जय प्रकाश नारायण पक्षी अभयारण्य (सुरहा ताल) भारत का 100वां रामसर स्थल बना | Current Affairs | Vision IAS

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In Summary

  • जय प्रकाश नारायण पक्षी अभयारण्य (सुरहा ताल) उत्तर प्रदेश के बलिया में स्थित एक प्राकृतिक धनुषाकार झील है, जो प्रवासी पक्षियों और मछलियों के लिए महत्वपूर्ण है।
  • 1971 में अपनाई गई रामसर संधि, तीन स्तंभों के माध्यम से आर्द्रभूमि संरक्षण और विवेकपूर्ण उपयोग के लिए एक ढांचा प्रदान करती है।

In Summary

जय प्रकाश नारायण पक्षी अभयारण्य (सुरहा ताल) के बारे में

  • यह एक प्राकृतिक और सदाबहार 'गोखुर झील' है। एक विसर्प (Meander) नदी बाढ़ वाले क्षेत्र में कटकर U आकार की ऐसी झील का निर्माण करती है।
  • अवस्थिति: बलिया जिला, उत्तर प्रदेश।
  • इतिहास: 1991 में 45 गाँवों की ज़मीनों को मिलाकर इसे 'सुरहा ताल' बनाया गया था। 2002 में महान कार्यकर्ता और राजनेता जयप्रकाश नारायण के सम्मान में इस झील को उनका नाम दिया गया।
  • क्षेत्रफल: लगभग 3,432 हेक्टेयर, जो मानसून मौसम के दौरान बढ़कर 25,000 हेक्टेयर तक हो जाता है।
  • महत्व:
    • उच्च पक्षी विविधता: यह मध्य एशियाई फ्लाईवे (प्रवासी पक्षियों का मार्ग) से आने वाले प्रवासी पक्षियों के लिए सर्दियों में विराम का एक महत्वपूर्ण स्थल है।
      • यहां पाई जाने वाली महत्वपूर्ण मछलियों में संकटापन्न (वल्नरेबल) 'वल्लागो अट्टू' और 'बगेरियस बगेरियस' शामिल हैं। 
      • मछलियों की अधिकता यहां 'फिशिंग कैट'  (Prionailurus viverrinus) को भी आकर्षित करती है।
    • यह झील सिंचाई और भूजल पुनर्भरण का एक प्रमुख स्रोत है। साथ ही इसका ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व भी है।

रामसर अभिसमय के बारे में

  • यह एक अंतरराष्ट्रीय संधि है। यह संधि आर्द्रभूमियों और उनके संसाधनों के संरक्षण और विवेकपूर्ण उपयोग के लिए एक रूपरेखा प्रदान करती है।
  • इसे 1971 में ईरान के 'रामसर' शहर में अपनाया गया था और यह संधि 1975 में लागू हुई। भारत ने 1982 में इस संधि पर हस्ताक्षर किए थे।
  • इसके निम्नलिखित तीन मुख्य स्तंभ हैं:
    • अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमियों का संरक्षण करना।
    • सभी आर्द्रभूमियों का विवेकपूर्ण उपयोग करना।
    • साझा आर्द्रभूमियों और प्रवासी प्रजातियों के संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना।
  • मानदंड: किसी भी आर्द्रभूमि को रामसर स्थल का दर्जा प्राप्त करने के लिए अभिसमय (कन्वेंशन) द्वारा तय किए गए नौ मापदंडों में से कम से कम एक को पूरा करना अनिवार्य है।
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रामसर स्थल

ये ऐसे आर्द्रभूमि क्षेत्र हैं जिन्हें 'अंतर्राष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमि' के रूप में नामित किया गया है, विशेष रूप से जलपक्षी आवास के रूप में। रामसर कन्वेंशन का उद्देश्य आर्द्रभूमियों का संरक्षण और उनका बुद्धिमानी से उपयोग सुनिश्चित करना है।

विवेकपूर्ण उपयोग (Wise Use)

यह आर्द्रभूमि (wetland) प्रबंधन का एक सिद्धांत है जिसका अर्थ है कि आर्द्रभूमियों के लाभों को वर्तमान और भविष्य की पीढ़ियों के लिए बनाए रखते हुए उनके पारिस्थितिक कार्यों और मूल्यों को बनाए रखना। इसमें संधारणीय (sustainable) उपयोग शामिल है।

रामसर अभिसमय

यह आर्द्रभूमियों और उनके संसाधनों के संरक्षण और विवेकपूर्ण उपयोग के लिए एक अंतरराष्ट्रीय संधि है। इसे 1971 में ईरान के रामसर शहर में अपनाया गया था और यह 1975 में लागू हुई।

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