पेट्रोलियम निर्यातक देशों का संगठन प्लस (OPEC+) | Current Affairs | Vision IAS

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OPEC+ देशों ने सितंबर 2026 से तेल उत्पादन बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की है

OPEC के बारे में (मुख्यालय: वियना, ऑस्ट्रिया)

  • यह 11 तेल-निर्यातक विकासशील देशों का एक स्थायी अंतर-सरकारी संगठन है।
  • सदस्य: अल्जीरिया, कांगो गणराज्य, इक्वेटोरियल गिनी, गैबॉन, ईरान, इराक, कुवैत, लीबिया, नाइजीरिया, सऊदी अरब और वेनेजुएला।
    • भारत इसका सदस्य नहीं है।
    • पूर्व सदस्य: इक्वाडोर, इंडोनेशिया, कतर, अंगोला, संयुक्त अरब अमीरात (UAE)।
  • स्थापना: 1960 में बगदाद सम्मेलन के दौरान ईरान, इराक, कुवैत, सऊदी अरब और वेनेजुएला द्वारा स्थापना।
  • उद्देश्य: सदस्य देशों के बीच पेट्रोलियम नीतियों का समन्वय और एकीकरण करना ताकि  पेट्रोलियम उत्पादकों के लिए उचित और स्थिर मूल्य सुरक्षित हो सके।

OPEC+ के बारे में

  • स्थापना: अमेरिका में शेल ऑयल के उत्पादन में तेज वृद्धि के कारण वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई। इसके जवाब में 2016 में OPEC ने 10 अन्य तेल उत्पादक देशों के साथ समझौता कर OPEC+ समूह का गठन किया।
  • सदस्य: OPEC सदस्य देशों के अलावा रूस, अज़रबैजान, कजाकिस्तान, बहरीन, ब्रुनेई, मलेशिया, मैक्सिको, ओमान, दक्षिण सूडान और सूडान।

एग्रीवोल्टिक्स को बढ़ती ऊर्जा मांग और खाद्य सुरक्षा के बीच संतुलन के लिए एक प्रभावी समाधान माना जा रहा है।

एग्रीवोल्टिक्स के बारे में

  • उत्पत्ति: यह शब्दावली 1981 में जर्मन वैज्ञानिकों एडॉल्फ गोएट्ज़बर्गर और आर्मिन ज़ास्ट्रो द्वारा गढ़ा गया था।
  • यह सौर फोटोवोल्टिक ऊर्जा उत्पादन और कृषि, दोनों के लिए भूमि का एक साथ उपयोग करने की प्रक्रिया है।
  • क्रियाविधि: कृषि भूमि को खाली करने के बजाय सौर पैनलों को ऊँचे ढांचों पर लगाया जाता है। 
    • इससे कृषि मशीनें पैनलों के नीचे आसानी से चल सकती हैं और फसलें आंशिक छाया  में उगाई जा सकती हैं।
  • लाभ: भूमि क दोहर उपयोग से संसाधनों का अधिक कुशल उपयोग होता है। किसानों की आय में वृद्धि होती है। अनुकूल सूक्ष्म जलवायु बनती है, जिससे जल की हानि कम होती है, गर्मी का तनाव घटता है और फसलों की वृद्धि के लिए अनुकूल दशाएं उपलब्ध होती हैं।

शिपकी ला, लिपुलेख दर्रा और नाथूला के माध्यम से छह वर्षों के बाद भारत और चीन के बीच सीमा-पार व्यापार फिर से शुरू हो गया है। 

शिपकी ला दर्रे के बारे में

  • स्थान: किन्नौर जिला, हिमाचल प्रदेश।
  • यह एक पर्वतीय दर्रा और सीमा पोस्ट है।
  • सतलुज नदी शिपकी ला खड्ड के माध्यम से भारत में प्रवेश करती है, जिससे यह हिमालय का एक महत्वपूर्ण नदी दर्रा है।।

लिपुलेख दर्रे के बारे में

  • अवस्थिति: भारत, चीन (तिब्बत) और नेपाल के त्रि-जंक्शन  के पास स्थित है। यह उत्तराखंड (पिथौरागढ़ जिला) में स्थित है।
  • यह काली नदी घाटी में स्थित कुमाऊं क्षेत्र का एक प्रमुख दर्रा है और कैलाश-मानसरोवर यात्रा के लिए एक महत्वपूर्ण मार्ग है।

नाथूला के बारे में

  • अवस्थिति: हिमालय की डोंगक्या श्रेणी (पूर्वी सिक्किम) में।
  • 4,310 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह दर्रा सिक्किम को तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र से जोड़ता है।

राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति (SC-NBWL) ने केंद्र प्रायोजित योजना के तहत पिग्मी हॉग को क्रिटिकली एंडेंजर्ड प्रजातियों की सूची में शामिल करने की सिफारिश की है।

