माल-ढुलाई यातायात सम्मिलित रूप से रेल परिचालन की दक्षता को प्रभावित करते हैं। DFC इस समस्या को दूर कर सकता है।
  • ट्रेन की गति और माल ढुलाई उत्पादकता में वृद्धि: इन गलियारों को 100 किमी/घंटा तक की गति से चलने वाली उच्च क्षमता वाली मालगाड़ियों के संचालन के लिए तैयार किया गया है।
  • लॉजिस्टिक्स लागत में कमी: भीड़भाड़, देरी और अनिश्चित पारगमन समय उद्योगों के लिए लागत बढ़ाते हैं। DFC इस लागत को कम कर सकता है।
  • स्वच्छ और सुरक्षित परिवहन: संपूर्ण DFC नेटवर्क पूरी तरह से विद्युतीकृत है। इसलिए वस्तुओं की आवाजाही को सड़क मार्ग से रेल मार्ग पर स्थानांतरित करने से उत्सर्जन कम होगा।
  • अवसंरचना विकास के राष्ट्रीय लक्ष्यों के अनुरूपसमर्पित माल-ढुलाई गलियारा वर्ष 2030 तक भविष्य के लिए तैयार रेल नेटवर्क बनाने की राष्ट्रीय रेल योजना का एक महत्वपूर्ण घटक है। 
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भारत की रेलवे अवसंरचना को वर्ष 2030 तक भविष्य के लिए तैयार बनाने का एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य है, जिसके तहत समर्पित माल-ढुलाई गलियारे (DFCs) एक महत्वपूर्ण घटक हैं।

विशेष प्रयोजन वाहन (SPV)

यह एक कानूनी इकाई है जिसे एक विशिष्ट, सीमित उद्देश्य के लिए बनाया जाता है, जैसे कि ऋण या संपत्ति का प्रबंधन करना, अक्सर बड़ी कंपनियों के भीतर या सार्वजनिक-निजी भागीदारी में।

डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कारपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (DFCCIL)

रेल मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण के तहत 2006 में स्थापित एक विशेष प्रयोजन वाहन (SPV) है, जो समर्पित माल-ढुलाई गलियारों (DFCs) की योजना-निर्माण, विकास, वित्तीय संसाधनों को जुटाने, निर्माण, रखरखाव और संचालन का कार्य करता है।

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