भारतीय अंतरिक्ष स्थितिजन्य जागरूकता रिपोर्ट, 2025 (ISSAR 2025) जारी की गई | Current Affairs | Vision IAS

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In Summary

  • इसरो की वार्षिक रिपोर्ट में 2025 में 315 सफल प्रक्षेपणों पर प्रकाश डाला गया है, जिसमें निजी चंद्र मिशनों में वृद्धि और निम्न विद्युत क्षेत्र (LEO) में अंतरिक्ष की महत्वपूर्ण भीड़भाड़ को दर्शाया गया है।
  • 2025 के अंत तक भारत की अंतरिक्ष संपत्तियों में 144 अंतरिक्ष यान शामिल होंगे, जिसमें जीएसएलवी-एफ15 श्रीहरिकोटा से 100वां प्रक्षेपण होगा।
  • इसरो 2030 तक मलबे रहित अंतरिक्ष मिशनों के लिए प्रतिबद्ध है, साथ ही NETRA जैसी स्वदेशी ट्रैकिंग प्रणालियों का विकास कर रहा है और वैश्विक मंचों में भाग ले रहा है।

In Summary

‘भारतीय अंतरिक्ष स्थितिजन्य जागरूकता (Space Situational Awareness) रिपोर्ट’ भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने जारी की है। यह अंतरिक्ष की वर्तमान स्थिति का वार्षिक मूल्यांकन है।

रिपोर्ट के मुख्य बिंदुओं पर एक नजर

  • रिकॉर्ड संख्या में प्रक्षेपण: वर्ष 2025 में 328 प्रक्षेपित मिशनों में 315 सफल रहे। इनमें  4198 ज्ञात परिचालन योग्य उपग्रह स्थापित किए गए।
  • चंद्रमा के अन्वेषण में बढ़ती अभिरुचि: 2025 में चार चंद्र मिशन प्रक्षेपित किए गए। ये सभी निजी संस्थाओं द्वारा प्रक्षेपित किए गए थे।
    • ब्लू घोस्ट मिशन 1 चंद्रमा पर सफल सॉफ्ट लैंडिंग करने वाला निजी क्षेत्र का पहला अंतरिक्ष यान बना।
  • अंतरिक्ष में उपग्रहों की अधिक संख्या और जोखिम: उपग्रहों के निकट आने की लगभग 1,60,000 चेतावनियां जारी की गई, जो विशेष रूप से पृथ्वी की निचली कक्षा (LEO) में उपग्रहों की अधिक संख्या को दर्शाती हैं।

भारत के लिए अंतरिक्ष परिदृश्य (2025 के अंत तक)

  • अंतरिक्ष यान: वर्ष 2025 के अंत तक भारत से कुल 144 अंतरिक्ष यान प्रक्षेपित किए गए जिनमें निजी ऑपरेटरों/शैक्षणिक संस्थानों के प्रक्षेपण भी शामिल हैं।
    • श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर से प्रक्षेपित GSLV-F15/NVS-02 वास्तव में भारतीय अंतरिक्ष यान का 100वां प्रक्षेपण था।
    • सरकार के स्वामित्व वाले परिचालित उपग्रहों की संख्या पृथ्वी की निचली कक्षा (LEO) में 22 और भू-समकालिक कक्षा पृथ्वी कक्षा (GEO) में 31 थी।
  • सक्रिय डीप स्पेस मिशन: चंद्रयान-2 ऑर्बिटर (CH2O) और आदित्य-L1
  • प्रमुख उपलब्धियां: SpaDeX मिशन; भारतीय अंतरिक्ष यात्री ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला द्वारा निजी Axiom 4 क्रू मिशन का नेतृत्व करते हुए अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन की यात्रा।

अंतरिक्ष में उपग्रहों के सुचारू संचालन बनाए रखने के लिए इसरो के प्रयास

  • मलबा मुक्त अंतरिक्ष मिशन (DFSM) के लिए प्रतिबद्धता: अंतरिक्ष क्षेत्र से जुड़े सभी हितधारकों ने 2024 में घोषणा की कि वे वर्ष 2030 तक मलबा मुक्त अंतरिक्ष (Debris free space) मिशन सुनिश्चित करेंगे।
  • स्वदेशी प्रयास: स्पेस ऑब्जेक्ट ट्रैकिंग और विश्लेषण नेटवर्क (NETRA), श्रीहरिकोटा में मल्टी-ऑब्जेक्ट्स ट्रैकिंग रडार (MOTR) की स्थापना; बेकर नन श्मिट टेलीस्कोप (BNST), जिसे वर्तमान में नैनीताल में नवीनीकृत किया जा रहा है।
  • वैश्विक मंचों में भागीदारी: इनमें इंटर-एजेंसी स्पेस डेब्रिस कोऑर्डिनेशन कमेटी (IADC), IAA स्पेस डेब्रिस कमेटी, आदि शामिल हैं।

 

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Soft Landing

A soft landing is a controlled descent of a spacecraft onto a celestial body, where the landing craft's speed is reduced sufficiently to avoid damage upon touchdown. Blue Ghost Mission 1 achieved a successful soft landing on the Moon.

Inter-Agency Space Debris Coordination Committee (IADC)

An international forum where space agencies coordinate their activities related to space debris, aiming to mitigate risks and promote sustainable space operations.

Space Object Tracking and Analysis Network (NETRA)

The Space Object Tracking and Analysis Network (NETRA) is an indigenous Indian effort by ISRO to track and monitor space objects, including debris, in orbit.

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