पिग्मी हॉग के बारे में

  • विशेषता: यह विश्व का सबसे छोटा और सबसे दुर्लभ जंगली सूअर है। यह पोरकुला वंश की एकमात्र जीवित प्रजाति है।
  • संरक्षण स्थिति: IUCN (एंडेंजर्ड); वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 (अनुसूची I) और CITES (परिशिष्ट I)।
  • पर्यावास: उप-हिमालयी तराई-दुआर क्षेत्र के ऊंचे जलोढ़ घास के मैदान।
  • वितरण: अब मुख्य रूप से असम तक सीमित; मानस राष्ट्रीय उद्यान में प्राकृतिक आबादी पाई जाती है, जबकि ओरांग राष्ट्रीय उद्यान, बरनाड़ी वन्यजीव अभयारण्य तथा सोनाई-रूपाई वन्यजीव अभयारण्य में इसका पुनर्स्थापन किया गया है।
  • व्यवहार: यह छोटे पारिवारिक समूहों में रहता है। यह घास से बने जमीनी घोंसले बनाकर उनमें निवास करता है।

भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (ZSI) ने भारत के लेपिडॉप्टेरा (तितलियां और पतगों/मोथ) का पहला प्रामाणिक कैटलॉग प्रकाशित किया है। इस कैटलॉग में 13,703 प्रजातियों का दस्तावेजीकरण किया गया है, जो विश्व की कुल लेपिडोप्टेरा विविधता का लगभग 8.25% है।

लेपिडॉप्टेरा (लेपिडोप्टेरा गण) के बारे में

  • अर्थ: शल्क-युक्त पंख; लेपिडो (शल्क) और प्टेरा (पंख)।
  • स्थिति: यह कीटों का दूसरा सबसे बड़ा गण है। इसमें 1,80,000 से अधिक प्रजातियां तथा कुल लगभग 135 शामिल हैं।
  • समूह:
    • तितलियां: दिन में सक्रिय, रंग-बिरंगी, सिरे पर गदा जैसी एंटीना।
    • मोथ/पतंगे (Moths): अधिकांश रात्रिचर, सामान्यतः फीके रंग के, धागेनुमा या कंघीनुमा एंटीना, तितलियों की तुलना में अधिक विविध। 
    • स्किपर्स: तितलियों और पतंगों के बीच का मध्यवर्ती समूह। इनकी एंटीना के सिरे हुक के आकार के होते हैं।
  • पारिस्थितिक महत्व: महत्वपूर्ण परागणकर्ता, शाकाहारी, अपर्दभक्षी (detritivores), और शिकार बनने वाली प्रजातियां, जिनमें छलावरण, अनुकरण, विषाक्तता और चमगादड़ों की प्रतिध्वनि-आधारित पहचान से बचने की क्षमता जैसी विशेष अनुकूलन पाए जाते हैं।
    • पेपर्ड मोथ प्राकृतिक चयन (औद्योगिक मेलैनिज़्म) का उत्कृष्ट उदाहरण है।

प्रधान मंत्री ने विशाखापट्टनम में दक्षिण भारत की पहली सेमीकंडक्टर निर्माण सुविधा की आधारशिला रखी। इसे 'भारत सेमीकंडक्टर मिशन' (ISM 1.0) के तहत मंजूरी दी गई है।

भारत सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) के बारे में

  • शुभारंभ: भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण और डिजाइन का एक वैश्विक केंद्र बनाने और एक मजबूत सेमीकंडक्टर व डिस्प्ले प्रणाली का निर्माण करने के उद्देश्य से 2021 में शुरू किया गया।
  • संबद्ध मंत्रालय: केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय।
  • चार उप-योजनाएं: सेमीकंडक्टर फैब योजना, डिस्प्ले फैब योजना, कंपाउंड सेमीकंडक्टर और ATMP योजना, और डिजाइन से संबद्ध प्रोत्साहन योजना।

जैव विविधता अभिसमय (CBD) के तहत 'वैज्ञानिक, तकनीकी और प्रौद्योगिकीय सलाह पर सहायक निकाय' (SBSTTA) की 28वीं बैठक में सिंथेटिक बायोलॉजी से जुड़े प्रमुख मुद्दों पर चर्चा की गई।

सिंथेटिक बायोलॉजी के बारे में

  • सिंथेटिक बायोलॉजी में आनुवंशिक अभियांत्रिकी और जैव प्रौद्योगिकी  का उपयोग करके जीवों का निर्माण या उनमें परिवर्तन किया जाता है। इसका उपयोग कृषि, चिकित्सा, उद्योग तथा पर्यावरणीय पुनर्स्थापन जैसे क्षेत्रों में किया जाता है।
  • संभावित लाभ: पारिस्थितिकी तंत्र की पुनर्बहाली में, आक्रामक प्रजातियों पर नियंत्रण में, रसायनों और दवाओं का सतत उत्पादन में।

प्रमुख चिंताएं

  • संशोधित जीवों के अनजाने में प्रसार से पारिस्थितिकी को खतरा।
  • तेजी से विकसित होती तकनीक के कारण विनियामक चुनौतियां।
  • असमान पहुंच और लाभ-साझाकरण, क्योंकि पेटेंट मुख्य रूप से विकसित देशों में केंद्रित हैं।

