जहाजरानी महानिदेशालय (DGS) द्वारा तैयार ये डिजिटल गवर्नेंस प्लेटफार्म पोत परिवहन के क्षेत्रक में सेवा-प्रदायगी, पारदर्शिता और जवाबदेही को बेहतर बनाएंगे।
नई डिजिटल समुद्री पहलें
- यूनिफाइड शिप रीसाइक्लिंग क्रेडिट नोट मॉड्यूल: नई ‘जहाज पुनर्चक्रण क्रेडिट योजना’ के तहत एक पोर्टल शुरू किया गया है। इसमें हांगकांग कन्वेंशन (HKC) के अनुरूप भारतीय शिपयार्डों में जहाजों का पुनर्चक्रण (कबाड़) कराने वाले जहाज मालिकों को जहाज के कबाड़ मूल्य का 40% के बराबर क्रेडिट नोट दिया जाएगा। इस क्रेडिट का उपयोग भारत में नई जहाज निर्माण परियोजनाओं के लिए किया जा सकेगा।
- यह योजना सरकार के ₹70,000 करोड़ के समुद्री क्षेत्र विकास पैकेज का हिस्सा है, जिसकी घोषणा 2025 में की गई थी।
- महत्व: यह प्लेटफॉर्म भारत में जहाज निर्माण और चक्रीय अर्थव्यवस्था (सर्कुलर इकोनॉमी) को बढ़ावा देगा।
- जहाजों के सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल पद्धति से पुनर्चक्रण हेतु हांगकांग अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन (HKC): अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) के तहत यह एक वैश्विक संधि है। यह जून 2025 से प्रभावी है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जहाजों का पुनर्चक्रण मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए खतरा उत्पन्न न करे।
- इसके तहत 500 सकल टन (GT) या उससे अधिक क्षमता वाले जहाजों के लिए खतरनाक पदार्थों की सूची (IHM) बनाए रखना तथा अधिकृत एवं मानक-अनुरूप पुनर्चक्रण यार्डों का उपयोग करना अनिवार्य है।
- e-नाविक (e-Navik): यह 24x7 शिकायत निवारण पोर्टल है। इसके माध्यम से भारतीय नाविक व्हाट्सएप, हेल्पलाइन या ईमेल के जरिए कहीं से भी अपनी शिकायतें दर्ज कर सकते हैं।
- यह पहल समुद्री श्रम कन्वेंशन, 2006 के लिए भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
- जहाजों के पंजीकरण के लिए e-समुद्र (e-Samudra) मॉड्यूल: यह जहाज पंजीकरण की प्रक्रिया को सरल बनाकर भारतीय समुद्री क्षेत्र प्रशासन को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाता है।
- मेडिकल प्रैक्टिशनर मॉड्यूल: यह उन डॉक्टरों के पंजीकरण और निगरानी के लिए है जो नाविकों को स्वास्थ्य प्रमाण पत्र देते हैं। इसका लक्ष्य फर्जी प्रमाण पत्रों को रोकना है।
अन्य संबंधित समाचारलॉजिस्टिक्स पोर्ट परफॉरमेंस इंडेक्स (LPPI), 2024-25:
|