उच्चतम न्यायालय ने जमानत याचिकाओं के शीघ्र निस्तारण का सुझाव दिया | Current Affairs | Vision IAS

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उच्चतम न्यायालय ने लंबित मामलों तथा सुनवाई हेतु मामलों को सूचीबद्ध करने में बार-बार होने वाली देरी पर चिंता व्यक्त की है। इसी क्रम में, शीर्ष न्यायालय ने उच्च न्यायालयों को न्यायिक प्रणाली की दक्षता बढ़ाने हेतु कई सुझाव दिए हैं।

उच्चतम न्यायालय के मुख्य सुझाव:  

  • मामलों को सूचीबद्ध करना: जमानत के मामलों को एक स्वचालित सॉफ्टवेयर-आधारित व्यवस्था के माध्यम से साप्ताहिक या पाक्षिक आधार पर सूचीबद्ध किया जाए।
    • नई जमानत याचिकाओं को एक दिन छोड़कर अथवा दाखिल होने के एक सप्ताह के भीतर सूचीबद्ध किया जाए। ऐसे मामलों में संघ/राज्य के प्रतिनिधियों की अनिवार्य उपस्थिति सुनिश्चित की जाए।
    • जिन मामलों की सुनवाई नहीं हो पाती, उन्हें स्वतः दोबारा सूचीबद्ध किया जाए तथा मामलों के निस्तारण के लिए एक निश्चित समय-सीमा तय की जाए।
  • स्टेटस रिपोर्ट: पहली सुनवाई से पहले स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करना अनिवार्य हो। साथ ही, महाधिवक्ता या नामित सरकारी एजेंसियों को जमानत याचिकाओं की अग्रिम प्रति प्रदान की जाए।
  • अनावश्यक स्थगन (Adjournments) को हतोत्साहित करना: विशेष रूप से सरकारी वकीलों द्वारा मांगे जाने वाले अनावश्यक स्थगनों को कम किया जाए। 

जमानत याचिकाओं के निस्तारण में तेजी लाने की आवश्यकता क्यों है?

  • मूल अधिकारों के संरक्षण के लिए: संविधान का अनुच्छेद 21 ‘प्राण और दैहिक स्वतंत्रता के अधिकार’ (Right to life and personal liberty) की गारंटी देता है। जमानत यह सुनिश्चित करने का माध्यम है कि दोषसिद्धि से पूर्व दैहिक स्वतंत्रता का मनमाने ढंग से हनन न हो
  • जेलों में क्षमता से अधिक कैदी बंद होना: जेल सांख्यिकी भारत, 2024 रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024 में जेलों में कैदियों की संख्या क्षमता से 112.7% अधिक थी। इनमें लगभग 3.7 लाख विचाराधीन कैदी थे।
  • भारतीय आपराधिक न्याय-प्रणाली के सिद्धांत को संरक्षित रखने हेतु: उच्चतम न्यायालय ने कई मामलों में यह सिद्धांत दोहराया कि “जमानत नियम है और जेल अपवाद” (Bail is the rule and jail is the exception)

जमानत से संबंधित विधिक प्रावधान

  • जमानती अपराध में जमानत [भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023]
    • धारा 478: जमानती अपराध का आरोपी व्यक्ति, बिना वारंट गिरफ्तारी की स्थिति में और कार्यवाही के किसी भी चरण पर, जमानत पर रिहा होने का अधिकार रखता है। 
    • धारा 479(1): उन व्यक्तियों को जमानत पर रिहा करने का प्रावधान है, जिन्होंने संबंधित अपराध के लिए निर्धारित अधिकतम कारावास अवधि के आधे समय तक हिरासत में व्यतीत कर लिया हो। 
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स्थगन (Adjournments)

The postponement of a court hearing to a later date. The article highlights the need to discourage unnecessary adjournments, especially those sought by government lawyers, to expedite case disposal.

निधि या नामित सरकारी एजेंसियों (Advocate General or designated government agencies)

These are official representatives or bodies of the government responsible for handling legal matters on behalf of the state or central government, including responding to bail applications.

जमानती अपराध (Bailable offense)

An offense for which a person can claim bail as a matter of right. In such cases, the police or the court cannot refuse bail, and it is typically granted upon furnishing a bail bond.

Title is required. Maximum 500 characters.

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