इन सुधारों का उद्देश्य प्रक्रिया संबंधी जटिलताओं को कम करना, बाजार में निवेश को आसान बनाना तथा भारतीय इक्विटी व सरकारी प्रतिभूतियों के लिए निवेशकों का दायरा बढ़ाना है।
मुख्य उपाय
भारत के बाहर निवास करने वाले व्यक्तियों (PROIs) के लिए निवेश का उदारीकरण:
- अब PROIs को 'पोर्टफोलियो निवेश योजना' (PIS) के माध्यम से सूचीबद्ध भारतीय कंपनियों के इक्विटी शेयरों में निवेश करने की अनुमति दी गई है। इसकी घोषणा केंद्रीय बजट FY 2026-27 में की गई थी।
- पहले यह सुविधा केवल अनिवासी भारतीय (NRI)/ओवरसीज़ सिटीजन ऑफ़ इंडिया (OCI) को प्राप्त थी।
- एक कंपनी में किसी व्यक्तिगत PROI के निवेश की सीमा को 5% से बढ़ाकर 10% कर दिया गया है। समेकित निवेश सीमा बढ़कर 24% हो गई है।
सरकारी प्रतिभूतियों (G-Secs) में निवेश करने वाले FPIs के लिए कर छूट:
- सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश से मिलने वाले ब्याज से होने वाली आय पर कर भुगतान या इन प्रतिभूतियों की बिक्री पर पूंजीगत लाभ कर से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों और 'बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स' को छूट प्रदान की है।
सरकारी प्रतिभूतियों में FPI निवेश के लिए सुधार:
- पूर्ण सुलभ मार्ग (फुली एक्सेसिबल रूट: FAR): अब इसमें 15, 30 और 40 साल की सरकारी प्रतिभूतियों (G-secs) और संप्रभु ग्रीन बॉण्ड्स को भी शामिल किया गया है।
- FAR विदेशी निवेशकों को बिना किसी मात्रात्मक प्रतिबंध के "निर्दिष्ट प्रतिभूतियों" में निवेश करने की अनुमति देता है।
- सामान्य मार्ग (जनरल रूट) के तहत तीन प्रमुख प्रतिबंध हटा दिए गए हैं: अल्पकालिक निवेश सीमा, संकेंद्रण सीमा (concentration limit) और प्रतिभूति-वार सीमा।
मुख्य शब्दावलियां
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