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केंद्रीय सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने सेवा उत्पादन सूचकांक के संकलन के लिए एक दृष्टिकोण पत्र जारी किया है।

  • औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) विनिर्माण से संबंधित गतिविधियों को दर्ज करता है, लेकिन सेवा क्षेत्रक में अल्पकालिक गतिविधियों को दर्ज करने के लिए कोई सूचकांक नहीं था। इससे समग्र आर्थिक प्रदर्शन के आकलन में डेटा की कमी की समस्या उत्पन्न हो रही थी।

प्रस्तावित सेवा उत्पादन सूचकांक की मुख्य विशेषताएं

  • प्रस्तावित आधार वर्ष: 2024-25
  • डेटा स्रोत: वस्तु एवं सेवा कर (GST) डेटा, क्षेत्रक आधारित मंत्रालयों से प्रशासनिक डेटा और सेवा क्षेत्रक के निगमित उद्यमों का वार्षिक सर्वेक्षण (Annual Survey of Incorporated Services Sector Enterprises)
  • कवरेज (दायरा): इस सूचकांक को विशेष रूप से औपचारिक क्षेत्रक की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जिसमें थोक और खुदरा व्यापार, परिवहन, बैंकिंग, बीमा, रियल एस्टेट, संचार आदि उप-क्षेत्रक शामिल हैं।

हाल ही के एक अध्ययन में भारत में टाइफाइड के अधिक मामलों को रेखांकित किया गया। इसके साथ ही, मल्टीड्रग-रेसिस्टेंट (MDR) और एक्सटेंसिवली ड्रग-रेसिस्टेंट (XDR) प्रकारों के बढ़ते मामले भी सामने आए हैं।

टाइफाइड के बारे में

  • रोगजनक: यह साल्मोनेला टाइफी नामक जीवाणु (बैक्टीरिया) के कारण होता है (जो केवल मनुष्यों में रहता है)।
  • टाइफाइड बुखार से पीड़ित व्यक्तियों के रक्तप्रवाह और आंतों में यह बैक्टीरिया मौजूद होता है।
  • संचरण (फेकल-ओरल रूट): यह मुख्य रूप से संक्रमित भोजन और जल के माध्यम से फैलता है।
  • लक्षण: लंबे समय तक तेज बुखार, थकान, सिरदर्द, जी मिचलाना, पेट दर्द, और कब्ज या दस्त।
  • टीकाकरण में टाइफाइड कंजुगेट वैक्सीन दी जाती है।

सिपरी (SIPRI) ने 'वैश्विक सैन्य व्यय के रुझान, 2025' रिपोर्ट जारी की है।

  • SIPRI (स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट) संघर्ष, हथियार नियंत्रण और निरस्त्रीकरण पर शोध के लिए समर्पित एक स्वतंत्र अंतर्राष्ट्रीय संस्थान है। इसकी स्थापना 1966 में स्टॉकहोम (स्वीडन) में हुई थी।

रिपोर्ट के मुख्य बिंदुओं पर एक नजर:

  • 2025 में सैन्य मद में सबसे अधिक व्यय करने वाले शीर्ष 5 देशों का कुल वैश्विक सैन्य व्यय में 58% हिस्सा रहा। ये देश हैं; संयुक्त राज्य अमेरिका, चीन, रूस, जर्मनी और भारत।
    • 92.1 बिलियन डॉलर के कुल सैन्य व्यय के साथ भारत विश्व में पांचवां सबसे बड़ा सैन्य व्यय करने वाला देश (कुल वैश्विक व्यय का 3.2%) है।
    • पिछले वर्ष की तुलना में भारत के सैन्य व्यय में 8.9% की वृद्धि दर्ज की गई।

लघु जलविद्युत विकास योजना का उद्देश्य लघु जलविद्युत की अनूठी क्षमताओं का उपयोग करना है।

