इंटरनेशनल बिग कैट अलायंस (IBCA) के गठन का विचार पहली बार जुलाई 2019 में 'अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस' के अवसर पर भारतीय प्रधानमंत्री ने दिया था।
- इसका उद्देश्य विश्व के नेताओं का एक ऐसा गठबंधन बनाना था जो बड़ी बिल्ली प्रजातियों (बिग कैट्स) के शिकार को रोकने, इन प्रजातियों के अंगों या इनके उत्पादों की मांग को समाप्त करने और वन्यजीवों के अवैध व्यापार को रोकने की दिशा में कार्य कर सकें।
इंटरनेशनल बिग कैट अलायंस (IBCA) के बारे में
- स्थापना: भारत द्वारा 2023 में शुरू किया गया।
- मुख्यालय: नई दिल्ली (भारत) में।
- उद्देश्य: विश्व भर में सात बड़ी बिल्ली प्रजातियों (बिग कैट्स) का संरक्षण सुनिश्चित करना। ये सात बड़ी बिल्ली प्रजातियां हैं; बाघ, शेर, तेंदुआ, हिम तेंदुआ, चीता, जगुआर और प्यूमा।
- गठन: IBCA विभिन्न देशों, संस्थाओं और संगठनों का एक गठबंधन है। इनमें उपर्युक्त सातों प्रजातियों के पर्यावास वाले 95 देशों के अलावा वे देश, संरक्षण साझेदार, वैज्ञानिक संस्थाएं, व्यवसाय समूह और कॉर्पोरेट्स शामिल हैं जो इन प्रजातियों के संरक्षण में अभिरुचि रखते हैं।
- वर्तमान में इसके 26 सदस्य देश और 5 पर्यवेक्षक राष्ट्र हैं।
- नोडल एजेंसी: इसे भारत सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तहत राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) द्वारा स्थापित किया गया है।
बिग कैट्स के संरक्षण की आवश्यकता क्यों है?
- पारितंत्र में संतुलन बनाए रखने के लिए: यदि जंगल के शीर्ष शिकारी विलुप्त हो जाते हैं, तो खाद्य श्रृंखला असंतुलित हो जाएगी। इससे संपूर्ण पारितंत्र अनियंत्रित हो सकता है।
- अन्य प्रजातियों के पर्यावास का संरक्षण: उदाहरण के तौर पर, 30% से अधिक एशियाई हाथी बाघों के पर्यावास वाले क्षेत्रों में रहते हैं। इसी तरह, हिम तेंदुए तिब्बती मृग (Tibetan Gazelle), अर्गाली, चीरू जैसे अन्य वन्य जीवों के साथ अपना पर्यावास साझा करते हैं।
- जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों को कम करने के लिए: बाघों के लिए संरक्षित वन क्षेत्र एशिया के अन्य वनों की तुलना में अधिक कार्बन भंडारित करते हैं।
- अर्थव्यवस्था में योगदान: उन स्थानीय समुदायों के लिए आय के वैकल्पिक स्रोत उपलब्ध कराए जा सकते हैं जो वन्यजीवों के साथ सह-अस्तित्व में रहते हैं, जैसे पर्यटक होमस्टे, डेयरी व्यवसाय, और फल एवं सब्जी की खेती।