भारत सरकार ने सरकारी प्रतिभूति (G-Sec) बाजार को सुदृढ़ करने और इक्विटी क्षेत्र में विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) आकर्षित करने के लिए सुधारों की घोषणा की | Current Affairs | Vision IAS

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In Summary

  • पोर्टफोलियो निवेश योजना (पीआईएस) के माध्यम से भारत के बाहर रहने वाले व्यक्तियों (पीआरओआई) द्वारा सूचीबद्ध भारतीय कंपनियों के इक्विटी उपकरणों में निवेश का उदारीकरण।
  • विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (एफपीआई) और सरकारी प्रतिभूतियों में अंतर्राष्ट्रीय निपटान के लिए बैंक (जी-सेक) पर ब्याज और पूंजीगत लाभ पर कर छूट।
  • जी-सेक के लिए पूर्णतः सुलभ मार्ग (एफएआर) का विस्तार लंबी अवधि और संप्रभु हरित बांडों को शामिल करने के लिए किया गया है, जिससे पहले के निवेश प्रतिबंध हटा दिए गए हैं।

In Summary

इन सुधारों का उद्देश्य प्रक्रिया संबंधी जटिलताओं को कम करना, बाजार में निवेश को आसान बनाना तथा भारतीय इक्विटी व सरकारी प्रतिभूतियों के लिए निवेशकों का दायरा बढ़ाना है। 

मुख्य उपाय

भारत के बाहर निवास करने वाले व्यक्तियों (PROIs) के लिए निवेश का उदारीकरण:

  • अब PROIs को 'पोर्टफोलियो निवेश योजना' (PIS) के माध्यम से सूचीबद्ध भारतीय कंपनियों के इक्विटी शेयरों में निवेश करने की अनुमति दी गई है। इसकी घोषणा केंद्रीय बजट FY 2026-27 में की गई थी। 
    • पहले यह सुविधा केवल अनिवासी भारतीय (NRI)/ओवरसीज़ सिटीजन ऑफ़ इंडिया (OCI) को प्राप्त थी।
  • एक कंपनी में किसी व्यक्तिगत PROI के निवेश की सीमा को 5% से बढ़ाकर 10% कर दिया गया है। समेकित निवेश सीमा बढ़कर 24% हो गई है।

सरकारी प्रतिभूतियों (G-Secs) में निवेश करने वाले FPIs के लिए कर छूट:

  • सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश से मिलने वाले ब्याज से होने वाली आय पर कर भुगतान या इन प्रतिभूतियों की बिक्री पर पूंजीगत लाभ कर से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों और 'बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स' को छूट प्रदान की है। 

सरकारी प्रतिभूतियों में FPI निवेश के लिए सुधार:

  • पूर्ण सुलभ मार्ग (फुली एक्सेसिबल रूट: FAR): अब इसमें 15, 30 और 40 साल की सरकारी प्रतिभूतियों (G-secs) और संप्रभु ग्रीन बॉण्ड्स को भी शामिल किया गया है। 
    • FAR विदेशी निवेशकों को बिना किसी मात्रात्मक प्रतिबंध के "निर्दिष्ट प्रतिभूतियों" में निवेश करने की अनुमति देता है।
  • सामान्य मार्ग (जनरल रूट) के तहत तीन प्रमुख प्रतिबंध हटा दिए गए हैं: अल्पकालिक निवेश सीमा, संकेंद्रण सीमा (concentration limit) और प्रतिभूति-वार सीमा।

मुख्य शब्दावलियां

  • विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI): इसमें ऐसे निवेशक शामिल होते हैं जो किसी दूसरे देश की वित्तीय परिसंपत्तियों (जैसे स्टॉक और बॉण्ड) में निवेश करते हैं। यह कंपनी की परिसंपत्ति पर प्रत्यक्ष स्वामित्व प्रदान नहीं करता। यह अपेक्षाकृत तरल (लिक्विड) होता है, अर्थात निवेशक बाजार की परिस्थितियों के अनुसार अपने निवेश को अपेक्षाकृत आसानी से खरीद या बेच सकते हैं। 
    • किसी भी भारतीय कंपनी में एक FPI (या निवेशक समूह) का निवेश कुल चुकता इक्विटी पूंजी के 10% से अधिक नहीं हो सकता।
  • सरकारी प्रतिभूति (G-Sec): यह केंद्र या राज्य सरकारों द्वारा जारी व्यापार योग्य लिखत (इंस्ट्रूमेंट) है। यह सरकार द्वारा लिए गए ऋण की आधिकारिक स्वीकृति है, अर्थात सरकार निवेशकों से उधार ली गई राशि को भविष्य में ब्याज सहित वापस करने का वादा करती है।
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G-Secs

Government Securities (G-Secs) are negotiable instruments issued by the Central or State governments to borrow money. They represent an official acknowledgement of debt and promise future repayment with interest.

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