जीनोम इंडिया प्रोजेक्ट (GIP) के डेटा से 44 मिलियन विशिष्ट भारतीय आनुवंशिक वैरिएंट्स का पता चला है | Current Affairs | Vision IAS

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एक हालिया अध्ययन में जीनोम इंडिया प्रोजेक्ट (GIP) के डेटा की तुलना मौजूदा वैश्विक डेटाबेस से की गई।  

अध्ययन के मुख्य बिंदुओं पर एक नजर:

  • आनुवंशिक वैरिएंट्स: अध्ययन के दौरान 129 मिलियन से अधिक आनुवंशिक वैरिएंट्स की पहचान की गई।
  • अंतर्विवाह (Endogamy): समुदायों के भीतर विवाह की परंपरा के कारण भारत में आनुवंशिक रूप से विशिष्ट और अलग-थलग समूह बने हैं।
  • जनसंख्या गतिशीलता में अंतर:
    • गैर-जनजातीय आबादी: इनमें अधिक आनुवंशिक मिश्रण और जनसंख्या वृद्धि दर्ज की गई है।
    • जनजातीय आबादी: इनका प्रभावी जनसंख्या आकार कम होता है, इनमें आनुवंशिक बदलाव अधिक होता है और संस्थापक प्रभाव (Founder effect) मजबूत होता है। इसका अर्थ है कि लंबे समय तक अलग-थलग रहने के कारण विश्व में जो दुर्लभ जीन  होते हैं, वे इन समुदायों में अपेक्षाकृत ज्यादा सामान्य हो सकते हैं।

जीनोम इंडिया प्रोजेक्ट (GIP) के बारे में

  • प्रारंभ: इसे 2020 में केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) द्वारा प्रारंभ किया गया था।
    • यह 'ह्यूमन जीनोम प्रोजेक्ट' (HGP) का भारतीय रूप है। ह्यूमन जीनोम प्रोजेक्ट मानव जीनोम की पहचान करने का एक वैश्विक प्रयास था जो 1990 से 2003 तक चला था।
  • उद्देश्य: भारत की विविध जनसंख्या को दर्शाने वाला आनुवंशिक वैरिएंट्स का एक व्यापक डेटाबेस तैयार करना।
  • नमूना आकार और विविधता: इस अध्ययन में 10,000 स्वस्थ और आपस में असंबंधित व्यक्तियों के नमूने लिए गए।
    • ये लोग 83 अलग-अलग जनसंख्या समूहों का प्रतिनिधित्व करते हैं। साथ ही, ये भारत के चार प्रमुख भाषा-परिवारों को शामिल करते हैं: इंडो-यूरोपीय, द्रविड़, ऑस्ट्रो-एशियाटिक और तिब्बती-बर्मी। 
  • परियोजना का महत्व:
    • स्वास्थ्य-देखभाल सेवा में सहायक: रोग के लिए उत्तरदायी जीन की सटीक पहचान से बीमारियों का पूर्वानुमान करना तथा शीघ्र जांच और उपचार संभव होगा। साथ ही, भारतीय जनसंख्या के अनुसार विशेष जांच-उपचार तकनीक विकसित होंगी (जैसे-अंतर्विवाह की वजह से रोग होने की आशंका के बारे में समझ)।
    • पक्षपात को दूर करने में सहायक: वैश्विक अनुवांशिक डेटाबेस अभी अधिकतर यूरोपीय जनसंख्या पर आधारित हैं। जीनोम इंडिया परियोजना इस असंतुलन को कम करने में मदद करेगी।
    • अनुसंधान और विकास (R&D) को बढ़ावा मिलेगी: यह परियोजना भारत और वैश्विक जीनोमिक अनुसंधान नवाचार प्रणाली को बढ़ावा देती है।

मुख्य अवधारणाएं:

  • जीनोम (Genome): यह किसी व्यक्ति या प्रजाति में मौजूद पूरे आनुवंशिक पदार्थ का समूह होता है। यानी, इसमें पूरा DNA (अधिकांश जीवों में) या RNA शामिल होता है, जो उस जीव की सभी विशेषताओं और कार्यों की जानकारी को संग्रहीत करता है।
  • जीनोम अनुक्रमण (Genome Sequencing): यह वह प्रक्रिया है, जिसमें किसी जीव के पूरे जीनोम के क्रम/अनुक्रम को पूरी तरह से निर्धारित किया जाता है। यानी, इसमें DNA के अंदर मौजूद सभी जीन और उनके क्रम को पढ़ा और समझा जाता है।
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जीनोम अनुक्रमण (Genome Sequencing)

किसी जीव के संपूर्ण जीनोम के डीएनए (या आरएनए) अनुक्रम को निर्धारित करने की प्रक्रिया। इसमें जीन के क्रम को पढ़ा और समझा जाता है।

जीनोम (Genome)

किसी जीव में मौजूद संपूर्ण आनुवंशिक पदार्थ का समूह, जिसमें उसका पूरा DNA (या RNA) शामिल होता है। यह जीव की सभी विशेषताओं और कार्यों की जानकारी संग्रहीत करता है।

ह्यूमन जीनोम प्रोजेक्ट (HGP)

एक वैश्विक वैज्ञानिक अनुसंधान परियोजना जिसका उद्देश्य मानव जीनोम में सभी जीनों की पहचान करना और उन्हें मैप करना था। यह 1990 से 2003 तक चला।

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