यह मुक्त व्यापार समझौता “विकसित भारत 2047” के विजन के अनुरूप है। इस विजन के उद्देश्यों में शामिल हैं; भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं से जोड़ना तथा MSMEs, किसानों, महिलाओं और युवाओं को सशक्त बनाना।
भारत-न्यूजीलैंड FTA के मुख्य बिंदुओं पर एक नजर
- 100% शुल्क-मुक्त पहुंच: न्यूजीलैंड ने भारत से सभी निर्यातों पर शुल्क समाप्त कर दिया है। इससे MSMEs, वस्त्र, चमड़ा, जूते, रत्न जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रकों को बढ़ावा मिलेगा।
- प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के लिए प्रतिबद्धता: न्यूजीलैंड ने अगले 15 वर्षों में भारत में 20 बिलियन अमेरिकी डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता जताई है।
- संवेदनशील क्षेत्रकों का संरक्षण: भारत ने लगभग 70% वस्तुओं (टैरिफ लाइनों) के लिए अपना बाजार खोलने की अनुमति दी है, जो भारत के साथ न्यूजीलैंड के 95% व्यापार को कवर करता है।
- लगभग 30% टैरिफ लाइनों (वस्तुओं) को इस सूची से बाहर रखा गया है ताकि किसानों और घरेलू उद्योगों की रक्षा हो सके। इन वस्तुओं में शामिल हैं; डेयरी, चीनी, प्याज, एल्यूमिनियम आदि।
- ‘रूल्स ऑफ ऑरिजिन’ का प्रावधान: द्विपक्षीय मुक्त व्यापार समझौते के लाभों के दुरुपयोग को प्रभावी ढंग से रोकने के लिए ‘उत्पाद विशिष्ट रूल्स ऑफ ऑरिजिन (PSRs)’ का एक सुदृढ़ फ्रेमवर्क स्थापित किया गया है।
- ‘रूल्स ऑफ ऑरिजिन’ वे नियम होते हैं जिनसे यह तय किया जाता है कि कोई उत्पाद मूल रूप से किस देश का है। इन नियमों का महत्व इसलिए है क्योंकि कई मामलों में आयात पर लगने वाला शुल्क और प्रतिबंध उसी देश के आधार पर तय होते हैं, जहाँ से वह वस्तु आई है।
- प्रतिभा और आवागमन: STEM के विद्यार्थियों के लिए पढ़ाई के अवसर और पढ़ाई के बाद काम करने का वीजा तथा कुशल पेशेवरों को वीजा दिया जाएगा। साथ ही, कुशल भारतीयों के लिए न्यूजीलैंड में हर साल 5,000 अस्थायी रोजगार वीजा का कोटा तय किया गया है।
- आयुष का वैश्वीकरण: पहली बार न्यूजीलैंड ने भारत की पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों जैसे आयुर्वेद और योग को मान्यता दी है, तथा उनके व्यापार को बढ़ावा देने का प्रावधान किया है।
- अन्य प्रावधान: कृषि उत्पादकता बढ़ाने के लिए साझेदारी की जाएगी। साथ ही, 118 सेवा क्षेत्रकों में बाजार तक पहुंच मिलेगी और 139 क्षेत्रकों में ‘सर्वाधिक तरजीही राष्ट्र’ (Most-Favoured Nation - MFN) का दर्जा दिया जाएगा।
![]() भारत-न्यूजीलैंड संबंध: एक नजर में
|
