केंद्रीय मंत्रिमंडल ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना-III (PMGSY-III) को मार्च 2028 तक जारी रखने की मंजूरी दी | Current Affairs | Vision IAS

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  • ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा दिसंबर 2000 में शुरू की गई पीएमजीएसवाई परियोजना का उद्देश्य ग्रामीण बस्तियों को हर मौसम में सुगम सड़क संपर्क प्रदान करना है।
  • चरण I-IV (2000-2028) प्रारंभिक संपर्कों, उन्नयन, LWE क्षेत्रों और आगे की बस्तियों पर केंद्रित थे, जिनके लिए 8.25 लाख किलोमीटर से अधिक की भूमि स्वीकृत की गई थी।
  • इसके प्रभावों में विकेंद्रीकृत योजना और तकनीकी हस्तक्षेपों द्वारा समर्थित गैर-कृषि रोजगार में वृद्धि, किसानों के लिए बेहतर कीमतें, संस्थागत प्रसव और शिक्षा तक पहुंच शामिल हैं।

In Summary

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) की मुख्य विशेषताएं:

  • शुरुआत: 25 दिसंबर, 2000 को केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय के तहत एक प्रमुख केंद्र प्रायोजित योजना के रूप में।
  • उद्देश्य: असंबद्ध ग्रामीण बस्तियों को बारहमासी सड़कों से जोड़कर निर्धनता कम करना।  इसके लिए जनसंख्या मानक इस प्रकार हैं: 
    • मैदानी क्षेत्रों में 500 या उससे अधिक की आबादी वाली ग्रामीण बस्ती।
    • विशेष श्रेणी के क्षेत्रों (जैसे पूर्वोत्तर राज्य, हिमालयी राज्य, रेगिस्तानी क्षेत्र और चुनिंदा पिछड़े जिले) में 250 या उससे अधिक की आबादी
  • योजना के प्रमुख चरण:
    • PMGSY-चरण I (2000): पात्र असंबद्ध (सड़क से नहीं जुड़ी) बस्तियों को प्रारंभिक बारहमासी सड़क संपर्क प्रदान करने पर ध्यान केंद्रित किया गया।
    • PMGSY-चरण II (2013): इस चरण में ध्यान नई सड़कें बनाने से हटाकर मौजूदा ग्रामीण सड़कों के सुधार (अपग्रेडेशन) पर दिया गया। इसका लक्ष्य 50,000 किलोमीटर लंबी ग्रामीण सड़क नेटवर्क को बेहतर बनाना था, ताकि परिवहन की दक्षता बढ़े और आर्थिक केंद्रों को बेहतर तरीके से जोड़ा जा सके
    • वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में सड़क निर्माण (2016): वामपंथी उग्रवाद से गंभीर रूप से प्रभावित नौ राज्यों के 44 जिलों को लक्षित किया गया ताकि सामाजिक-आर्थिक विकास सुनिश्चित हो तथा सुरक्षा बलों के आवागमन और तैनाती को सुगम बनाया जा सके।
    • PMGSY-चरण III (2019): गांवों को सीधे ग्रामीण कृषि बाजारों, उच्च माध्यमिक विद्यालयों और अस्पतालों से जोड़ने के लिए 1,25,000 किलोमीटर के मुख्य मार्गों और प्रमुख ग्रामीण संपर्कों में सुधार का लक्ष्य रखा गया।
      • विस्तार: इस चरण को अब मार्च 2025 से बढ़ाकर मार्च 2028 तक कर दिया गया है।
    • PMGSY-चरण IV (2024-25 से 2028-29): पूर्व में असंबद्ध 25,000 बस्तियों को जोड़ने के लिए अतिरिक्त 62,500 किलोमीटर सड़कों के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है।

 

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) का प्रभाव

  • प्रगति: 2025 तक, 8,25,114 किलोमीटर से अधिक ग्रामीण सड़कों को मंजूरी दी गई, जिसकी पूर्णता दर लगभग 95% है।
  • सामाजिक-आर्थिक प्रभाव:
    • रोजगार सृजन: गैर-कृषि क्षेत्रकों में रोजगार के अवसरों में वृद्धि हुई है और कार्यबल में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है।
    • कृषि: किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिल रहा है, क्योंकि उनकी उपज सुदुर कृषि बाजारों तक आसानी से पहुंच रही है।
    • अन्य लाभ: बेहतर सड़क संपर्क के कारण कई सकारात्मक बदलाव हुए हैं, जैसे; अस्पतालों में होने वाले प्रसव बढ़े हैं, टीकाकरण की दर में सुधार हुआ है, ग्रामीण विद्यार्थियों के लिए शिक्षा के अवसर बढ़े हैं और बैंकों जैसी सुविधाओं तक पहुंच आसान हो गई है।
  • अन्य महत्वपूर्ण पहलू:
    • विकेंद्रीकृत योजना: जिला पंचायतों द्वारा 'जिला ग्रामीण सड़क योजना' (DRRP) का मसौदा तैयार किया जाता है।
    • प्रौद्योगिकियों का उपयोग और संधारणीयता: 
      • e-MARG: यह प्रणाली सड़क निर्माण के बाद 5 साल तक दोष-देयता अवधि (Defect Liability Period) की निगरानी करती है।
      • GPS ट्रैकिंग, 
      • हरित प्रौद्योगिकियों का उपयोग: जैसे सड़क निर्माण में प्लास्टिक अपशिष्ट और फ्लाई ऐश का उपयोग, जिससे पर्यावरण को कम नुकसान पहुंचता है। 
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हरित प्रौद्योगिकियों

पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव को कम करने वाली या पर्यावरण के अनुकूल प्रौद्योगिकियां। सड़क निर्माण के संदर्भ में, इसमें प्लास्टिक अपशिष्ट या फ्लाई ऐश जैसी सामग्री का उपयोग शामिल हो सकता है।

दोष-देयता अवधि (Defect Liability Period)

किसी निर्माण परियोजना के पूरा होने के बाद एक निश्चित अवधि, जिसके दौरान ठेकेदार किसी भी दोष या खराबी के लिए जिम्मेदार होता है और उसे बिना किसी अतिरिक्त लागत के ठीक करना होता है।

जिला ग्रामीण सड़क योजना (DRRP)

जिला पंचायत द्वारा तैयार की जाने वाली एक योजना जो जिले में ग्रामीण सड़कों के निर्माण और सुधार की आवश्यकताओं का आकलन करती है और प्राथमिकताएं तय करती है।

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