केंद्रीय सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के तहत राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) ने सेवा क्षेत्रक के निगमित उद्यमों का वार्षिक सर्वेक्षण (ASISSE) का कार्य शुरू किया है।
ASISSE के बारे में:
- यह सभी राज्यों/ संघ राज्य क्षेत्रों में निगमित सेवा उद्यमों को शामिल करने वाला पहला वार्षिक सर्वेक्षण है (संदर्भ वर्ष: वित्तीय वर्ष 2024-25)।
- शामिल उद्यम: कंपनी अधिनियम, 1956 या कंपनी अधिनियम, 2013 अथवा सीमित देयता भागीदारी अधिनियम, 2008 के अंतर्गत पंजीकृत सेवा क्षेत्रक के निगमित उद्यम।
- शामिल क्षेत्रक: व्यापार, परिवहन, IT, स्वास्थ्य, शिक्षा और हॉस्पिटैलिटी।
- उद्देश्य: नीति निर्धारण और आर्थिक विश्लेषण के लिए विश्वसनीय डेटाबेस तैयार करना।
- यह सर्वेक्षण डेटा संग्रह के लिए वस्तु एवं सेवा कर नेटवर्क (GSTN) डेटाबेस का उपयोग करता है। लगभग 1.21 लाख उद्यमों का सर्वेक्षण किया गया।
- यह सर्वेक्षण गैर-कृषि अर्थव्यवस्था के समग्र क्षेत्रक के डेटा प्राप्त करने के लिए ASI (उद्योगों का वार्षिक सर्वेक्षण) और ASUSE (असंगठित क्षेत्र के उद्यमों का वार्षिक सर्वेक्षण) के पूरक के रूप में कार्य करेगा।
Article Sources
1 sourceभारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) द्वारा ऋण में निवेश और क्रेडिट डिफॉल्ट स्वैप की बिक्री की सीमाएं अधिसूचित की है।
- सरकारी प्रतिभूतियों (G-Secs), राज्य सरकार की प्रतिभूतियों (SGSs) और कॉरपोरेट बॉण्ड में FPI द्वारा निवेश की सीमाएं अपरिवर्तित बनी हुई हैं।
क्रेडिट डिफॉल्ट स्वैप के बारे में:
- परिभाषा: यह एक वित्तीय डेरिवेटिव लिखत है। यह किसी निवेशक को अपने क्रेडिट जोखिम को दूसरे निवेशक के साथ स्वैप (अदला-बदली) या ऑफसेट करने की अनुमति देता है।
- कार्यप्रणाली: यह बॉण्ड में निवेश पर बीमा की तरह कार्य करता है। इसमें खरीदार नियमित प्रीमियम का भुगतान करता है और चूक (डिफॉल्ट) या पुनर्गठन की स्थिति में विक्रेता भुगतान करता है।
- उपयोग: इसका उपयोग हेजिंग, सट्टेबाजी और आर्बिट्राज तथा क्रेडिट जोखिम प्रबंधन के लिए किया जाता है।
- जोखिम: काउंटरपार्टी से जुड़े जोखिम और जटिलता।
केंद्र ने तेल रिसाव के विषाक्त अवशेषों से होने वाले समुद्री प्रदूषण से निपटने के लिए टार-बॉल्स प्रबंधन नियम, 2026 का मसौदा अधिसूचित किया है।
मुख्य प्रावधान:
- सम्पूर्ण प्रक्रिया (लाइफ-साइकिल ) को शामिल करता है: इसमें उत्पादन, संग्रह, भंडारण, परिवहन, उपचार और निपटान शामिल हैं।
- ‘प्रदूषक द्वारा भुगतान’ का सिद्धांत: यह तेल उत्पादन से जुड़े ऑपरेटरों पर जिम्मेदारी तय करता है। इसमें पर्यावरण को हुए नुकसान की प्रतिपूर्ति का प्रावधान भी शामिल है।
- हितधारकों की जिम्मेदारियां: इसमें केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) और तटरक्षक बल जैसे निकायों की भूमिकाएं निर्धारित की गई हैं।
- आपदा घोषणा: गंभीर मामलों में निगरानी, रिपोर्टिंग और ‘राज्य आपदा’ घोषित करने का अधिदेश देता है।
टार-बॉल्स (Tar balls) के बारे में:
- ये तेल रिसाव और समुद्र में जहाजों की दुर्घटनाओं के बाद तेल के अपक्षय (weathering) के कारण बने चिपचिपे पदार्थ हैं।
- इनका निर्माण तब होता है जब तेल जल और अन्य संदूषकों के साथ मिलता है। यह प्रक्रिया भौतिक, रासायनिक और जैविक होती है।
- इन्हें खतरनाक अपशिष्ट के रूप में वर्गीकृत किया गया है। इनका सुरक्षित रख-रखाव और निपटान आवश्यक है।
RBI ने तीन प्रकार के सेवा केंद्रों के आधार पर बैंक मित्र (Banking Correspondent) के संशोधित वर्गीकरण का प्रस्ताव दिया है। ये तीन सेवा केंद्र हैं- बैंक शाखाएं, बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट-बैंकिंग आउटलेट (BC-BO) और बिजनेस कॉरस्पोंडेंट-बैंकिंग टचपॉइंट (BC-BT)।
- BC-BO: यह एक निश्चित बिंदु वाली सेवा इकाई है। इसे BC या उसके उप-एजेंट द्वारा संचालित किया जाता है।
- BC-BT: यह विशेष रूप से एक ही बैंक के लिए कार्य करने वाला सेवा केंद्र है। यह सीमित सेवाएं प्रदान करता है और इसके संचालन के घंटे निश्चित नहीं होते हैं।
बैंक मित्र या बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट के बारे में:
- यह वह संस्था (कानूनी इकाई) या व्यक्ति (बैंक के अपने कर्मचारी के अतिरिक्त) होता है, जिसे बैंक द्वारा अपनी ओर से बैंकिंग एवं अन्य वित्तीय सेवाएँ प्रदान करने हेतु नियुक्त किया जाता है।
- भूमिका: इन्हें दूरदराज के क्षेत्रों में खुदरा बैंकिंग संचालन के लिए नियुक्त किया जाता है। ये बैंकों की पहुंच बढ़ाने और वित्तीय समावेशन में सहायता करते हैं।
केंद्रीय खान मंत्रालय ने खनिज (परमाणु और हाइड्रोकार्बन ऊर्जा खनिजों के अलावा) रियायत (दूसरा संशोधन) नियम, 2026 अधिसूचित किए हैं।
- ये नियम गहरे स्तर के खनिजों के लिए 'समेकित लाइसेंस (CL)' और मौजूदा खनन पट्टे में संलग्न क्षेत्रों का समावेश तथा प्रमुख और गौण (लघु) खनिजों के खनन पट्टे में संबंधित खनिजों को शामिल करने का प्रावधान करते हैं।
प्रमुख (Major) और गौण/लघु (Minor) खनिज:
- वर्गीकरण: खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 के तहत।
- लघु खनिज (Minor Minerals): भवन निर्माण पत्थर, बजरी, साधारण मृदा, साधारण रेत (निर्धारित उद्देश्यों के लिए प्रयुक्त रेत को छोड़कर) तथा कोई अन्य खनिज, जिसे केंद्र सरकार अधिसूचित करे।
- प्रमुख खनिज (Major minerals): इसमें लघु खनिजों के अलावा अन्य सभी खनिज शामिल हैं। उदाहरण: कोयला, लोहा, जस्ता, चूना पत्थर आदि।