लघु जलविद्युत विकास योजना के बारे में

  • योजनावधि: वित्त वर्ष 2026-27 से वित्त वर्ष 2030-31 तक।
  • उद्देश्य: लघु जलविद्युत परियोजनाओं (1-25 मेगावाट क्षमता) को वित्तीय सहायता प्रदान करना।
    • लघु जलविद्युत परियोजनाओं का प्रशासन केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा किया जाता है।
      • बड़ी जलविद्युत परियोजनाएं (25 मेगावाट से अधिक) केंद्रीय विद्युत मंत्रालय के अंतर्गत आती हैं।
  • भारत की लघु जलविद्युत क्षमता: कुल 21,133.61 मेगावाट, जिसमें से 24.5% (5,171 मेगावाट) का दोहन किया जा चुका है (2026 की शुरुआत तक)।
  • लक्ष्य: 1,500 मेगावाट की नई लघु जलविद्युत क्षमता का विकास करना।
  • वित्तीय सहायता:
    • पूर्वोत्तर राज्य और अंतर्राष्ट्रीय सीमावर्ती जिले: ₹3.6 करोड़ प्रति मेगावाट या परियोजना लागत का 30% (अधिकतम सीमा: ₹30 करोड़ प्रति परियोजना)।
    • अन्य स्थानों के लिए: ₹2.4 करोड़ प्रति मेगावाट या परियोजना लागत का 20% (अधिकतम सीमा: ₹20 करोड़ प्रति परियोजना)।

ग्लोबल नेटवर्क अगेंस्ट फूड क्राइसिस ने वैश्विक खाद्य संकट रिपोर्ट, 2025 जारी की। यह वैश्विक खाद्य संकट रिपोर्ट का 10वां संस्करण है। 

  • रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में 47 देशों के 266 मिलियन (26.6 करोड़) से अधिक लोगों ने उच्च स्तर की गहन खाद्य असुरक्षा का सामना किया।
  • इसका मुख्य कारक (कारण) संघर्ष है। इससे पहले चरम मौसमी घटनाएं सबसे बड़ा कारण थीं

ग्लोबल नेटवर्क अगेंस्ट फूड क्राइसिस के बारे में

  • स्थापना: इसकी स्थापना 2016 में विश्व मानवीय शिखर सम्मेलन में यूरोपीय संघ (EU) और WFP (विश्व खाद्य कार्यक्रम) के साथ खाद्य और कृषि संगठन (FAO) द्वारा की गई थी।
  • उद्देश्य: यह मानवीय और विकास क्षेत्रक में कार्य करने वालों की एक बहु-हितधारक पहल है। इसमें अलग-अलग संगठन खाद्य संकट के मूल कारणों से निपटने और संधारणीय समाधानों को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता के लिए एकजुट हुए हैं।

कोलंबिया के सांता मार्टा में 'ट्रांजिशनिंग अवे फ्रॉम फॉसिल फ्यूल्स" पर प्रथम सम्मेलन' आयोजित हो रहा है। कोलंबिया और नीदरलैंड इसकी मेजबानी कर रहे हैं।

"ट्रांजिशनिंग अवे फ्रॉम फॉसिल फ्यूल्स" सम्मेलन के बारे में

  • इसे 2025 में UNFCCC-COP30 के दौरान एक सतत राजनीतिक मंच के रूप में घोषित किया गया। इसका उद्देश्य जीवाश्म ईंधनों के उपयोग को व्यवस्थित तरीके से चरणबद्ध समाप्ति के लिए ठोस और क्रियान्वयन-आधारित कदम उठाना है।
  • यह कोई वार्ता निकाय नहीं है और न ही किसी औपचारिक वार्ता का हिस्सा है।
  • इसका लक्ष्य संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन फ्रेमवर्क कन्वेंशन (UNFCCC) का स्थान लेना नहीं है।

सम्मेलन के मुख्य बिंदु

  • वैश्विक एनर्जी ट्रांजीशन के लिए विज्ञान पैनल (Science Panel for the Global Energy Transition - SPGET) प्रारंभ किया गया।
  • यह सदी के अंत तक वैश्विक तापवृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियस (°C) तक सीमित रखने के अनुरूप देश और क्षेत्र-स्तरीय लक्ष्य तय करने में मदद करेगा।

महाराष्ट्र के भंडारा जिले (विदर्भ) में विरली खंडार में डॉ. प्रभाश साहू के नेतृत्व में जारी महापाषाणकालीन (megalithic) स्थल की खुदाई से विशिष्ट शवाधान (दफन) स्थापत्य और अंत्येष्टि प्रथाओं का पता चला है।

  • प्रारंभिक अवलोकनों से पता चलता है कि यह स्थल कम-से-कम 2,500 वर्ष पुराना है, जो इसे भारत के लौह युग के महापाषाण काल से जोड़ता है।

