अभिलाषा जैव-ईंधन (ABF) | Current Affairs | Vision IAS

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विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के तहत प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड ने अभिलाषा जैव-ईंधन (Abhilasha Biofuels: ABF) के उत्पादन के लिए एक वाणिज्यिक स्तर की सुविधा स्थापित करने की परियोजना को सहायता दी है।

अभिलाषा जैव-ईंधन के बारे में:

  • यह द्वितीय पीढ़ी (2G) का जैव ईंधन है, जो डीजल के समान ईंधन तथा नेफ्था के नवीकरणीय विकल्प के रूप में उपयोग किया जा सकता है।
    • 2G जैव ईंधन वे जैव ईंधन हैं जो गैर-खाद्य बायोमास से उत्पन्न होते हैं, जैसे कि कृषि अवशेष, वानिकी अपशिष्ट, फसल की पराली, गन्ने की खोई, चावल के पुआल और अन्य लिग्नोसेल्युलोसिक पदार्थ।
  • साथ ही, यह 'ड्रॉप-इन' ईंधन है जो वर्तमान इंजनों, ईंधन प्रणालियों या ईंधन वितरण अवसंरचना में किसी भी बदलाव की आवश्यकता के बिना सीधे पारंपरिक डीजल को प्रतिस्थापित कर सकता है।

केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री ने E85 ईंधन का अनावरण किया।

E85 ईंधन के बारे में:

  • E85 ईंधन मिश्रण है जिसमें 80-85% इथेनॉल और 15-20% पेट्रोल होता है।
  • इसे विशेष रूप से फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों (FFVs) के लिए विकसित किया गया है।
    • फ्लेक्स-फ्यूल वाहन (FFVs) ऐसे वाहन होते हैं जिनके इंजन इथेनॉल और पेट्रोल के विभिन्न मिश्रणों पर चल सकते हैं। ये E20 (20% इथेनॉल + 80% पेट्रोल) से लेकर E100 (100% इथेनॉल) तक के ईंधन मिश्रण का उपयोग कर सकते हैं।

महत्व:

  • यह ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करता है।
  • कच्चे तेल के आयात को कम करके ऊर्जा सुरक्षा बढ़ती है।
  • कृषि कच्चे माल (फीडस्टॉक) से इथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा देता है, जिससे किसानों की आय में वृद्धि होती है।

हाल ही में, मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने अपनी 58वीं बैठक संपन्न की।

मौद्रिक नीति समिति के बारे में:

  • गठन: RBI अधिनियम, 1934 (2016 में संशोधित) की धारा 45ZB के तहत गठित।
  • उद्देश्य: मुद्रास्फीति लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए नीतिगत रेपो दर का निर्धारण करना।
  • 6 सदस्य: RBI से तीन सदस्य और केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त तीन सदस्य।
  • अध्यक्ष: RBI के गवर्नर (पदेन अध्यक्ष)।
  • बैठकें: वर्ष में कम-से-कम 4 बैठकें।
  • मतदान: प्रत्येक सदस्य का एक वोट होता है, गवर्नर के पास निर्णायक मत देने का अधिकार होता है (बराबर वोटों की स्थिति में)।

पंचायत उन्नति सूचकांक (Panchayat Advancement Index: PAI) को डेटा एनालिटिक्स के माध्यम से डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन श्रेणी के तहत राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार 2026 में स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया।

पंचायत उन्नति सूचकांक (PAI) के बारे में:

  • यह केंद्रीय पंचायती राज मंत्रालय की शासन संबंधी प्रमुख पहल है।
  • यह ग्राम पंचायतों के प्रदर्शन का आकलन करने हेतु भारत का पहला व्यापक डेटा-आधारित फ्रेमवर्क है।
  • यह सूचकांक पंचायती राज संस्थाओं के लिए डेटा के आधार पर योजना बनाने, उनके प्रदर्शन की निगरानी करने और प्रोत्साहन देने के लिए प्रभावी तंत्र के रूप में कार्य करता है।
  • यह सतत विकास लक्ष्यों के स्थानीयकरण (LSDGs) से संबद्ध 9 विषयों को कवर करता है।
  • समग्र स्कोर के आधार पर पंचायतों को पांच प्रदर्शन श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है:
    • अचीवर: 90 और इससे अधिक स्कोर
    • फ्रंट रनर: 75 से अधिक 90 से कम 
    • परफॉर्मर: 60 से अधिक 75 से कम   
    • एस्पिरेंट: 40 से अधिक 60 से कम  
    • बिगिनर: 40 से कम स्कोर

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने घोषणा की है कि 30 सितंबर, 2026 तक नए विदेशी मुद्रा अनिवासी खाते (बैंक) [FCNR(B)] में जमा राशियों पर (3–5 वर्ष की अवधि वाले) पर पूर्ण हेजिंग लागत अधिकृत डीलर (AD) बैंकों द्वारा वहन की जाएगी।

  • इससे भारत की बैंकिंग प्रणाली में अधिक विदेशी मुद्रा आकर्षित करने में मदद मिलेगी।

विदेशी मुद्रा अनिवासी खाते (बैंक) (FCNR(B) जमाएं:

  • ये सावधि जमा खातें हैं जिनमें अनिवासी भारतीय (NRIs) भारतीय बैंकों में विदेशी मुद्राओं में अपना धन जमा करते  हैं।
  • यह मानक अनिवासी बाह्य (NRE) खातों या अनिवासी साधारण (NRO) खातों से अलग है, जिनमें भारतीय रुपये में जमाएं रखी जाती हैं। FCNR(B) खाते अमेरिकी डॉलर, ब्रिटिश पाउंड आदि जैसी मुद्राओं में राशियां रखी जा सकती हैं।
  • इसमें ब्याज का भुगतान भी उसी विदेशी मुद्रा में किया जाता है।