विशाखापत्तनम के भोगापुरम स्थित अल्लूरी सीताराम राजू अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर 13,000 से अधिक जनजातीय महिलाओं और छात्राओं ने सबसे बड़े धिमसा नृत्य का प्रदर्शन कर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया।

धिमसा नृत्य के बारे में

  • उत्पत्ति: उत्तरी आंध्र प्रदेश की अराकु घाटी के पहाड़ी आदिवासियों का पारंपरिक लोक नृत्य।
  • नर्तक: इसे सामान्यतः 15–20 जनजातीय महिलाएँ पारंपरिक वेशभूषा और आभूषण पहनकर प्रस्तुत करती हैं।
  • नृत्य शैली: यह वृत्ताकार समूह नृत्य है। इसमें सभी कलाकार स्थानीय वाद्ययंत्रों की ताल पर एक साथ सामंजस्यपूर्ण ढंग से नृत्य करती हैं।
  • वाद्ययंत्र: मोरी (सुषिर/वायु वाद्ययंत्र), थुदुम (ड्रम), और दप्पू (ताल वाद्ययंत्र)।
  • अवसर: यह नृत्य विवाह समारोह, फसल उत्सव तथा सामुदायिक आयोजनों  के दौरान किया जाता है।

सबरीमाला के वन जलग्रहण क्षेत्र  में 339 मिमी तक हुई भारी वर्षा के कारण भीषण बाढ़ आई। इसकी वजह से पंबा नदी अपने किनारों से बाहर बहने लगी।

पम्पा नदी के बारे में

  • उपनाम: इसे 'दक्षिण गंगा' या 'दक्षिण भागीरथी' के नाम से जाना जाता है।
  • लंबाई: केरल में पश्चिम की ओर बहने वाली तीसरी सबसे लंबी बारहमासी नदी।
  • उद्गम: पश्चिमी घाट के पीरुमेदु पठार में पुलाचिमलाई पहाड़ी (1,650 मीटर) से निकलती है।
  • प्रवाह: यह वेम्बनाड झील में गिरती है और इसके बाद अरब सागर में जाकर मिलती है।
  • सांस्कृतिक महत्व: यह सबरीमाला तीर्थयात्रा के लिए एक पवित्र नदी मानी जाती है। इसके तट पर मारामोन सम्मेलन  और चेरुकोल्पुझा सम्मेलन आयोजित होते हैं। यह अरनमुला वल्लमकली , अर्थात स्नेक बोट रेस तथा अरनमुला कन्नड़ी शिल्प के लिए भी प्रसिद्ध है।

वैज्ञानिकों का कहना है कि यूरोप के जंगलों की आग 'क्लाइमेट व्हिपलैश' और 'फायर क्लाउड्स' नामक परिघटनाओं से तेजी से भड़क रही है। 

क्लाइमेट व्हिपलैश के बारे में

  • क्लाइमेट व्हिपलैश का अर्थ है अत्यधिक आर्द्र और अत्यधिक शुष्क परिस्थितियों के बीच बहुत तेजी से बदलाव होना।
  • उदाहरण: पहले अत्यधिक वर्षा होने से वनस्पति तेजी से बढ़ती है। इसके बाद हीटवेव (लू) आने पर यही वनस्पति सूख जाती है। सूखी वनस्पति जंगल की आग के लिए ईंधन का काम करती है।

फायर क्लाउड्स (पायरोक्यूमुलोनिम्बस/अग्नि कपासी-वर्षी मेघ) के बारे में

  • यह जंगल की भीषण आग से उत्पन्न विशाल तड़ितझंझा वाले बादल होते हैं।
  • निर्माण: जंगल की आग से उत्पन्न अत्यधिक गर्मी धुएँ, राख और नमी को तेज़ी से ऊपर उठाती है। ऊँचाई पर पहुँचने पर तापमान कम होने से धुएँ के कणों के चारों ओर संघनन होता है। इससे विशाल अग्नि कपासी-वर्षी मेघ बन जाते हैं।
  • प्रभाव: जंगल की आग को और अधिक फैलाते हैं, बादलों की ऊपरी परतों में बर्फ के कणों और राख के टकराने से बिजली  उत्पन्न हो सकती है, ये तड़ितझंझा भी उत्पन्न कर सकते हैं।
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Shale Oil

A type of crude oil extracted from shale rock formations through a process called hydraulic fracturing (fracking). Its increased output, particularly from the United States, has significantly impacted global oil markets and influenced the formation of OPEC+.

OPEC+

An expanded group of oil-producing nations formed in 2016 by OPEC members and 10 other oil-producing countries, primarily in response to increased US shale oil output. Its goal is to coordinate policies to influence global oil prices.

OPEC

ऑर्गेनाइजेशन ऑफ द पेट्रोलियम एक्सपोर्टिंग कंट्रीज (Organization of the Petroleum Exporting Countries)। यह पेट्रोलियम उत्पादक देशों का एक कार्टेल है जो तेल की कीमतों को प्रभावित करने की कोशिश करता है।

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