यह रिपोर्ट उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों द्वारा अपनी आधिकारिक वेबसाइटों पर सार्वजनिक की गई जानकारी का मूल्यांकन करती है।
न्यायिक पारदर्शिता सूचकांक के बारे में
- इसे 2025 में जस्टिस, एक्सेस एंड लोअरिंग डिलेज़ इन इंडिया (JALDI) पहल द्वारा तैयार किया गया था।
- JALDI का दृष्टिकोण: शून्य विलंब वाली न्यायपालिका; समावेशी और सुलभ अदालतें; प्रभावी और गुणवत्तापूर्ण न्याय।
- यह सूचकांक ऐसे आधारभूत मानक प्रदान करता है, जिनके आधार पर भारतीय न्यायालयों में पारदर्शिता का आकलन किया जा सकता है।
- इसमें न्यायिक पारदर्शिता का मूल्यांकन तीन श्रेणियों में किया जाता है; न्यायिक प्रक्रियाएं; संस्थागत शासन एवं प्रशासन तथा न्यायिक एवं प्रशासनिक कार्मिक।
- न्यायिक पारदर्शिता का अर्थ है कि न्यायालय अपनी वेबसाइटों पर सक्रिय रूप से ऐसी जानकारी सार्वजनिक करें, जिससे आम लोग न्यायालयों के कामकाज का आकलन कर सकें।
न्यायिक पारदर्शिता से जुड़ी चिंताएं
- न्यायिक प्रक्रियाओं को सार्वजनिक नहीं करना: कोई भी उच्च न्यायालय (HC) अपनी वेबसाइट पर न्यायाधीशों के स्वयं को किसी मामले से अलग करने (Judicial Recusal) के मानदंड प्रकाशित नहीं करता है।
- केवल दिल्ली उच्च न्यायालय ने “स्वयं को किसी मामले से अलग करने” का अनुरोध करने की प्रक्रिया बताई है।
- उच्चतम न्यायालय में लाइव-स्ट्रीमिंग के नियमों का अभाव: स्वप्निल त्रिपाठी बनाम भारत संघ के ऐतिहासिक निर्णय में उच्चतम न्यायालय नियम, 2013 में संशोधन का निर्देश दिया गया था। इसके बावजूद न्यायिक कार्यवाही की लाइव-स्ट्रीमिंग के लिए औपचारिक दिशा-निर्देश अब तक लागू नहीं किए गए हैं और न ही उच्चतम न्यायालय की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं।
- बजटीय अपारदर्शिता: 8 उच्च न्यायालयों ने अपने बजट का कोई विवरण प्रकाशित नहीं किया है।
- 15 उच्च न्यायालयों ने वर्तमान या पिछले वर्षों के व्यय से संबंधित कोई जानकारी सार्वजनिक नहीं की है।
- संपत्ति का प्रकटीकरण: किसी भी उच्च न्यायालय ने अपने सभी न्यायाधीशों की संपत्ति का पूर्ण विवरण प्रकाशित नहीं किया है।
- केवल 7 उच्च न्यायालयों में कुछ न्यायाधीशों ने ही अपनी संपत्ति सार्वजनिक की है।
- न्यायिक नियुक्तियां: उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीशों की नियुक्ति तथा उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों के स्थानांतरण की अनुशंसा के कारणों को सीमित तौर पर सार्वजनिक किया गया है।
न्यायालयों में अधिक न्यायिक पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रमुख सिफारिशें1. नियुक्तियों और स्थानांतरण में पारदर्शिता
2. वित्तीय पारदर्शिता
3. वर्चुअल (ऑनलाइन) पहुंच का विस्तार
4. अनुशासनात्मक प्रक्रिया में स्पष्टता
5. अन्य सिफारिशें
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