नीति आयोग ने ‘डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) @2047’ रिपोर्ट जारी की | Current Affairs | Vision IAS

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In Summary

  • डीपीआई 2.0 (2025-2035) और डीपीआई 3.0 (2035-2047) अनुशंसित रोडमैप चरण हैं, जिनमें से डीपीआई 2.0 8 क्षेत्रीय परिवर्तनों पर केंद्रित है।
  • डीपीआई 2.0 के प्रमुख चालकों में अति-स्थानीयकृत जिला कार्यक्रम, तकनीकी उद्यमिता को बढ़ावा देना, एआई का लाभ उठाना और डेटा और मानव क्षमता को अनलॉक करना शामिल हैं।
  • डीपीआई ने जीडीपी को प्रभावित किया है (2022 में 0.9%, 2030 तक 4.2% का अनुमान), एमएसएमई जैसे क्षेत्रों को बढ़ावा दिया है और वित्तीय समावेशन को गति दी है।

In Summary

नीति आयोग की इस रिपोर्ट में DPI 2047 रोडमैप के तहत दो-चरणीय दृष्टिकोण की सिफारिश की गई है: DPI 2.0 (2025-2035) और DPI 3.0 (2035-2047)। इस रिपोर्ट में DPI 2.0 पर विस्तृत ध्यान केंद्रित किया गया है।  

DPI 2.0 के बारे में (रिपोर्ट के मुख्य अंश)

  • विस्तार क्षेत्र: इसमें 8 क्षेत्रकों में रूपांतरण का रोडमैप प्रस्तुत किया गया है (इन्फोग्राफिक देखिए)।
  • कार्यान्वयन के मुख्य माध्यम:
    • जिला कार्यक्रमों के माध्यम से समग्र मांग: डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को जिला स्तर के विकास लक्ष्यों से जोड़कर स्थानीय समाधान तैयार किए जाएंगे।
    • प्रौद्योगिकी आधारित उद्यमिता (Tech Entrepreneurship) का विस्तार: DPI  से जुड़े उत्पादों और सेवाओं को उपलब्ध कराने के लिए प्रौद्योगिकी आधारित उद्यमिता को बढ़ावा दिया जाएगा।
    • AI में प्रगति का लाभ उठाना: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को सभी के लिए सुलभ बनाया जाएगा।
    • विभिन्न क्षेत्रकों में रणनीतिक पहलों को लागू करना: अलग-अलग क्षेत्रकों में ऐसी रणनीतियाँ लागू की जाएंगी, जिससे डेटा का सही उपयोग हो, AI सब तक पहुंचे, लोगों की कौशल क्षमता बढ़े और डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा मिले।
  • DPI 2.0 के लिए मुख्य सिफारिशें:  
    • राज्यों के नेतृत्व में विकेंद्रीकृत कार्यान्वयन हो, 
    • प्रारंभिक चरण में कृषि तथा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों पर ध्यान  दिया जाए,
    • वैश्विक सहयोग के लिए निष्पक्ष संस्थागत ढांचा स्थापित किया जाए। 

डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) के बारे में

  • अर्थ: DPI एक ऐसा डिज़ाइन तरीका है, जिसके जरिए प्रौद्योगिकी और बाजार में नवाचार का उपयोग करके बड़े पैमाने पर तेज और गैर-रैखिक (non-linear) सामाजिक-आर्थिक विकास किया जाता है।
  • DPI के प्रमुख प्रभाव:
    • GDP: 2022 में भारत की GDP में DPI का योगदान 0.9% था, और 2030 तक इसके 4.2% होने का अनुमान है।
  • नए क्षेत्रकों में अवसर के द्वार को खोलना: GST के तहत पंजीकृत MSMEs की संख्या दिसंबर 2024 में बढ़कर 1.5 करोड़ हो गई। 2017-18 में यह संख्या 5 लाख थी।
  • वित्तीय समावेशन: भारत ने केवल 8 वर्षों में 80% लोगों के बैंक खाते खोल दिए, जबकि बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स (BIS) के अनुसार इसमें 47 साल लग सकते थे।
  • हॉकी स्टिक प्रभाव: ऐसी नई सेवाओं का तेजी से विस्तार हुआ, जिनकी पहले कल्पना भी नहीं की जा सकती थी। इससे विकास ‘हॉकी स्टिक’ के आकार की तरह अचानक तेजी से बढ़ने लगा, अर्थात नई-नई डिजिटल सेवाओं की वजह से विकास अचानक बहुत तेज हो गया।

 

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गैर-रैखिक (non-linear) विकास

विकास का वह स्वरूप जो रैखिक या क्रमिक न होकर, अप्रत्याशित रूप से तीव्र और बड़े पैमाने पर होता है। DPI, प्रौद्योगिकी के उपयोग से ऐसे गैर-रैखिक सामाजिक-आर्थिक विकास को संभव बनाता है।

वित्तीय समावेशन

Financial Inclusion refers to the availability and equality of opportunities to access financial services for all individuals and businesses, regardless of income or social status. It aims to ensure that everyone has access to essential financial products like banking, credit, insurance, and payments.

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME)

Micro, Small, and Medium Enterprises are businesses categorized based on their investment and turnover as per the MSMED Act, 2006. They are crucial for employment, exports, and GDP contribution in India.

Title is required. Maximum 500 characters.

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