गुजरात ने 'स्पोर्ट्स जीनोमिक्स कार्यक्रम' की शुरुआत की | Current Affairs | Vision IAS

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In Summary

  • गुजरात की योजना 2030 तक एक एथलीट जीनोम डेटाबेस बनाने की है, जिसमें जीनोटाइप, शारीरिक और प्रदर्शन संबंधी डेटा को एकीकृत किया जाएगा।
  • स्पोर्ट्स जीनोमिक्स प्रारंभिक प्रतिभा की पहचान में सहायता करता है, खेल प्रदर्शन में 66% तक योगदान देता है, और चोट की रोकथाम और व्यक्तिगत प्रशिक्षण प्रदान करता है।
  • नैतिक चिंताओं में निष्पक्षता, आनुवंशिक भेदभाव, डेटा गोपनीयता, एथलीटों का कल्याण और अवसंरचना विकास पर "डिजाइनर एथलीटों" की संभावना शामिल है।

In Summary

इस कार्यक्रम के तहत प्रतिभाशाली एथलीटों के डीएनए (DNA) का विश्लेषण किया जाएगा और उनकी पहचान की जाएगी। 

  • इस कार्यक्रम का उद्देश्य 2030 के राष्ट्रमंडल खेलों से पहले राज्य के खिलाड़ियों का ‘गुजरात एथलीट जीनोम डेटाबेस’ बनाना है, जिसमें उनके जीन (जीनोटाइप), शारीरिक क्षमता और प्रदर्शन से जुड़ा डेटा शामिल होगा।

स्पोर्ट्स जीनोमिक्स के लाभ

  • प्रतिभा की शुरुआत में ही पहचान: यह गति, सहनशक्ति, ताकत और कुल एथलेटिक क्षमता से जुड़े आनुवंशिक गुणों को शुरुआती चरण में पहचानने में मदद करता है।
    • वर्ष 2023 के एक अध्ययन के अनुसार, खेल प्रदर्शन में आनुवंशिक कारकों का योगदान लगभग 66% तक हो सकता है।
  • अन्य लाभ: घायल होने से बचाव, व्यक्तिकृत प्रशिक्षण, चोट या घायल होने के बाद बेहतर तरीके से उबरने, प्रदर्शन में सुधार करने में मदद मिलती है।

स्पोर्ट्स जीनोमिक्स से संबद्ध नैतिक मुद्दे

  • निष्पक्षता और समानता: आनुवंशिक लाभ के कारण खेल में बराबरी और निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा पर सवाल उठ सकते हैं।
  • आनुवंशिक आधार पर भेदभाव: खिलाड़ियों का चयन या बाहर रखना उनके जीन के आधार पर हो सकता है। इससे कुछ खिलाड़ियों का एक “अनुवांशिक कमजोर वर्ग” (Genetic underclass) बन सकता है।
  • निजता और डेटा की सुरक्षा: आनुवंशिक डेटा अत्यधिक संवेदनशील होता है और इसका दुरुपयोग किया जा सकता है।
  • एथलीट का कल्याण: व्यावसायिक लाभ के कारण कुछ खिलाड़ियों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
  • खेल के विकास पर प्रभाव: “डिज़ाइनर एथलीट” और कृत्रिम तरीके से खेल-प्रदर्शन बढ़ाने से अन्य क्षेत्रों में खेल अवसंरचना और सुविधाओं के विकास पर ध्यान कम हो सकता है।

निष्कर्ष

  • भारत में खेलों में आनुवंशिक प्रौद्योगिकियों के जिम्मेदार उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए एक ‘मजबूत विनियामक और नैतिक ढांचा’ बनाने की आवश्यकता है।
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नियामक और नैतिक ढांचा

यह नियमों, कानूनों और दिशानिर्देशों का एक समूह है जो किसी विशेष क्षेत्र में गतिविधियों को नियंत्रित और निर्देशित करता है। भारत में खेल में आनुवंशिक प्रौद्योगिकियों के जिम्मेदार उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए ऐसे ढांचे की आवश्यकता पर बल दिया गया है।

डिज़ाइनर एथलीट

यह शब्द उन एथलीटों को संदर्भित करता है जिनके प्रदर्शन को आनुवंशिक इंजीनियरिंग या अन्य कृत्रिम तरीकों से बेहतर बनाने का प्रयास किया गया है। यह एक नैतिक चिंता का विषय है।

अनुवांशिक कमजोर वर्ग (Genetic underclass)

यह एक ऐसी स्थिति को संदर्भित करता है जहाँ आनुवंशिक लाभ वाले व्यक्तियों को खेल या अन्य क्षेत्रों में अधिक अवसर मिलते हैं, जबकि जिनके पास ऐसे आनुवंशिक गुण नहीं होते, वे भेदभाव का सामना कर सकते हैं।

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