यह उपलब्धि पिछले वर्ष की तुलना में 46% की वृद्धि को दर्शाती है। यह उपलब्धि वैश्विक पवन ऊर्जा बाजार के रूप में भारत की स्थिति को मजबूत करती है।
- यह वर्ष 2030 तक गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से 500 गीगावाट की ऊर्जा क्षमता प्राप्त करने के राष्ट्रीय लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
भारत में पवन ऊर्जा की स्थिति
- विश्व में स्थिति: पवन ऊर्जा क्षमता के मामले में भारत का चौथा स्थान है (IRENA RE सांख्यिकी 2025 के अनुसार)।
- स्थापित क्षमता: 2014 में 21.04 GW थी, जो बढ़कर 2026 में 56 GW से अधिक हो गई।
- ऊर्जा मिश्रण में भूमिका: भारत में सौर ऊर्जा के बाद पवन ऊर्जा दूसरा सबसे बड़ा नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत है।
- अग्रणी राज्य: पवन ऊर्जा क्षमता वृद्धि में सर्वाधिक योगदान करने वाले राज्य हैं; गुजरात, कर्नाटक और महाराष्ट्र।
सरकारी पहलें:
- केंद्रीकृत डेटा संग्रह और समन्वय (CCDC)-पवन ऊर्जा पहल: इसका उद्देश्य सटीक डेटा संग्रह और अनुसंधान के माध्यम से पवन ऊर्जा संसाधन के मूल्यांकन में सुधार करना है।
- राष्ट्रीय पवन ऊर्जा-सौर हाइब्रिड नीति 2018: यह नीति बड़े ग्रिड से जुड़ी पवन ऊर्जा-सौर फोटोवोल्टिक हाइब्रिड प्रणाली को बढ़ावा देने के लिए एक ढांचा प्रदान करती है, ताकि ऊर्जा का सर्वोत्तम और कुशल उपयोग सुनिश्चित हो सके।
- अपतटीय (Offshore) पवन ऊर्जा परियोजनाओं के लिए वायबिलिटी गैप फंडिंग (VGF) योजना: यह योजना राष्ट्रीय अपतटीय पवन ऊर्जा नीति, 2015 के अनुरूप है।
- अन्य पहलें: हरित ऊर्जा ओपन एक्सेस नियम (2022); नवीकरणीय ऊर्जा खरीद बाध्यता (RPO); पवन टरबाइन घटकों पर रियायती सीमा शुल्क; 2028 तक अंतर-राज्य पारेषण प्रणाली (ISTS) शुल्क से छूट, आदि।
पवन ऊर्जा से जुड़ी चुनौतियां
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