भारत के प्रधानमंत्री की UAE यात्रा के दौरान, दोनों देशों ने ‘रणनीतिक रक्षा साझेदारी (Strategic Defence Partnership) के लिए फ्रेमवर्क’ पर हस्ताक्षर किए।
- यह फ्रेमवर्क दोनों देशों के बीच रक्षा औद्योगिक सहयोग, नवाचार और अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी, प्रशिक्षण, अभ्यास, शिक्षा और सिद्धांत, विशेष अभियान और इंटरऑपरेबिलिटी (अंतर-संचालनीयता) आदि को बढ़ावा देगा।
फ्रेमवर्क की अन्य मुख्य विशेषताएं
- रणनीतिक पेट्रोलियम भंडारों (SPR) को बढ़ावा: भारत के रणनीतिक पेट्रोलियम भंडारों (विशाखापत्तनम/चंडीखोल) में कच्चे तेल के भंडारण के माध्यम से ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।
- वाडीनार (गुजरात) में शिप रिपेयर क्लस्टर: ‘रिपेयर और ऑफशोर फेब्रिकेशन क्लस्टर’ स्थापित करने के लिए कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL) और ड्राइडॉक्स वर्ल्ड (DDW) के बीच एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए।
- मैत्री (MAITRI): दोनों देशों ने मैत्री (मास्टर एप्लीकेशन फॉर इंटरनेशनल ट्रेड एंड रेगुलेटरी इंटरफेस) का उपयोग करके वर्चुअल ट्रेड कॉरिडोर के संचालन का स्वागत किया।

भारत-UAE संबंधों का महत्व
- व्यापार और निवेश: दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार वित्त वर्ष 2025-26 में 101.25 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया। इसे 2032 तक 200 बिलियन डॉलर पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
- UAE, भारत में 7वां सबसे बड़ा निवेशक है। भारत और यूएई के बीच आर्थिक संबंध व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) 2022, द्विपक्षीय निवेश संधि 2024 और रुपये-दिरहम (INR-AED) भुगतान व्यवस्था के माध्यम से और अधिक सुदृढ़ तथा आसान बने हैं।
- ऊर्जा: UAE, भारत में कच्चे तेल का चौथा सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता तथा LPG का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है। साथ ही, यह भारत के रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार कार्यक्रम में भाग लेने वाला एकमात्र विदेशी सहभागी है।
- रणनीतिक और सुरक्षा सहयोग: उदाहरण के लिए- दोनों देश I2U2 (भारत-इजराइल-यूएई-यूएसए) और UFI (यूएई-फ्रांस-भारत) त्रिपक्षीय समूह का सदस्य हैं।
- दोनों देशों के जन-समुदायों के बीच संपर्क: UAE में 35 लाख भारतीय प्रवासी रहते हैं, जो वहां का सबसे बड़ा प्रवासी समुदाय है। यह समुदाय भारत में विप्रेषण (Remittance) में महत्वपूर्ण योगदान देता है।