‘खाद्य में एक नई भू-राजनीति’ शीर्षक से रिपोर्ट जारी की गई | Current Affairs | Vision IAS

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In Summary

  • आईपीईएस-फूड की रिपोर्ट व्यापार युद्धों, सैन्य संघर्षों और बहुपक्षवाद संकट से प्रेरित खाद्य पदार्थों की नई भू-राजनीति पर प्रकाश डालती है।
  • सार्वजनिक खाद्य भंडार (भारत का पीएसएच) और आपूर्ति प्रबंधन तंत्र (कनाडा की डेयरी, नॉर्वे की सहकारी समितियां) से चिंताएं उत्पन्न होती हैं।
  • आगे बढ़ने के रास्ते में लचीली खाद्य प्रणालियाँ, नागरिक समाज की सक्रिय भागीदारी और नीतिगत सुधारों के माध्यम से खाद्य संप्रभुता शामिल हैं।

In Summary

यह रिपोर्ट ‘अंतर्राष्ट्रीय सतत खाद्य प्रणाली विशेषज्ञ पैनल-खाद्य (IPES-Food) ने जारी की है।  यह रिपोर्ट परीक्षण करती है कि ‘खाद्य में नई भू-राजनीति’ (New geopolitics of food) किस प्रकार खाद्य प्रणालियों को नया स्वरूप दे रही है।

‘खाद्य में नई भू-राजनीति’ को प्रेरित करने वाले प्रमुख कारक

  • व्यापार युद्ध और आर्थिक अराजकता: उदाहरण के लिए, संयुक्त राज्य अमेरिका की टैरिफ नीति में बदलाव उन देशों को प्रभावित कर रहा है जो अमेरिका को कृषि उत्पादों का निर्यात करते हैं।
  • सैन्य संघर्ष: खाद्य पदार्थों को युद्ध एवं दबाव के हथियार के रूप में उपयोग किया जा सकता है, जिससे विश्व में भुखमरी के मुख्य केंद्रों यानी “हंगर हॉटस्पॉट्स” में संकट और गहरा हो रहा है।
  • बहुपक्षवाद के समक्ष संकट: संयुक्त राष्ट्र (UN) सहित कई वैश्विक संगठन बजटीय कमी और वैधता के संकट (वैधता पर उठते सवाल), दोनों का सामना कर रहे हैं।

बाजार को नियंत्रित करने वाले साधन और उनसे संबद्ध चिंताएं

  • पब्लिक स्टॉक होल्डिंग (PSH): इसमें किसी सरकारी संस्था द्वारा खाद्यान्न की रणनीतिक खरीद, भंडारण एवं प्रबंधन तथा नीलामी या सार्वजनिक वितरण प्रणालियों के माध्यम से उसका वितरण शामिल है।
    • उदाहरण के लिए: भारत का पब्लिक स्टॉक होल्डिंग कार्यक्रम का प्रबंधन भारतीय खाद्य निगम (FCI) द्वारा किया जाता है। यह कार्यक्रम राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA), 2013 द्वारा समर्थित है। 
    • चिंताएं: 
      • राजकोषीय और अवसंरचना की लागत का भार वहन करना पड़ता है; 
      • प्रबंधन क्षमता को लेकर चिंताएं विद्यमान हैं, 
      • विभिन्न हितधारकों के बीच समन्वय की कमी है, और 
      • भ्रष्टाचार व्याप्त है।
  • आपूर्ति प्रबंधन तंत्र: इसमें ऐसे विपणन बोर्ड शामिल होते हैं जिन्हें किसी विशेष वस्तु की खरीद-बिक्री का विशेष अधिकार दिया जाता है, तथा उत्पादन कोटा के माध्यम से उत्पादकों द्वारा बेची जा सकने वाली खाद्य वस्तुओं की मात्रा सीमित की जाती है।
    • उदाहरण के लिए: कनाडा के डेयरी, पोल्ट्री (मुर्गी पालन) और अंडा उत्पादन क्षेत्रों में आपूर्ति प्रबंधन; नॉर्वे की आपूर्ति प्रबंधन प्रणाली में किसानों के स्वामित्व वाली सहकारी समितियां।
    • मुख्य चिंताएं: अक्षमताएं और बाजार को विकृत करने की क्षमता होना, आदि।

आगे की राह

  • अनुकूलित खाद्य प्रणालियां: आत्मनिर्भरता के माध्यम से व्यवस्था पर निर्भरता कम करना; लक्षित वित्तीय उपाय, आवश्यक वस्तुओं पर कर में कमी, निर्यात में कटौती जैसे उपाय करने की आवश्यकता है।
  • नागरिक समाज और सामाजिक आंदोलनों की भूमिका: दबाव बनाने, खुली बहस को बढ़ावा देने, सहमति बनाने और ऐसी खाद्य प्रणालियों के लिए समर्थन जुटाने की आवश्यकता है जो कमजोर वर्गों की जरूरतों को पूरा करें।
  • खाद्य क्षेत्रक में संप्रभुता प्राप्त करना: कॉर्पोरेट जगत के एकाधिकार को रोकने के लिए बेहतर नीतियां बनाने, वित्तीय बाजार का विनियमन करने, और व्यापार समझौतों में सुधार करने की आवश्यकता है।
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Title is required. Maximum 500 characters.

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