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अंतर्देशीय जलमार्ग (Inland Waterways) वास्तव में देश के भीतर स्थित ऐसे जलमार्ग होते हैं जो समुद्र का हिस्सा नहीं होते, लेकिन नौवहन यानी जल-परिवहन के लिए उपयोगी होते हैं। अंतर्देशीय जलमार्ग में नदियां, नहरें, झीलें, लैगून और ज्वारनदमुख (river estuaries) शामिल हैं।  

  • ये अपनी प्राकृतिक बनावट या मानव निर्मित विशेषताओं के कारण नौवहन के लिए उपयुक्त होते हैं। इनमें सामान्य परिस्थितियों में कम से कम 50 टन भार वाले जहाज चल सकते हैं। 

भारत में अंतर्देशीय जलमार्ग की स्थिति

  • वर्तमान स्थिति: राष्ट्रीय जलमार्ग अधिनियम, 2016 के तहत 111 अंतर्देशीय जलमार्गों को राष्ट्रीय जलमार्ग घोषित किया गया है। इनकी कुल लंबाई 20,187 किलोमीटर है। 
    • मार्च 2026 तक, 32 राष्ट्रीय जलमार्ग संचालन में हैं।
    • केंद्रीय बजट 2026-27 में अगले पांच वर्षों में 20 नए राष्ट्रीय जलमार्गों को संचालित करने की घोषणा की गई।
  • बढ़ती हिस्सेदारी: राष्ट्रीय जलमार्गों से माल ढुलाई (Cargo transportation) वित्त वर्ष 2024-25 में 145.84 मिलियन मीट्रिक टन तक पहुंच गई।
  • लक्ष्य: 'मैरीटाइम अमृत काल विजन' के अनुसार, भारत का लक्ष्य कुल माल ढुलाई में अंतर्देशीय जल परिवहन (IWT) की हिस्सेदारी को 2% से बढ़ाकर 5% करना है।  साथ ही, अंतर्देशीय जलमार्गों से होकर वर्ष 2030 तक 200 मिलियन मीट्रिक टन और 2047 तक 500 मिलियन मीट्रिक टन से अधिक माल ढुलाई का लक्ष्य रखा गया है। 

भारत में अंतर्देशीय जल परिवहन को बढ़ावा देने हेतु प्रमुख पहलें

  • विधायी पहलें: 'भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण अधिनियम, 1985' के तहत भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (IWAI) की स्थापना की गई है। राष्ट्रीय जलमार्ग अधिनियम, 2016 लागू किया गया है; आदि।
  • प्रमुख योजनाएं:
    • हरित नौका अंतर्देशीय पोत हरित संक्रमण (ग्रीन ट्रांजीशन) दिशानिर्देश: इन दिशा-निर्देशों का लक्ष्य 2030 तक अंतर्देशीय जलमार्गों से यात्री परिवहन में कार्बन तीव्रता (carbon intensity) को 30% तक कम करना है।
    • तटीय कार्गो संवर्धन योजना (Coastal Cargo Promotion Scheme): केंद्रीय बजट 2026-27 में घोषित इस योजना का उद्देश्य 2047 तक कुल परिवहन में अंतर्देशीय जलमार्गों और तटीय पोत-परिवहन की संयुक्त हिस्सेदारी को 6% से बढ़ाकर 12% करना है।
    • अन्य योजनाएं
      • राष्ट्रीय जलमार्ग-1 (वाराणसी-हल्दिया खंड) के लिए जलमार्ग विकास परियोजना; 
      • जलवाहक कार्गो संवर्धन योजना, 2024, आदि।
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जलमार्ग विकास परियोजना (NW-1)

यह राष्ट्रीय जलमार्ग-1 (वाराणसी-हल्दिया खंड) के विकास और नेविगेशन में सुधार के लिए एक प्रमुख परियोजना है, जिसका उद्देश्य इस महत्वपूर्ण जलमार्ग पर माल ढुलाई की क्षमता को बढ़ाना है।

तटीय कार्गो संवर्धन योजना

केंद्रीय बजट 2026-27 में घोषित यह योजना, कुल परिवहन में अंतर्देशीय जलमार्गों और तटीय पोत-परिवहन की संयुक्त हिस्सेदारी को बढ़ाने के लिए डिज़ाइन की गई है।

कार्बन तीव्रता (carbon intensity)

यह प्रति इकाई आउटपुट (जैसे प्रति यात्री या प्रति टन माल) उत्पन्न ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन की मात्रा को मापता है। 'हरित नौका अंतर्देशीय पोत हरित संक्रमण दिशानिर्देश' का उद्देश्य इसे कम करना है।

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