प्रस्तावित स्मार्ट बॉर्डर प्रोजेक्ट में ड्रोन, रडार, आधुनिक कैमरे और अन्य अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियां शामिल होंगी। इस योजना का उद्देश्य बांग्लादेश और पाकिस्तान के साथ लगने वाली भारतीय सीमाओं को पूरी तरह सुरक्षित और अभेद्य बनाना है।
भारत में स्मार्ट बॉर्डर प्रोजेक्ट की ज़रूरत क्यों है?

- विशाल स्थलीय सीमा: भारत सात देशों (बांग्लादेश, चीन, पाकिस्तान, नेपाल, म्यांमार, भूटान और अफगानिस्तान) के साथ 15,106.7 किलोमीटर लंबी स्थलीय सीमा साझा करता है।
- अवैध गतिविधियां रोकने के लिए: घुसपैठ, संगठित अपराध, नशीले पदार्थों की तस्करी, पशु तस्करी, हथियारों की तस्करी और नकली मुद्रा के कारोबार को रोकने के लिए सीमाओं पर सख्त निगरानी रखना आवश्यक है।
- नए प्रकार के सुरक्षा खतरों से निपटने के लिए: जैसे साइबर हमले, हाइब्रिड वॉरफेयर और ड्रोन के माध्यम से होने वाली घुसपैठ से निपटने के लिए।
- दुर्गम भू-भाग और प्रतिकूल जलवायु दशाएं: भारत की सीमा पर मरुस्थल, ग्लेशियर, झीलें, नदियाँ, बर्फ से ढकी चोटियां, दलदली ज़मीन और घने जंगल हैं। इन स्थलों पर चौबीसों घंटे सुरक्षा बलों को तैनात रखना कठिन होता है।
- प्रौद्योगिकी के माध्यम से दक्षता बढ़ाना: सीमा सुरक्षा का प्रबंधन एकीकृत तरीके से, रियल टाइम में और अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों के अधिक उपयोग के माध्यम से करने की आवश्यकता है।
स्मार्ट सीमा-सुरक्षा के लिए उठाए गए कदम
- एंटी-ड्रोन सिस्टम: वायु जनित खतरों से निपटने के लिए जैमिंग और डिटेक्शन तकनीकों का एकीकरण किया गया। उदाहरण के लिए: IG T-शुल पल्स एंटी-ड्रोन सिस्टम।
- व्यापक एकीकृत सीमा प्रबंधन प्रणाली (CIBMS): सीमा की वास्तविक समय में निगरानी के लिए स्मार्ट फेंसिंग (स्मार्ट बाड़), सेंसर, रडार, सीसीटीवी कैमरे और कमांड-कंट्रोल सिस्टम उपयोग किए जा रहे हैं।
- BOLD-QIT प्रोजेक्ट: यह सीमा सुरक्षा बल (BSF) द्वारा भारत-बांग्लादेश सीमा पर शुरू की गई एक हाई-टेक 'स्मार्ट फेंसिंग' पहल है।