विरली खंडार उत्खनन के बारे में

  • मिश्रित शवाधान: इस स्थल में विशिष्ट रूप से मेनहिर (सीधे खड़े पत्थर) को घेरने वाले पत्थर के घेरे हैं, जिसमें दो अलग-अलग शवाधान प्रकारों का मिश्रण देखने को मिलता है।
  • उल्टे रखे मृदभांड (Inverted Pottery): लगभग 50 बर्तनों का एक दुर्लभ समूह, जिन्हें जानबूझकर उल्टा रखा गया है।
  • दफ़न सामग्रियां: खुदाई से तांबे के हार, लोहे के उपकरण, नक्काशीदार कार्नेलियन (अकीक) मोती और हड्डियों के टुकड़े (अवशेष) मिले हैं।

वैज्ञानिकों ने ‘जिब्राल्टर के बारबरी मैकाक (Macaca sylvanus)’ की खोज की है। यह यूरोपीय महाद्वीप पर पाए जाने वाले एकमात्र जंगली प्राइमेट हैं, जिनमें जियोफैगी (Geophagy) यानी मिट्टी खाने की आदत पाई जाती है। 

जियोफैगी के बारे में

  • परिभाषा: जियोफैगी वह प्रक्रिया है, जिसमें मनुष्य और जानवर स्वेच्छा से और नियमित रूप से मिट्टी से जुड़े पदार्थों—जैसे पत्थर, मिट्टी और चिकनी मिट्टी (clay)—का सेवन करते हैं।
  • कारण: पोषक तत्वों की आपूर्ति हेतु, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल (पेट और आंत संबंधी) विकारों से राहत हेतु, और सांस्कृतिक मान्यताएं।
  • प्रसार: यह प्रवृत्ति प्रायः बच्चों, गर्भवती महिलाओं आदि में देखी जाती है।

भारत, अमेरिका (US) और यूनाइटेड किंगडम (UK) में मुद्रास्फीति नियंत्रण के हालिया उपाय मुद्रास्फीति के प्रबंधन की आर्थिक लागतों को उजागर करते हैं। इन्हें सैक्रिफाइस रेश्यो (Sacrifice Ratio) का उपयोग करके मापा जाता है।

सैक्रिफाइस रेश्यो के बारे में

  • यह मुद्रास्फीति को कम करने की प्रत्यक्ष आर्थिक लागत को मापता है।
    • इसका अर्थ है कि मुद्रास्फीति दर में प्रत्येक 1% की कमी के लिए वास्तविक GDP का कितने प्रतिशत नुकसान होता है।
  • यह मापदंड दिखाता है कि मूल्य स्थिरता बनाए रखने और आर्थिक संवृद्धि को जारी रखने के बीच एक कठिन संतुलन  होता है।
  • उच्च अनुपात का अर्थ है कि मुद्रास्फीति से निपटने से महत्वपूर्ण अल्पकालिक चुनौतियां (नुकसान) उत्पन्न होती हैं, जिनमें बढ़ती बेरोजगारी और औद्योगिक उत्पादन में कमी शामिल हैं।
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आधार वर्ष (Base Year)

किसी सूचकांक या आर्थिक डेटा की गणना के लिए एक संदर्भ वर्ष को आधार वर्ष के रूप में चुना जाता है। इसके सापेक्ष, अन्य वर्षों के प्रदर्शन की तुलना की जाती है। IIP के लिए वर्तमान आधार वर्ष 2011-12 है, जिसका अर्थ है कि उस वर्ष के उत्पादन स्तर को 100% मानकर वर्तमान उत्पादन की तुलना की जाती है।

औपचारिक क्षेत्रक (Formal Sector)

अर्थव्यवस्था का वह हिस्सा जो सरकारी नियमों और कानूनों द्वारा शासित होता है, जिसमें पंजीकृत व्यवसाय, करों का भुगतान करने वाले उद्यम और कर्मचारी लाभ प्राप्त करने वाले कर्मचारी शामिल होते हैं। SPI को मुख्य रूप से इसी क्षेत्र की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

वस्तु एवं सेवा कर (Goods and Services Tax - GST) डेटा

भारत में अप्रत्यक्ष करों के लिए एक व्यापक, बहु-स्तरीय, गंतव्य-आधारित कर है जो वस्तुओं और सेवाओं के मूल्यवर्धन पर लगाया जाता है। SPI के लिए, GST डेटा सेवा क्षेत्रक की गतिविधियों के एक महत्वपूर्ण स्रोत के रूप में उपयोग किया जाएगा।

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