राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति (SC-NBWL) ने सतपुड़ा-मेलघाट टाइगर कॉरिडोर से गुजरने वाली रेलवे लाइन परियोजना को सैद्धांतिक मंजूरी दी | Current Affairs | Vision IAS

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In Summary

  • बाघ गलियारे वन्यजीवों के फैलाव को सुगम बनाते हैं; भारत में विश्व के 75% बाघ हैं, जिन्हें लुप्तप्राय प्रजातियों की सूची में शामिल किया गया है।
  • सतपुड़ा टीआर (मध्य प्रदेश) और मेलघाट टीआर (महाराष्ट्र) बाघों के महत्वपूर्ण आवास हैं, जिनका प्रबंधन एनटीसीए द्वारा प्रोजेक्ट टाइगर के तहत किया जाता है।
  • प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड (एनबीडब्ल्यूएल) वन्यजीव संरक्षण और सतत विकास पर सलाह देता है।

In Summary

टाइगर कॉरिडोर यानी बाघ गलियारे वन्यजीवों, विशेषकर बाघ, तेंदुआ, शाकाहारी जीवों और स्लॉथ भालू जैसे जानवरों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक सुरक्षित आवाजाही का मार्ग प्रदान करते हैं। इससे वन्यजीव नए पर्यावासों में फैल सकते हैं।

बाघ (Panthera tigris) के बारे में

  • यह विश्व की सबसे बड़ी जंगली बिल्ली की प्रजाति है।
  • विश्व के लगभग 75% जंगली बाघ भारत में पाए जाते हैं।
  • बाघ पर्यावास वाले देश: बांग्लादेश, भूटान, चीन, भारत, इंडोनेशिया आदि।
  • मुख्य पर्यावास: वन, सवाना, झाड़ियाँ, घास के मैदान, आर्द्रभूमि (अंतर्देशीय) आदि।
  • संरक्षण स्थिति: 
    • IUCN रेड लिस्टएंडेंजर्ड; 
    • वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972: अनुसूची-1,
    • CITES: परिशिष्ट-1.  
  • टाइगर रिजर्व (TR): भारत में प्रोजेक्ट टाइगर के तहत राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) द्वारा वर्तमान में अधिसूचित 58 टाइगर रिजर्वों का प्रबंधन किया जाता है।

सतपुड़ा टाइगर रिजर्व (मध्य प्रदेश) के बारे में

  • यह विश्व के सबसे बड़े सन्निहित (भौगोलिक रूप से जुड़े) बाघ पर्यावासों में से एक का हिस्सा है।
  • यह नर्मदापुरम जिले में नर्मदा नदी के दक्षिण में स्थित है।
  • इसके कोर क्षेत्र में सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान, बोरी और पचमढ़ी वन्यजीव अभयारण्य शामिल हैं।
  • प्रमुख वनस्पतियां: दक्षिणी उष्णकटिबंधीय आर्द्र एवं शुष्क पर्णपाती वन।
  • प्रमुख जीव: बंगाल टाइगर, तेंदुआ, स्लोथ भालू, ढोल (जंगली कुत्ता), गौर।

मेलघाट टाइगर रिजर्व (महाराष्ट्र) के बारे में

  • यह अमरावती जिले में सतपुड़ा पर्वतमाला की दक्षिणी शाखा गाविलगढ़ पहाड़ियों में स्थित है।
  • इसे 1967 में वन्यजीव अभयारण्य घोषित किया गया तथा 1974 में टाइगर रिजर्व का दर्जा मिला।
    • यह 1973-74 में 'प्रोजेक्ट टाइगर' के तहत अधिसूचित प्रथम नौ टाइगर रिजर्वों में शामिल था।
  • यह खांडू, खापरा, सिपना, गाडगा और डोलार नदियों द्वारा अपवाहित होता है, जो ताप्ती नदी की सहायक नदियाँ हैं। 
  • प्रमुख वनस्पति: सागौन, हलदु, साजा , धावड़ा।
  • प्रमुख जीव: बाघ, तेंदुआ, ढोल, स्लोथ भालू, गौर।

राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति (SC-NBWL) के बारे में

  • राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड, वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत एक वैधानिक निकाय है। इसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री करते हैं।
    • राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति (SC-NBWL) की अध्यक्षता केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री करते हैं।
  • यह समिति वन्यजीवों और वनों के संरक्षण एवं सुरक्षा से संबंधित मामलों पर सरकार को सलाह देती है। साथ ही, यह सुनिश्चित करती है कि संरक्षित क्षेत्रों और उनके आसपास विकास कार्य संतुलित और संधारणीय तरीके से किए जाएं।
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राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति (SC-NBWL) (Standing Committee of the National Board for Wildlife)

वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की एक समिति, जिसकी अध्यक्षता केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री करते हैं, और यह वन्यजीव संरक्षण से संबंधित मामलों पर सलाह देती है।

प्रोजेक्ट टाइगर (Project Tiger)

यह भारत सरकार द्वारा 1973 में शुरू की गई एक प्रमुख संरक्षण परियोजना है जिसका उद्देश्य बाघों की आबादी को विलुप्त होने से बचाना और उनके प्राकृतिक आवासों का संरक्षण करना है। इसके तहत बाघ अभयारण्यों की स्थापना की गई है।

राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) (National Tiger Conservation Authority)

वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत गठित एक वैधानिक निकाय, जिसका कार्य बाघों के संरक्षण और उनके पर्यावास के प्रबंधन को सुनिश्चित करना है।

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