NRIs के लिए लाभ: यह जमाकर्ता को मुद्रा मूल्यह्रास के जोखिमों से बचाता है।

गूगल की मूल कंपनी अल्फाबेट इंक. ने फ्लोरिडा और कैलिफोर्निया के कुछ क्षेत्रों में 3.2 करोड़ वोल्बाचिया बैक्टीरिया से संक्रमित नर मच्छरों को छोड़ने का प्रस्ताव दिया है। इसका उद्देश्य वेस्ट नाइल वायरस फैलाने वाले जंगली क्यूलेक्स मच्छरों की संख्या को कम करना है।

  • इसके लिए, केवल नर मच्छरों को ही छोड़ा जाता है क्योंकि नर मच्छर इंसानों को नहीं काटते हैं।

वोल्बाचिया के बारे में:

  • वोल्बाचिया प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला एक बैक्टीरिया है जो कीटों की कई प्रजातियों में पाया जाता है।
  • यह 'एडीज एजिप्टी' मच्छरों में प्राकृतिक रूप से नहीं पाया जाता है। ये मच्छर डेंगू, जीका, चिकनगुनिया और पीत ज्वर के मुख्य रोग वाहक हैं।

वोल्बाचिया की कार्यप्रणाली:

  • वायरस को अवरुद्ध करना: वोल्बाचिया मच्छरों के भीतर डेंगू, जीका और चिकनगुनिया जैसे वायरस की वृद्धि को अवरुद्ध करता है, जिससे रोग संचरण कम हो जाता है।
  • संख्या बढ़ने से रोकना: जब वोल्बाचिया-संक्रमित नर असंक्रमित मादाओं के साथ प्रजनन करते हैं, तो अपरिपक्व अंडे उत्पन्न होते हैं, जिससे मच्छरों की संख्या नहीं बढ़ती है।

भारत के झींगा निर्यात को अमेरिका, यूरोपीय संघ (EU) और जापान के बाजारों में अस्वीकृति का सामना करना पड़ा, क्योंकि उनमें क्लोरैमफेनिकॉल  और नाइट्रोफुरन के अवशेष पाए गए।

  • ये दोनों ही दवाएं सभी खाद्य-उत्पादक पशुपालन प्रणालियों में प्रतिबंधित हैं। 

क्लोरैम्फेनिकॉल के बारे में:

  • यह जीवाणु संक्रमण के उपचार में प्रयुक्त होने वाला एक एंटीबायोटिक है।
  • खतरे: इसकी आंशिक मात्रा भी मनुष्यों में एप्लास्टिक एनीमिया रोग का कारण बन सकता है।

नाइट्रोफुरन के बारे में:

  • यह जीवाणुरोधी और सूजन-रोधी उद्देश्यों के लिए उपयोग किया जाने वाला एंटीबायोटिक है।
  • खतरे: इन दवाओं पर प्रतिबंध इसलिए लगाया गया है क्योंकि इनके चयापचय पशुओं के ऊतकों में लंबे समय तक बने रह सकते हैं और इनमें कैंसर होने का खतरा भी रहता है।

यूक्रेन ने अज़ोव सागर में कथित तौर पर अवैध माल ले जा रहे पांच जहाजों पर हमला किया है।

अज़ोव सागर के बारे में:

  • अवस्थिति: पूर्वी यूरोप में; रूस (पूर्व) और यूक्रेन (उत्तर और पश्चिम) के बीच; क्रीमिया प्रायद्वीप इसके पश्चिम में स्थित है।
  • यह केर्च जलसंधि के माध्यम से काला सागर से जुड़ा हुआ है।
  • यह काला सागर, मरमारा सागर, एजियन सागर और भूमध्य सागर के माध्यम से अटलांटिक महासागर से जुड़ा हुआ है।
  • अज़ोव सागर विश्व का सबसे उथला सागर है (औसत गहराई केवल 7 मीटर या 23 फीट)।
  • कम लवणता: डोन और कुबान जैसी प्रमुख नदियों से बड़ी मात्रा में ताजा जल मिलने के कारण इसमें लवणता स्तर कम है।
  • प्रमुख विशेषताएँ: 113 किलोमीटर लंबी बालू-भित्ति जिसे 'अरबात स्पिट' के नाम से भी जाना जाता है।
  • मुख्य बंदरगाह: मारियुपोल और बर्डियांस्क (यूक्रेन), येयस्क और टैगान्रोग (रूस)।
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लिग्नोसेल्युलोसिक पदार्थ (Lignocellulosic Material)

पौधों की कोशिका भित्ति का एक प्रमुख घटक, जिसमें लिग्निन, सेलूलोज़ और हेमिसेलूलोज़ शामिल होते हैं। यह 2G जैव ईंधन उत्पादन के लिए एक महत्वपूर्ण कच्चा माल है।

'ड्रॉप-इन' ईंधन ('Drop-in' Fuel)

एक नवीकरणीय ईंधन जो वर्तमान इंजनों, ईंधन प्रणालियों या ईंधन वितरण अवसंरचना में किसी भी बदलाव की आवश्यकता के बिना सीधे पारंपरिक जीवाश्म ईंधन (जैसे डीजल) को प्रतिस्थापित कर सकता है।

द्वितीय पीढ़ी (2G) जैव ईंधन (2nd Generation Biofuels)

गैर-खाद्य बायोमास, जैसे कि कृषि अवशेष, वानिकी अपशिष्ट, और लिग्नोसेल्युलोसिक पदार्थ, से उत्पादित जैव ईंधन।

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