चीन ने स्कारबोरो शोल के आसपास स्थापित हुआंगयान दाओ राष्ट्रीय प्राकृतिक रिजर्व के लिए प्रबंधन उपाय जारी किए हैं। इन उपायों के तहत नियमित गश्त की जाएगी। साथ ही, बिना अनुमति मछली पकड़ने तथा प्राकृतिक संसाधनों के अवैध दोहन के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
- इसके अतिरिक्त, चीन ने विवादित स्कारबोरो शोल के निकट सैन्य अभ्यास भी किए हैं, जिससे क्षेत्रीय तनाव और बढ़ गया है।
दक्षिण चीन सागर के बारे में

- भौगोलिक स्थिति: यह पश्चिमी प्रशांत महासागर का एक महत्वपूर्ण सीमांत सागर है। यह ब्रुनेई, कंबोडिया, चीन, इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलीपींस, सिंगापुर, ताइवान और वियतनाम से घिरा हुआ है।
- यह मलक्का जलडमरूमध्य के माध्यम से प्रशांत और हिंद महासागर को जोड़ता है।
- नाइन-डैश लाइन: चीन ने 1947 में नाइन-डैश लाइन के आधार पर दक्षिण चीन सागर के लगभग 90% क्षेत्र पर अपना दावा किया था। 2016 में स्थायी मध्यस्थता न्यायालय ने संयुक्त राष्ट्र समुद्री विधि अभिसमय (UNCLOS) के तहत इस दावे को कानूनी रूप से अमान्य घोषित किया। हालांकि, चीन ने इस निर्णय को स्वीकार नहीं किया।
- विवादित क्षेत्र
- पारसेल द्वीपसमूह: इसमें लगभग 130 द्वीप और प्रवाल भित्तियाँ शामिल हैं। 1974 से इन पर चीन का नियंत्रण है। वियतनाम और ताइवान भी इन पर अपना दावा करते हैं।
- स्प्रैटली द्वीपसमूह: इसमें कई द्वीप, प्रवाल भित्तियां और रेतीले टापू शामिल हैं। इन पर चीन, वियतनाम, ताइवान, फिलीपींस, मलेशिया और ब्रुनेई सभी अपना दावा करते हैं। इसी क्षेत्र में सेकंड थॉमस शोल भी स्थित है।
- स्कारबोरो शोल (हुआंगयान द्वीप): यह फिलीपींस के अनन्य आर्थिक क्षेत्र (EEZ) के भीतर स्थित है, लेकिन ऐतिहासिक आधार पर चीन भी इस पर दावा करता है।
दक्षिण चीन सागर का महत्त्व | |
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