हाल ही में कोडाईकनाल सौर वेधशाला ने यह पता लगाया है कि 'सुपरग्रेन्यूलेशन' सौर चक्रों (सोलर साइकल्स) के साथ कैसे अभिक्रिया करते हैं। इससे सौर चक्रों का पूर्वानुमान करना आसान हो गया है।
- 'सुपरग्रेन्यूलेशन' सूर्य की सतह पर बनने वाले विशाल संवहन पैटर्न होते हैं। ये मिलकर सूर्य की सतह पर एक विशाल जाल जैसी संरचना बनाते हैं।
सौर चक्र के बारे में
- सौर चक्र सूर्य की चुंबकीय गतिविधि या सक्रियता का एक आवर्ती क्रम है, जो लगभग प्रत्येक 11 वर्ष पर दोहराया जाता है।
- प्रक्रिया: सूर्य आवेशित गैस (प्लाज्मा) से बना है जो एक विशाल चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करती है। प्रत्येक 11 साल में, यह चुंबकीय क्षेत्र अपनी दिशा बदल लेता है यानी उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव आपस में बदल जाते हैं।
- सौर चक्र के विभिन्न चरण:
- सोलर मिनिमम (सौर न्यूनतम): सौर चक्र की शुरुआत सोलर मिनिमम से होती है। इसमें सूर्य बहुत कम सक्रिय होता है और सौर कलंक (sunspots) कम होते हैं।
- सौर कलंक: सूर्य की सतह पर काले धब्बों की तरह दिखने वाले और ठंडे क्षेत्र होते हैं, जो प्रबल चुंबकीय गतिविधि के कारण बनते हैं।
- हालांकि ये क्षेत्र आसपास की सतह की तुलना में ठंडे होते हैं, फिर भी जब सूर्य पर सौर कलंकों की संख्या अधिक होती है, तो सूर्य कुल मिलाकर अधिक ऊर्जा उत्सर्जित करता है।
- सोलर मैक्सिमम (सौर अधिकतम): जैसे-जैसे सूर्य अधिक सक्रिय होता जाता है तो वह अधिक "तूफानी" रूप धारण कर लेता है। इस अवधि में सूर्य पर सौर कलंकों की संख्या सबसे अधिक होती है तथा सौर प्रस्फोट व अन्य गतिविधियां भी बहुत बार घटित होती हैं।
- सोलर मिनिमम (सौर न्यूनतम): सौर चक्र की शुरुआत सोलर मिनिमम से होती है। इसमें सूर्य बहुत कम सक्रिय होता है और सौर कलंक (sunspots) कम होते हैं।
- अंतरिक्ष मौसम पर प्रभाव: सक्रिय चरणों के दौरान, सूर्य पर 'सौर ज्वालाएं' (सोलर फ्लेयर्स) और 'कोरोनल मास इजेक्शन' (CMEs) जैसी बड़ी परिघटनाएं घटित होती हैं।
- सौर ज्वालाएं' (सोलर फ्लेयर्स): ये सूर्य के सौर कलंक क्षेत्रों में संचित चुंबकीय ऊर्जा के अचानक मुक्त होने से उत्पन्न एक्स-रे और विकिरण के तीव्र प्रस्फोट होते हैं। ये विकिरण प्रकाश की गति से अंतरिक्ष में फैलते हैं।
- कोरोनल मास इजेक्शन: प्लाज्मा और चुंबकीय क्षेत्रों के विशाल बुलबुले या बादल होते हैं, जिन्हें सूर्य अंतरिक्ष में बहुत तेजी से उछाल देता है।
- प्रभाव:
- ये पृथ्वी पर बिजली ग्रिड, नौवहन प्रणाली, रेडियो संचार और उपग्रहों को बाधित कर सकते हैं।
- इसके अलावा, ये अंतरिक्ष यात्रियों को प्रभावित कर सकते हैं और पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र में भू-चुंबकीय तूफान उत्पन्न कर सकते हैं, जिससे 'ऑरोरा' (ध्रुवीय ज्योति) जैसी परिघटनाएं दिखाई देती हैं।
कोडाईकनाल सौर वेधशाला के बारे में
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