भारत ने पुनर्संरचना, तकनीकी उन्नयन और कानूनी सुधारों के माध्यम से बांध सुरक्षा ढांचे को मजबूत किया | Current Affairs | Vision IAS

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  • भारत में बांधों का जाल वैश्विक स्तर पर तीसरा स्थान रखता है, जिसमें 6,628 बांध हैं, जिनमें से अधिकांश राज्य के स्वामित्व वाले हैं, और महाराष्ट्र बांधों की संख्या में सबसे आगे है।
  • बांध की सुरक्षा से जुड़े प्रमुख मुद्दों में पुरानी हो चुकी अवसंरचना (50 वर्षों में 26%), गाद जमाव के कारण भंडारण क्षमता में 19% की कमी और भूकंपीय/हिमनदी झील विस्फोट की संवेदनशीलता शामिल हैं।
  • डैम रिहैबिलिटेशन एंड इम्प्रूवमेंट प्रोग्राम (डीआरआईपी) और डैम सेफ्टी एक्ट, 2021 जैसी पहलों का उद्देश्य निरीक्षण, पुनर्वास और चार स्तरीय संस्थागत संरचना के माध्यम से बांध सुरक्षा को बढ़ाना है।

In Summary

भारत विश्व के सबसे बड़े ‘बांध पुनर्संरचना और सुरक्षा आधुनिकीकरण’ कार्यक्रमों में से एक संचालित कर रहा है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य पुरानी जल अवसंरचना को मजबूत और सुरक्षित बनाना है।

भारत में बांधों की स्थिति

  • विश्व में तीसरा स्थान: भारत के पास विश्व का तीसरा सबसे बड़ा बांध नेटवर्क है। प्रथम दो स्थानों पर संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन हैं। भारत में बांधों की कुल संख्या 6,628 है। 
  • राज्य सरकारों के स्वामित्व में: भारत में लगभग 98.5% बांधों का स्वामित्व राज्य सरकारों के पास है।
  • सर्वाधिक बांध: भारत में बांधों की सर्वाधिक संख्या महाराष्ट्र में है। इसके बाद मध्य प्रदेश और गुजरात में हैं।

भारत में बांधों की सुरक्षा से संबंधित मुख्य चिंताएं

  • पुराना होना: इनमें से लगभग 26% (1,681) बांध 50 वर्ष से अधिक पुराने हैं।
  • तलछट जमा होना: जलाशयों ने तलछट जमाव के कारण अपनी सकल भंडारण क्षमता का औसतन 19% खो दिया है।
  • विवर्तनिकी (भूकंपीय) गतिविधियों से नुकसान का खतरा: उदाहरण के लिए, 2001 में भुज (गुजरात) में आए भूकंप के बाद चांग बांध की नींव की मिट्टी कमजोर हो गई थी।  
  • हिमनदीय झील प्रस्फोट जनित बाढ़ (GLOF) से खतरा बढ़ना: उदाहरण के लिए, 2023 में हिमनदीय झील के टूटने से आई अचानक बाढ़ (फ्लैश फ्लड) के दौरान चुंगथांग बांध (सिक्किम) बह गया था
  • अन्य चिंताएं: हाइड्रोलॉजिकल पैटर्न में बदलाव और जलवायु परिवर्तन।

भारत में बांध सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए शुरू की गई पहलें

  • बांध पुनर्संरचना और सुधार कार्यक्रम (DRIP): यह बहु-चरणीय कार्यक्रम है, जिसे 2012 में विश्व बैंक की सहायता से शुरू किया गया था। इसे 3 चरणों में लागू किया जा रहा है। इसमें बांधों में संरचनात्मक सुधार करने, बांध सुरक्षा का नियमित निरीक्षण करने तथा आपातकालीन कार्य योजना तैयार करने पर बल दिया गया है।
  • बांध सुरक्षा अधिनियम, 2021: यह सूचीबद्ध बांधों की निगरानी, निरीक्षण, संचालन और रखरखाव का प्रावधान करता है।
    • इस अधिनियम के तहत 4-स्तरीय संस्थागत ढांचा स्थापित किया गया: राष्ट्रीय बांध सुरक्षा समिति (NCDS)राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण (NDSA)राज्य बांध सुरक्षा समितियां तथा राज्य बांध सुरक्षा संगठन (SDSOs)।
  • अन्य पहलें: 
    • डैम हेल्थ एंड रिहैबिलिटेशन मॉनिटरिंग एप्लीकेशन (DHARMA) प्लेटफॉर्म, 
    • सभी निर्धारित बांधों का मानसून-पूर्व  और मानसून-पश्चात अनिवार्य निरीक्षण का प्रावधान, आदि।
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डैम हेल्थ एंड रिहैबिलिटेशन मॉनिटरिंग एप्लीकेशन (DHARMA)

बांधों के स्वास्थ्य और पुनर्वास की निगरानी के लिए विकसित एक डिजिटल प्लेटफॉर्म, जो बांध सुरक्षा प्रबंधन में सुधार के लिए डेटा-संचालित अंतर्दृष्टि प्रदान करता है।

राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण (NDSA)

यह बांध सुरक्षा अधिनियम, 2021 के तहत स्थापित एक सांविधिक निकाय है, जो केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के अंतर्गत आता है। इसका मुख्य कार्य देश भर के निर्दिष्ट बांधों की सुरक्षा और रखरखाव की निगरानी करना, राज्य बांध सुरक्षा संगठनों के बीच उत्पन्न समस्याओं का समाधान करना और बांधों पर राष्ट्रीय स्तर का डेटाबेस बनाए रखना है।

राष्ट्रीय बांध सुरक्षा समिति (NCDS)

बांध सुरक्षा अधिनियम, 2021 के तहत स्थापित एक शीर्ष निकाय, जो राष्ट्रीय स्तर पर बांध सुरक्षा नीतियों और कार्यक्रमों के समग्र पर्यवेक्षण और मार्गदर्शन के लिए जिम्मेदार है।

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