भारत की 'जल बजट' पहल से भूजल स्तर में सुधार हुआ, 11,000 गाँव सूखा-मुक्त हुए | Current Affairs | Vision IAS

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'अटल भूजल योजना' के तहत 2023-24 और 2024-25 में किए गए आकलन के अनुसार, 229 में से 180 ब्लॉकों में भूजल स्तर में स्पष्ट सुधार देखा गया है।

जल बजट (Water Budgeting) क्या है?

  • परिभाषा: यह एक व्यवस्थित आकलन है, जिसमें किसी निर्धारित भौगोलिक क्षेत्र (जैसे गाँव, जलग्रहण क्षेत्र, ब्लॉक आदि) में जल की उपलब्धता और मांग का आकलन किया जाता है, ताकि जल का संतुलित उपयोग सुनिश्चित हो सके। 
  • गणना: इसमें जल की प्राप्ति (वर्षा जल, सतही जल प्रवाह, भूजल पुनर्भरण) और जल की निकासी/खपत (वाष्पोत्सर्जन, बहाव, भूजल दोहन) का तुलनात्मक मूल्यांकन किया जाता है। 
  • मांग और आपूर्ति में संतुलन:
    • कृषि के लिए उपयोगी: जल बजट से स्थानीय स्तर पर उपलब्ध जल के अनुसार ही फसल योजना बनाई जाती है। इससे उत्पादकता बढ़ती है और जल की बर्बादी कम होती है।
    • पशुधन के लिए उपयोगी: पशुपालन और मात्स्यिकी जैसे सहायक क्षेत्रकों में जल की बढ़ती मांग को ध्यान में रखा जाता है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका के विविध स्रोतों को बढ़ावा मिलता है।

जल बजट में सहायता करने वाली सरकारी पहलें:

  • अटल भूजल योजना (2019): यह ग्राम पंचायत स्तर पर जल बजट बनाना अनिवार्य करती है तथा गोकट्टे, बावड़ी, जोहड़ और टांका जैसी पारंपरिक जल संरक्षण प्रणालियों का कायाकल्प करती है।
  • राष्ट्रीय जल मिशन (NWM): यह मिशन 'एकीकृत जल संसाधन प्रबंधन' (IWRM) के तहत जल बजट को बढ़ावा देता है। इसमें महिलाओं की भागीदारी पर विशेष ध्यान दिया गया है।
  • वरुणी (Varuni) ऐप: यह ऐप नीति आयोग के सहयोग से भारत-जर्मन परियोजना के तहत विकसित किया गया है। यह बारिश और भूमि उपयोग से संबंधित डेटा का उपयोग करता है और स्वचालित रूप से ब्लॉक-स्तरीय ‘जल बजट’ तैयार करता है।

राज्य-स्तरीय पहलें:

  • मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान (राजस्थान): वर्ष 2016 में प्रारंभ यह अभियान "चार जल-स्रोतों की अवधारणा" (फोर वाटर्स कॉन्सेप्ट) पर आधारित है। इससे भूजल स्तर में लगभग 4% की वृद्धि दर्ज की गई।
  • जलयुक्त शिवार अभियान (महाराष्ट्र): वर्ष 2014 में जियोटैगिंग और ऐप-आधारित निगरानी के साथ शुरू इस अभियान ने 11,000 से अधिक गांवों को सूखा-मुक्त बनाने में मदद की। 
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गोकट्टे, बावड़ी, जोहड़ और टांका

ये भारत में पारंपरिक जल संरक्षण प्रणालियाँ हैं। 'गोकट्टे' पानी को सोखने वाले गड्ढे होते हैं, 'बावड़ी' सीढ़ीदार कुएं होते हैं, 'जोहड़' मिट्टी के छोटे बांध होते हैं, और 'टांका' भूमिगत जल संग्रहण संरचनाएँ होती हैं, जिनका उपयोग पानी को जमा करने और संरक्षण के लिए किया जाता है।

जलयुक्त शिवार अभियान

महाराष्ट्र सरकार द्वारा 2014 में प्रारंभ किया गया एक जल संरक्षण अभियान है। यह जियोटैगिंग और ऐप-आधारित निगरानी का उपयोग करके गांवों को सूखा-मुक्त बनाने पर केंद्रित है।

मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान

राजस्थान सरकार द्वारा 2016 में शुरू किया गया एक अभियान है, जो 'चार जल-स्रोतों की अवधारणा' पर आधारित है। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण और भूजल स्तर में सुधार करना है।

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