हाल ही में आयोजित 17वें पीटर्सबर्ग जलवायु संवाद (Petersberg Climate Dialogue) में बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों के बीच बहुपक्षीय जलवायु कार्य-योजना के लिए प्रतिबद्धता दोहराई गई।
- पीटर्सबर्ग जलवायु संवाद जलवायु मुद्दों पर एक अनौपचारिक बहुपक्षीय वार्षिक बैठक है। इसकी शुरुआत जर्मनी ने 2010 में की थी। यह 2026 में प्रस्तावित UNFCCC-COP31 से पहले आयोजित होने वाली पहली प्रमुख जलवायु-मंत्रिस्तरीय बैठक थी।
जलवायु कार्य-योजना में बहुपक्षवाद की भूमिका
- जलवायु-एक वैश्विक सार्वजनिक संपदा (Climate as a Global Public Good): जलवायु परिवर्तन एक ऐसा सीमा-पार खतरा है, जिससे निपटना किसी एक देश की क्षमता से परे है। इसके प्रभाव और लाभ पूरी दुनिया में फैले होते हैं, इसलिए इससे निपटने के लिए बहुपक्षीय सहयोग सबसे मूलभूत और आवश्यक तरीका है।
- सामूहिक शासन : यह वैश्विक जिम्मेदारियों को साझा करने के लिए नियम-आधारित एक व्यवस्था स्थापित करता है, एकपक्षीय कार्रवाई को रोकता है और समन्वित जलवायु कार्रवाई सुनिश्चित करता है। उदाहरण के लिए: राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDCs)।
- वार्ता मंच (Negotiation Platforms): संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन पर फ्रेमवर्क कन्वेंशन (UNFCCC), संयुक्त राष्ट्र जैव-विविधता अभिसमय (UNCBD) और संयुक्त राष्ट्र मरुस्थलीकरण रोकथाम अभिसमय (UNCCD) जैसी व्यवस्थाएं जलवायु अनुकूलन और शमन रणनीतियों के विकास में मदद करती हैं।
- जलवायु न्याय का संरक्षण: यह वितरणात्मक समानता (distributive equity) की रक्षा करता है, जिसके तहत "साझा लेकिन विभेदित जिम्मेदारियों का सिद्धांत (Common But Differentiated Responsibilities - CBDR)" लागू किया जाता है। यह मानता है कि हर देश की क्षमता और ऐतिहासिक उत्सर्जन स्तर अलग-अलग हैं।
- इसका अर्थ है कि सभी देशों को जिम्मेदारी निभानी चाहिए, लेकिन जिन देशों ने अधिक प्रदूषण फैलाया है और जिनके पास अधिक संसाधन हैं, उन्हें ज्यादा जिम्मेदारी उठानी चाहिए।
- वित्तीय तंत्र जुटाना: उदाहरण के लिए 'वैश्विक पर्यावरण सुविधा' (GEF) और 'हरित जलवायु निधि' (Green Climate Fund: GCF) जैसे संस्थानों के माध्यम से।
मुख्य चुनौतियां
- निर्णय लेने में पंगुता: उदाहरण के तौर पर, UNFCCC में आम-सहमति आधारित निर्णय मॉडल अपनाने के कारण कई बार निर्णय लेने की प्रक्रिया धीमी या रुक जाती है।
- वित्तपोषण से संबंधित बाधाएं: विकसित देश प्रत्येक वर्ष 100 अरब डॉलर देने के वादे को पूरा नहीं कर पाए हैं।
- भू-राजनीतिक विभाजन: एकपक्षीय कार्रवाई (unilateralism) की प्रवृत्ति बढ़ गई है। जब देश अपने-अपने तरीके से निर्णय लेने लगते हैं और सहयोग कम हो जाता है, तो वैश्विक जलवायु नियम कमजोर पड़ जाते हैं। उदाहरण के तौर पर, संयुक्त राज्य अमेरिका का प्रमुख जलवायु समझौतों/संस्थाओं से बाहर निकलने की घोषणा।
- अन्य चुनौतियां:
- एजेंडा तय करने में असमानता: विकसित देशों को अधिक लाभ होता है;
- प्रौद्योगिकीय संरक्षणवाद: नई प्रौद्योगिकी गरीब या विकासशील देशों को आसानी से नहीं मिलती।
