'द लैंसेट' पत्रिका के एक अध्ययन के अनुसार, 2023 में विश्व भर में मानसिक विकारों के लगभग 1.17 अरब मामले थे।
अध्ययन के मुख्य बिंदुओं पर एक नजर
- दिव्यांगता का बढ़ता बोझ: मानसिक विकार विश्व भर में दिव्यांगता का एक प्रमुख कारण हैं। विश्व भर में कुल 'दिव्यांग के रूप में जीए गए वर्षों' (Years Lived with Disability: YLDs) में से 17% से अधिक का कारण मानसिक विकार ही है।
- प्रमुख कारक: मानसिक स्वास्थ्य के बढ़ते मामलों में 'चिंता' और 'अवसाद' सबसे बड़े कारण बनकर उभरे हैं।
- महिलाओं पर अधिक प्रभाव: महिलाएं मानसिक विकारों से कहीं अधिक प्रभावित हैं, विशेष रूप से चिंता और अवसाद से।
- वहीं, तंत्रिका विकास (न्यूरोडेवलपमेंटल) और व्यवहार संबंधी विकार जैसे कि अटेंशन-डेफिसिट/हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर (ADHD), 'व्यवहार संबंधी' विकार और ऑटिज्म पुरुषों में अधिक सामान्य पाए गए।
- आयु के आधार पर प्रभाव: मानसिक विकारों के सर्वाधिक मामले 15 से 19 वर्ष के आयु वर्ग में देखे गए। इन मामलों में शीघ्र उपचार शुरू करने की आवश्यकता है।
- भारत की स्थिति: भारत में मानसिक विकारों की दर 1990 में प्रति एक लाख जनसंख्या पर 2,591.9 थी, जो 2023 में बढ़कर 5,792.8 प्रति लाख जनसंख्या हो गई।

मानसिक विकारों के बढ़ने के कारण
- आर्थिक असुरक्षा: गरीबी, बेरोजगारी, असमानता और आर्थिक तनाव लोगों की मानसिक परेशानी को बढ़ा रहे हैं।
- सामाजिक अलगाव: इसकी वजहें हैं; लोगों के बीच मेलजोल कम होना, अकेलापन और परिवार या समुदाय की पारंपरिक सहायता नहीं मिलना।
- हिंसा और दुर्व्यवहार: घरेलू हिंसा, बच्चों के साथ दुर्व्यवहार और महिलाओं के साथ व्यवहार मानसिक आघात और विकारों का बड़ा कारण हैं।
- डिजिटल व्यसन और जीवनशैली से संबद्ध तनाव: सोशल मीडिया का अधिक उपयोग, साइबर बुलिंग, 'कुछ छूट जाने का डर' (FOMO) और बेहतर प्रदर्शन करने का दबाव युवाओं में चिंता और अवसाद को बढ़ा रहे हैं।
- जलवायु-परिवर्तन और संघर्ष की वजह से तनाव: जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक आपदाएं, युद्ध और विस्थापन (जैसे गाजा संघर्ष और शरणार्थी संकट) लोगों में चिंता और पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (PTSD) को बढ़ा रहे हैं।