हाल ही में ईरानी सरकारी मीडिया द्वारा होर्मुज जलसंधि (Strait of Hormuz) में समुद्र के नीचे बिछी केबल्स के ऑपरेटरों पर शुल्क लगाने का प्रस्ताव वैश्विक अंडरसी केबल नेटवर्क के समक्ष बढ़ते जोखिमों को दर्शाता है।
अंडरसी केबल्स के बारे में
- अंडरसी यानी समुद्र के नीचे बिछी केबल्स फाइबर ऑप्टिक लाइनें होती हैं। ये वैश्विक डेटा संचार के लिए समुद्री नितल पर बिछाई जाती हैं। ये वास्तव में आधुनिक डिजिटल कनेक्टिविटी की रीढ़ के रूप में कार्य करती हैं।
- ये केबल्स "अदृश्य राजमार्ग" (invisible highways) की तरह हैं। ये विश्व के 95% से 99% अंतर्राष्ट्रीय डेटा ट्रैफ़िक प्रसारित करती हैं।
- संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) ने 2010 में सबमरीन केबल को "अति-महत्वपूर्ण संचार अवसंरचना" (क्रिटिकल कम्युनिकेशन इंफ्रास्ट्रक्चर) के रूप में वर्णित किया था।
- सैटेलाइट से बेहतर: सबसी केबल्स बहुत अधिक बैंडविड्थ संचारित करती हैं और सैटेलाइट्स की तुलना में अधिक प्रभावी, किफायती और विश्वसनीय होती हैं।
- डिजिटल चोकपॉइंट्स: लाल सागर, होमुर्ज जलसंधि जैसे संकीर्ण समुद्री गलियारों में कई अंडरसी केबल्स एक साथ आकर मिलती हैं। इसलिए ये अक्सर "डिजिटल चोकपॉइंट्स" कहलाते हैं।
अंडरसी केबल्स नेटवर्क के समक्ष खतरे
- राज्य प्रायोजित कार्रवाई: इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियों (मेटा, अमेज़न, माइक्रोसॉफ्ट) से लाइसेंसिंग शुल्क और वार्षिक "सुरक्षा" भुगतान वसूलने का प्रस्ताव रखा है।
- ग्रे-जोन वारफेयर: हाइब्रिड संघर्षों में अंडरसी केबल्स नेटवर्क जैसी संरचनाओं को सौदेबाजी के हथियार के रूप में उपयोग किया जा रहा है।
- जासूसी और साइबर खतरे: खुफिया जानकारी एकत्र करने के लिए राज्य-प्रायोजित वायरटैपिंग (फोन/डेटा टैप करना) तथा नेटवर्क प्रबंधन प्रणालियों पर साइबर हमले किए जाते हैं।
भारत पर प्रभाव
- वित्तीय क्षेत्र: उदाहरण के लिए, तीव्र डेटा कनेक्टिविटी पर निर्भर रहने वाली शेयर ट्रेडिंग (स्टॉक ट्रेडिंग) और बैंकिंग प्रणालियां कुछ ही मिनटों में ठप हो सकती हैं।
- आईटी और आउटसोर्सिंग क्षेत्रक: उदाहरण के लिए, भारत का ‘सूचना प्रौद्योगिकी और बिजनेस प्रोसेस मैनेजमेंट (IT-BPM)’ उद्योग अंतर्राष्ट्रीय ग्राहकों को सेवाएं प्रदान करने के लिए निर्बाध वैश्विक कनेक्टिविटी पर निर्भर करता है।
- रणनीतिक और राष्ट्रीय सुरक्षा के समक्ष खतरे: उदाहरण के लिए, सैन्य संचार और खुफिया जानकारी साझा करना खतरनाक सिद्ध हो सकता है।
